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CG News: शहर की सड़कों के रिन्यूवल कार्य में फंसा पेंच, 6 करोड़ का टेंडर निरस्त

CG News: जशपुरनगर जिले में जिला मुख्यालय जयपुर के गौरवपथ सहित शहर की 11 अन्य सड़कों के रिन्यूवल का टेंडर नगर पालिका ने निरस्त कर दिया है।
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जशपुर नगर

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Shradha Jaiswal

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Updated: 29 May 2025, 4:11 PM IST

CG News: शहर की सड़कों के रिन्यूवल कार्य में फंसा पेंच, 6 करोड़ का टेंडर निरस्त(photo-patrika)

CG News: शहर की सड़कों के रिन्यूवल कार्य में फंसा पेंच, 6 करोड़ का टेंडर निरस्त(photo-patrika)

CG News: छत्तीसगढ़ के जशपुरनगर जिले में जिला मुख्यालय जयपुर के गौरवपथ सहित शहर की 11 अन्य सड़कों के रिन्यूवल का टेंडर नगर पालिका ने निरस्त कर दिया है। इसके पीछे ठेकेदारों की आपसी खींचतान को जिम्मेदार ठहराया जा रहा है। हालांकि नगरपालिका के जिम्मेदार अधिकारी इसे तकनीकि मामला बता रहे हैं।

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CG News: तकनीकी मामला आड़े आने का दिया जा रहा हवाला

प्राप्त जानकारी के अनुसार शहर के गौरवपथ महाराजा चौक से गम्हरिया प्रवेश द्वार तक दो टुकड़ों में बीटी रिन्युवल का प्रस्ताव किया गया था। इसके अलावा सन्ना रोड में बबलू होटल से मीनू जैन के दुकान तक, निक्की चौक (महारानी लक्ष्मीबाई कन्या उच्चतर माध्यमिक विद्यालय) से सेमर तालाब तक, कन्या महाविद्यालय से सिटी कोतवाली तक, भागलपुर चौक से आरा हाउस तक और मधुबन टोली में षड़ंगी के घर से पंचम यादव के घर तक बीटी रिन्यूवल की स्वीकृति दी गई थी।

नगर सरकार ने इसके लिए 6 करोड़ रूपये की स्वीकृति दी थी। बजट प्राप्त होने के बाद नगरपालिका ने निविदा प्रक्रिया शुरू की थी। जशपुर नगरपालिका सीएमओ योगेश्वर उपाध्याय ने कहा की सड़कों के रिन्यूवल के पूर्व में जारी किए गए टेंडर को निरस्त कर रिटेंडर आमंत्रित किया गया है। जल्द ही प्रक्रिया पूरी कर ली जाएगी।

चार ठेकेदारों ने जमा किया था काम लेने के लिए आन लाइन फार्म

इस संबंध में जशपुर नगरपालिका के सीएमओ योगेश्वर उपाध्याय ने बताया कि निविदा प्रक्रिया में चार ठेकेदारों ने इन निर्माण कार्यो में रूचि दिखाते हुए आन लाईन फार्म भरा था। लेकिन डेढ़ माह पहले निविदा ओपन होते ही विवाद की स्थिति बन गई। एक फार्म में तकनीकी खामियां होने के कारण उसे स्कूटनी के दौरान निरस्त कर दिया गया।

शेष बचे हुए तीन फार्म को लेकर भी आपसी खींचतान मच गई। एक फार्म में डामर हाट मिक्सिंग प्लांट के संचालन का पावर आफ एटार्नी पत्र संलग्न ना होने के कारण अमान्य हो जाने से पूरा मामला अधर में लटक गया। दरअसल, नियम के अनुसार टेंडर की प्रक्रिया पूरी करने के लिए कम से कम तीन योग्य ठेकेदारों का होना अनिवार्य है। लेकिन दो फार्म के निरस्त हो गए।