
रमजान में गरीबों को जकात देना जरूरी, मौलाना जफर
जौनपुर. रमजान में रोजेदारों को इफ्तार कराने का सवाब हासिल करने के लिए रविवार को भी कई स्थानों पर आयोजन किया गया। सभी धर्म के लोग एक कतार में बैठ कर आपसी सद्भाव का परिचय भी देते नजर आए। जैसे ही वक्त हुआ सभी ने एक साथ खजूर आदि से रोजा खोला। फिर नमाज के आदि मुल्क में शांति व खुशहाली की दुआ कराई गई।
मधारेटोला स्थित केमिस्ट एंड ड्रगस्टिक वेलफेयर एसोसिएशन के जिलाध्यक्ष शकील अहमद के आवास पर इफ्तार का आयोजन हुआ। मगरिब की नमाज मुल्लाटोला के मौलाना फारूख जफर व गुरैनी मदरसा के मौलाना कारी अनीस ने पढ़ाई। मौलाना फारूख जफर ने कहा कि, माहे रमजान लोगों में प्रेम और अल्लाह के प्रति विश्वास को जगाने के लिए भी होता है। लोगाों को गलत चीजों से दूर रखा जाता है। इसमें दान का विशेष महत्व होता है। गरीबों को जकात देना जरूरी होता है। मौलाना कारी अनीस ने कहा कि, रमजान सबसे पवित्र व बरकतों का महीना है।
इस माह में कुरान शरीफ नाजिल हुई थी। डा. वीएस उपाध्याय ने कहा कि, एक साथ इफ्तार करने से एकता और प्रेम का संदेश जाता है। आयोजक शकील अहमद ने आभार जताया। मौलाना नसीम शेरवानी, कारी जिया, दिनेश टंडन, दिवाकर सिंह, डा. क्षितिज शर्मा, डा एएच जाफरी, निखिलेश सिंह, सैय्यद मोहम्मद मुस्तफा आदि उपस्थित रहे।
वहीं शिया जामा मस्जिद नवाब बाग कसेरी बाजार में शेख नूरुलहसन मेमोरियल सोसायटी द्वारा इफ्तार का आयोजन हुआ। जामिया नासिरिया के अध्यापक मौलाना उरूज हैदर खां ने कहा कि रमजान का पवित्र महीना इंसानों को आत्मचिंतन एवं मूल्यांकन का अवसर प्रदान करता है। सच्चा मुस्लमान रोजा रख कर अपनी इंद्रियों पर नियंत्रण प्राप्त कर आध्यात्मिक तौर पर मजबूत होता है। उसे अपने नेक आमाल की बुनियाद पर अल्लाह से करीब होने का रास्ता मिल जाता है। मुतवल्ली अली मंजर डेजी ने कहा कि मस्जिद में 250 लोगों को रोज इफ्तार कराया जाता है।
input जावेद अहमद
Published on:
28 May 2018 06:26 pm
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