
मुन्ना बजरंगी
जावेद अहमद
जौनपुर. यूपी के कुख्यात माफिया डॉन और भाजपा विधायक कृष्णानंद राय हत्याकांड के आरोपी मुन्ना बजरंगी की सोमवार को गोली मारकर हत्या कर दी गयी। गोली बजरंगी के सर में मारी गयी। हत्या का आरोपी उत्तराखंड और पश्चिमी यूपी के माफिया सुनील राठी पर लगा है। मुन्ना बजरंगी की हत्या के बाद माफिया जगत और अपराध की दुनिया में हड़कम्प मच गया है। बजरंगी जरायम की दुनिया में बहुत ही कुख्यात नाम था। बजरंगी ने ही जौनपुर में पहली बार AK 47 से गोलियां तड़तड़ायी थीं। जौनपुर के जमालपुर तिरहा हत्याकांड में AK 47 का इस्तेमाल किया गया था।
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रामपुर थानांतर्गत जमालापुर तिहरा हत्याकांड जौनपुर में अपराध जगत के लिए बिल्कुल अलग और सनसनीखेज वारदात थी। यह पहला मौका था जब पूर्वांचल में हत्या के लिए एके-47 जैसे अत्याधुनिक और खतरनाक हथियार का इस्तेमाल किया गया था। हत्याकांड पूरी पटकथा फिल्मी अंदाज में लिखी गयी थी। पूरी तरह फिल्मी अंदाज में बाबतपुर की ओर से मारूति वैन में आए करीब छह बदमाशों ने बर्स्ट फायर कर 40 राउंड से अधिक गोलियां चलाईं।
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बड़ी बात यह की जिनकी हत्या की गयी उसी समय तत्कालीन थानाध्यक्ष लोहा सिंह खड़े होकर बात भी कर रहे थे। अचानक जब गोली-बारी होने लगी तो यह देख थानाध्यक्ष जमीन पर लेट गए। घटना को अंजाम देने के बाद अपराधी वापस बाबतपुर रोड स्थित बैरियर पर पहुंचे। बैरियर बंद किया जा रहा था, तो गोलियों से निशाना बनाते हुए बंद हो रहे बैरियर की रस्सी काट कर वाराणसी की तरफ निकल गए।
24 जनवरी 1996 में रामपुर थानांतर्गत जमालापुर बाजार में तत्कालीन ब्लाक प्रमुख कैलाश दुबे, जिला पंचायत सदस्य राजकुमार सिंह व अमीन बांके तिवारी की सरेशाम हत्या हुई थी। इस वारदात के बाद मुन्ना पूरे पूर्वांचल में न केवल आतंक का पर्याय बन गया बल्कि छोटे-छोटे अपराधियों की फौज भी खड़ी कर ली।
Updated on:
9 Jul 2018, 4:20 PM IST
Published on:
9 Jul 2018, 1:07 PM IST
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