31 जनवरी 2026,

शनिवार

Patrika Logo
Switch to English
home_icon

मेरी खबर

video_icon

शॉर्ट्स

epaper_icon

ई-पेपर

#Topic Of The Day : शिक्षकों को प्रशिक्षण देने के साथ सामुदायिक विकास का भी किया जाता है कार्य : रस्तोगी

सरकारी स्कूलों से समन्वय स्थापित कर वहां की समस्याओं के बारे जानकारी लेकर समाधान तलाशा जाता है।

2 min read
Google source verification
#Topic Of The Day : शिक्षकों को प्रशिक्षण देने के साथ सामुदायिक विकास का भी किया जाता है कार्य  : रस्तोगी

टॉपिक ऑफ द डे
जांजगीर-चांपा. पत्रिका डॉट काम द्वारा आयोजित टॉपिक ऑफ द डे में जिला शिक्षा व प्रशिक्षण संस्थान के सहायक प्राध्यापक उमेश कुमार रस्तोगी उपस्थित हुए। उन्होंने डाइट के बारे में चर्चा करते हुए बताया कि यहां शिक्षक व भावी शिक्षकों को प्रशिक्षण देने के साथ सामुदायिक विकास का कार्य भी किया जाता है, जिसका समाज पर व्यापक असर देखने मिल रहा है।

डाइट के सहायक प्राध्यापक रस्तोगी ने बताया कि जिला शिक्षा व प्रशिक्षण संस्थान में शासकीय व निजी शालाओं के शिक्षकों को शिक्षा की बुनियादी जानकारी के साथ वर्तमान दौर में प्रचलित मान्यताओं व नवाचार के बारे प्रशिक्षण दिया जाता है। साथ ही दो वर्ष का पाठ्यक्रम में भावी शिक्षकों को प्रशिक्षण उपलब्ध कराया जाता है। साथ ही सरकारी स्कूलों से समन्वय स्थापित कर वहां की समस्याओं के बारे जानकारी लेकर समाधान तलाशा जाता है। उन्होंने बताया कि शिक्षकों को स्कूलों में सबसे ज्यादा परेशानी आधारभूत चीजों को लेकर होती है। साथ ही स्कूलों में बच्चों की उपस्थिति को लेकर भी शिक्षकों को बहुत मशक्कत करनी पड़ती है।

ज्यादातर बच्चे गरीब तबके से होते हैं, जो स्कूल की बजाए काम पर ज्यादा पसंद करते हैं। वहीं शिक्षकों पर शासन स्तर से भी कई योजनाओं में सहयोग करने की जिम्मेदारी होती है। इन्हीं सब के बीच तालमेल बैठाना शिक्षकों का महत्वपूर्ण कार्य है।

Read More : 300 व्यापारियों का ऐलान : या तो पकड़ो उत्पातियों को, नहीं तो अघोषित बंद रहेंगी दुकान, पढि़ए खबर...

शिक्षकों को स्कूल में बेहतर तालमेल बनाकर काम करने का प्रशिक्षण दिया जाता है। साथ ही बच्चों को गुणवत्तायुक्त शिक्षा उपलब्ध कराते हुए उनके समुदाय के प्रति जिम्मेदारी का अहसास कराना और पालकों से नियमित मिलकर उनके विचार जानना होता है।

शिक्षकों का जब तक पालकों के साथ मिलना नहीं होगा, तब तक बच्चों की वास्तविक रूचि का पता लगाना कठिन होता है। बच्चे जब तक अपनी रूचि अनुरूप पढ़ाई नहीं करेंगे, तब तक वे सफलता से कोसों दूर रहेंगे। वहीं उनकी रूचि के अनुसार शिक्षा उपलब्ध कराया जाए, तो वे अपने कॅरियर में भी बेहतर प्रदर्शन कर सकते हैं। उन्होंने सामुदायिक विकास के क्षेत्र में डाइट के प्रशिक्षणार्थियों द्वारा किए जा रहे कार्यों के बारे में बताया और कहा कि इसका समाज में व्यापक असर पड़ रहा है।

Story Loader