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यूपी के इस जिले में देवता की तरह पूजे जाते थे स्वामी चिन्मयानंद, अब रेप के आरोप में जल्द हो सकती है गिरफ्तारी

हार के बाद स्वामी की राजनीतिक चमक पड़ी फीकी

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हार के बाद स्वामी की राजनीतिक चमक पड़ी फीकी

जावेद अहमद

जौनपुर. देश में एक लहर राम मंदिर की भी चली थी। उसी आंदोलन से एक ऐसे भी कथित संत का भी उदय हुआ था जिस पर रेप के आरोप लगे हैं और जेल जाने का खतरा मंडरा रहा है। नाम है चिन्मयानंद। लेकिन क्या आपको पता है कि इस स्वामी चिन्मयानंद के सबसे अधिक समर्थक कहां हैं? जहां इनकी आवभगत किसी सामान्य नेता की तरह नहीं देवता की तरह होती थी। चिन्मयानंद को समर्थन ऐसे स्वामी जी, स्वामी जी कहकर चरणों पर मस्तक लगा देते थे जैसे बिना उनके चरण रज भव सागर से पार पाना असंभव है।

जी हां इस जिले का नाम है जौनपुर। मंदिर की हवा बह रही थी और भाजपा में संतों का पूरा वर्चस्व था। विश्व हिंदू परिषद से राजनीति की रचना रचने वाले चिन्मयानंद भाजपा में काफी बड़ा ओहदा रखते थे। बनारस से महज 56 किलोमीटर की दूरी पर बसे जौनपुर जिले की मछलीशहर सीट 1998 में भाजपा ने चिन्मयानंद को मैदान में उतारा। स्वामी ने सपा के हरिवंश सिंह को बड़े अंतर से चुनाव हरा दिया।
केन्द्र की सरकार गिर जाने से 1999 में फिर देश में आम चुनाव हुए। स्वामी को अब जौनपुर सदर सीट से भाजपा ने प्रत्याशी बना दिया। अपने तेवर और कलेवर के दम पर स्वामी ने करिश्मा करते सपा के पारस नाथ यादव को चुनाव हरा दिया। केन्द्र में एनडीए की सरकार बनी प्रधानंमंत्री अटल बिहारी वाजपेयी को चुना गया। स्वामी चिन्मयानंद के सिर केन्द्रीय गृह राज्यमंत्री का ताज सजा।

केन्द्र में पांच साल की सरकार और बड़ा ओहदा मिल जाने से स्वामी ने जिले में खूब काम किये। मुंबई-दिल्ली समेत कई शहरों के लिए ट्रेनों के साथ ही जिला अस्पताल का कायाकल्प कराया। सड़क बिजली पानी और स्कूलों के लिए भी चिन्मयानंद ने खूब काम किये। यहीं से उनके करीबियों की संख्य़ा तेजी से बढ़ गई।

सैकड़ों नेताओं को स्वामी ने अपने करीब किया। शहर में चिन्मयानंद होते थे इनके करीबी भाजपा नेता पूरी ताकत लगाकर स्वामी से जुड़े किसी भी कार्यक्रम को बड़ा रूप देते। जहां कार्यक्रम होता वहां स्वामी के पैर छूने वाले ही एक दो घंटें तक कतार में रहते। पांच साल में जौनपुर सदर क्षेत्र का शायद ही कोई गांव बचा हो जहां स्वामी ने अपने एक-दो समर्थक न बनाये हों। इन्ही समर्थकों के इशारे पर ही लोगों का काम काज भी किया जाता था। स्वामी इन समर्थकों की नजर मे देवता के समान थे।

2004 में सदर सीट से स्वामी को हार मिली। धीरे-धीरे राजनीति समापन की तरफ जाने लगी। 2014 में भी चुनाव लड़ने के लिए जिद की पर पार्टी ने टिकट देने से इनकार कर दिया। हालांकि अब जिले की ताजी राजनीति में स्वामी का कद न के बराबर है, पर इस बात से इनकार नहीं किया जाता कि अपने समर्थक नेताओं में आज भी स्वामी देवता जैसे ही हैं।

जल्द हो सकती है गिरफ्तारी

बतादें कि शाहजहांपुर में कानून की छात्रा से रेप के आरोप में फंसे चिन्मयानंद की गिरफ्तारी जल्द हो सकती है। पिछले दिनों छात्रा ने मीडिया के सामने आकर इस मामले में अपनी बात रखी थी। इसके बाद छात्रा की मेडिकल जांच कराई गई, लेकिन चिन्मयानंद पर दुष्कर्म की धारा नहीं बढ़ी। अब मामले की अगली कार्रवाई छात्रा के कोर्ट में कलमबंद बयान पर टिकी हुई है। छात्रा के पिता ने बताया था कि धारा 164 के तहत कलमबंद बयान के बाद स्वामी की गिरफ्तारी हो सकती है। पुलिस की कार्रवाई से नाराज पिता ने एसआईटी पर पूरा भरोसा जताया है।