
हर साल गिरता जा रहा वॉटर लेबल वजह बरसाती पानी सहेजने कोई सिस्टम नहीं
जांजगीर-चांपा. जिला मुख्यालय जांजगीर में हर साल वाटर लेबल नीचे जा रहा है। क्योंकि यहां बरसाती पानी को सहेजने कोई सिस्टम ही नहीं है। वाटर हार्वेस्टिंग सिस्टम खुद से बनवाने कोई तैयार नहीं और जिम्मेदार अफसर इसे बनवा पाने में नाकाम है।
शहर की पुरानी बसाहट की बात हम छोड़ भी दे तो भी पिछले पांच-छह सालों में ही नगरपालिका द्वारा शहर में भवन निर्माण के लिए जिन्हें एनओसी जारी की गई है, उन मकानों में भी वाटर हार्वेस्टिंग सिस्टम बनाया गया है या नहीं इसकी भी जानकारी पालिका में पास नहीं है। जमीनी हकीकत तो यह है कि ऐसा कोई रिकार्ड भी दफ्तर में मौजूद नहीं है कि जिला मुख्यालय में कितने भवनों में यह सिस्टम बना है। निजी भवनों की बात छोड़ दे तो सरकारी भवनों में भी इस नियमों की धज्जियां उड़ रही है। शहर के अधिकांश सरकारी भवनों में वाटर हार्वेस्टिंग सिस्टम बना ही नहीं है और जहां बनाया गया था वे भी अब खराब हो चुके हैं। जिला अस्पताल, कलेक्टोरेट, डीईओ आफिस, नगरपालिका भवन में बने वाटर हार्वेस्टिंग सिस्टम खराब होकर पड़े हैं। नपा के अफसर कभी-कभार नोटिस बस जारी कर देते हैं। इसके आगे कार्रवाई नहीं बढ़ती। शासन ने ग्रामीण और नगरीय निकाय क्षेत्र के सभी पक्के मकानों में रेन वाटर हार्वेस्टिंग सिस्टम लगाना अनिवार्य किया है। इसके लिए आवश्यक आवश्यक गाइड लाइन तैयार की है। इसके तहत नए भवनों का पंजीयन उसी स्थिति में किया जाना है जब उसमें पानी को सहेजने रेन वाटर हार्वेस्टिंग सिस्टम लगा हो, मगर लोगों में जागरूकता का अभाव और प्रशासन के लचीले रवैये के कारण यह योजना फाइलों में दबी है।
क्यों नहीं गिरेगा वॉटर लेबल
एक ओर जहां घरों में रेन वॉटर हार्वेस्टिंग सिस्टम बनाया नहीं जा रहा। दूसरी ओर शहरी क्षेत्र में अब हर गली में सीसी रोड और नाली बन चुकी है जिसके चलते बारिश का पानी पूरी तरह से व्यर्थ होकर बह रहा है। ऐसी स्थिति में वाटर लेबल रिचार्ज ही नहीं हो पा रहा। ऐसे में वाटर लेबल कैसे नहीं गिरेगा जब जमीन में पानी स्टोर ही नहीं होगा। जबकि सिस्टम बनवाने में आने वाला खर्च भी भवन मालिकों को वापस मिल जाता है।
नपा में फंड में लाखों जमा पर बनवाएं कौन
बता दें, भवन अनुज्ञा देते समय नपा द्वारा रेन वाटर हार्वेस्टिंग सिस्टम बनवाने के लिए १० से १५ हजार रुपए तक भवन मालिक से पालिका के फंड में जमा कराया जाता है। यह राशि सिक्योरिटी मनी के रूप में होती है। भवन में हार्वेस्टिंग सिस्टम बन जाने के बाद यह राशि वापस भी कर दी जाती है। नपा के फंड में लाखों रुपए जमा है क्योंकि अधिकांश लोग सिस्टम बनवाते ही नहीं और राशि वापस नहीं मिलती। दूसरी ओर, अफसर-इंजीनियर भी साइट में देखने तक नहीं जाते कि भवन में सिस्टम बना है या नहीं। जबकि नियम के मुताबिक अगर सिस्टम नहीं बनाया गया है तो पालिका उस राशि का उपयोग कर सिस्टम बनवा भी सकती है मगर इसमें कई प्रक्रिया पूरी करनी पड़ती है और इस पचड़े में कोई अफसर नहीं फंसना चाहते।
क्या है रेन वॉटर हार्वेस्टिंग सिस्टम
निर्माणाधीन मकान के आसपास ही एक सोख्ता गड्ढ़ा बनाकर इसे मकान की छत से पाइप के सहारे जोड़ा जाता है। इस पर अधिक से अधिक १५ से २० हजार रुपए खर्च आता है। इस सिस्टम से बारिश के दौरान छत का पानी इसी गड्ढ़े में चला जाता है। इससे आसपास के जल स्त्रोतों, हैंडपंप और ट्यूबवेल के जलस्तर में बढ़ोतरी होती है। वाटर लेबल का स्तर बना रहता है।
पीएन पटनायक सीएमओ जांजगीर-नैला
Published on:
29 Apr 2019 07:14 pm
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