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श्रीकृष्ण जन्माष्टमी पर सजी आकर्षक झांकियां

पुलिस लाइंस, जिला जेल, थानों, पुलिस चौकियों और मंदिरों में प्रदर्शित की गयीं झांकियां।

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जनमाष्टमी

जौनपुर. जिले भर में अनेक स्थानों पर श्रीकृष्ण जन्माष्टमी के अवसर पर झांकिया सजाकर विभिन्न कार्यक्रमों का आयोजन किया, पर्व के मौके पर पुलिस लाइन, जिला कारागार, थानों चैकियों, मन्दिरों, दुकानों और मकानों में श्री कृष्ण के जीवन पर आधारित झांकियां प्रदर्शित की गयी, जिसे लोगों ने अवलोकन कर सराहा। भारतीय जीवन को सात्विक, सरल और उल्लासपूर्ण बनाने में पर्वों एवं धार्मिक अनुष्ठानों का विशेष महत्व है। नगर के कई स्थानों पर भगवान कृष्ण के जीवन की अनेक मनोरम झांकियां प्रस्तुत कर बच्चों ने सबका मन मोह लिया।

प्रस्तुतियों में बाल लीलाओं को बच्चों ने बहुत ही आकर्षक ढंग से प्रस्तुत किया। बासुदेव कृष्ण को टोकरी में उठायें, झूले पर माता यशोदा, गोपियों संग बांसुरी की धुन पर नृत्य करते सहित कृष्ण की प्रौढ़ावस्था की राजनीतिक चातुरी, अन्याय के विरूद्ध संघर्ष इत्यादि के संदेशों को भी बच्चियों ने बड़ी परिपक्वता के साथ प्रस्तुत किया। दर असल जन्माष्टमी का त्योहार भगवान कृष्ण के जन्मदिवस के रूप में मनाते हैं।

यह त्योहार भाद्रपद माह के कृष्णपक्ष की अष्टमी के दिन मनाया जाता है। पांच हजार साल पहले आधी रात को भगवान श्री कृष्ण का जन्म हुआ था। तभी से यह धार्मिक त्योहार मनाया जा रहा है। जिले में भी दो दिन कृष्ण जन्माष्टमी मनाने की परंपरा चलती है। पहले दिन गृहस्थ इस पर्व पर व्रत रहते हैं और उसके अगले दिन वैष्णव विचारधारा के लोग यह उत्सव मनाते हैं। नगर में जिला कारागार, पुलिस लाइन में यह उत्सव भव्य रूप से मनाया जाता है। इसके अलावा नगर के सभी मंदिरों में भी श्रद्धालु अपने स्तर से तैयारी कर पूजा-पाठ करते हैं। जिले के सभी थानों में भी यह उत्सव बड़े धूमधाम से मनाया जाता है।

कृष्ण का जन्मोत्सव हर साल दो दिन क्यों मनाया जाता है। बताते हैं कि पहले दिन जन्माष्टमी गृहस्थ मनाते हैं और इसके बाद वाले दिन वैष्णव। धर्मग्रंथों को मानने वाले और इसके आधार पर व्रत के नियमों का पालन करने वाले गृहस्थ कहलाते हैं। दूसरी ओर विष्णु के उपासक या विष्णु के अवतारों को मानने वाले वैष्णव कहलाते हैं। गृहस्थ कृष्ण का जन्मोत्सव मनाने के लिए कुछ खास योग देखते हैं और उसी के आधार पर व्रत का दिन तय करते हैं।