
जिला पंचायत सीईओ अजीत वसंत आईएएस अधिकारी होने के बाद भी अपने आपको जनता का सेवक न मानकर जनता का शासक मान रहे हैं।
जांजगीर-चांपा. जिला पंचायत सीईओ अजीत वसंत आईएएस अधिकारी होने के बाद भी अपने आपको जनता का सेवक न मानकर जनता का शासक मान रहे हैं।
उनकी तानाशाही इतनी बढ़ गई है कि फिर चाहे वह भाजपा, कांग्रेस या किसी अन्य राजनीतिक दल का प्रतिनिधि हो या आम आदमी वह किसी से भी सीधे मुंह बात नहीं करते। सरपंच सचिव तो उनके लिए ऐसे हैं कि यदि उनके निर्देश को न मानने की थोड़ी मजबूरी भी बता दें तो उन पर कार्रवाई हो जाती है। ऐसा ही कुछ गुरुवार को कनस्दा सरपंच पति व सचिव के साथ हुआ।
बताया जा रहा है कि जिला पंचायत सीईओ ने सरपंच पति को बुलाकर शौैचालय का लक्ष्य पूरा करने को कहा तो सरपंच पति ने उनसे आग्रह किया कि शौचालय निर्माण के लिए उसे जितनी राशि मिली थी उससे वह शौचालय का निर्माण करा चुका है। इतना ही नहीं कई लाख रुपए कर्ज लेकर भी निर्माण कराया है।
अब और कर्ज लेने की स्थिति में वह नहीं है, इसलिए जब उसे मद मिलेगा तभी शौचालय बनवा पाएगा। यह बात जिला पंचायत सीईओ अजीत बसंत को इतनी नागवार गुजरी कि उन्होंने सरपंच पति को सरपंच पद से इस्तीफा देने की बात कही। सरपंच पति ने भी कह दिया उसे जनता ने चुना है।
यदि गांव की जनता कहेगी तो वह इस्तीफा देने को तैयार है। इससे जिला पंचायत सीईओ भड़क गए और तुरंत एसपी को फोन करके उसकी गिरफ्तारी करवा दी। एसपी के निर्देश पर कोतवाली पुलिस ने भी बिना कारण जाने उसके खिलाफ धारा 151, 107, 16 की कार्रवाई करते हुए शुक्रवार को न्यायालय में पेश किया, जहां से उसे न्यायिक हिरासत में भेज दिया गया।
सचिव को किया सस्पेंड
इस तानाशाह कार्रवाई के बाद भी जब जिला पंचायत सीईओ का मन नहीं भरा तो उन्होंने सीधे कनस्दा के सचिव प्रदीप कुमार को भी सस्पेंड कर दिया। जिला पंचायत सीईओ की इस तानाशाही कार्रवाई से पूरे जिले के लोगों में रोष व्याप्त है।
बर्बादी के कगार पर सरपंच
सरकार की ओडीएफ वाली नीति ने सरपंचों को कर्ज के बोझ तले दबाकर रख दिया है। जिले में जहां कुछ ग्राम पंचायतों में इतना पैसा दिया गया है कि सरपंच उस पैसे का बंदरबांट कर रहे हैं तो कई सरपंच कर्ज में डूब गए हैं। इस सबके बाद जिला जिला पंचायत सीईओ को उनकी समस्या का निदान कर ओडीएफ का टारगेट पूरा करना चाहिए वह तानाशाही तरीके से उन्हें जेल भेजने तक में आमादा हो गए हैं।
भाजपा के सरपंच का यह हाल तो बाकी का क्या?
जिला पंचायत सीईओ की तानाशाही से समान्य लोग व अन्य राजनीतिक दलों से चुने सरपंच ही परेशान नहीं है, बल्कि भाजपा के चुने सरपंच व प्रतिनिधियों के साथ यही रवैया अपनाया जा रहा है। कनस्दा सरपंच पति भी भाजपा पार्टी का नेता और उसकी पत्नी सरपंच है।
इसके बाद भी उसे मात्र अपनी बात रखने पर जेल भेज दिया गया। ऐसे में लोगों में यह चर्चा है कि लगता है फिर से अंग्रेजी हुकूमत आ चुकी है। जब सत्ता पर बैठी भाजपा पार्टी के नेताओं और जन प्रतिनिधियों के साथ ऐसा हो रहा है तो अन्य लोगों के साथ क्या होगा। सीईओ की मनमानी से जिपं. अध्यक्ष भी काफी प्रताणित हैं।
पुलिस को वहां भेजा गया
जिला पंचायत सीईओ का फोन आया था। सूचना पर कोतवाली पुलिस को वहां भेजा गया। टीम ने सरपंच पति को गिरफ्तार कर उसके खिलाफ कार्रवाई की है।
-नीतु कमल, एसपी जांजगीर
Published on:
24 Feb 2018 03:40 pm
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