टीबी अस्पताल में इलाज और विकलांग सर्टिफिकेट बनवाने के लिए रोजाना पांच सौ से अधिक लोग इकट्ठा होते हैं। बैठने की जगह तो पहले से ही अस्पताल से गायब है। लोग इधर उधर टहलकर अपनी बारी का इंतजार करते हैं। लेकिन मैदान में फेंकी शराब और बीयर की बोतलें अब यहां आने वालों की परेशानी का सबब बनने लगी हैं। अधिकतर लोग परिवार के साथ यहां आते हैं। कुछ के साथ छोटे बच्चे भी होते हैं। बोतल देखने के बाद बच्चों के सवाल को टालना परिजनों के लिए मुश्किल हो जाता है। इन सब के बीच सबसे बड़ा सवाल ये है कि टीबी अस्पताल मं ये बोतलें आ कहां से रही हैं। क्या इस परिसर में देर रात शराब और कबाब का दौर चलता है। या रोजाना बाहर से शराबियों का झुंड सुरक्षित जगह देखकर महफिल जमाता है। सबसे बड़ी हैरत की बात ये कि स्वास्थ्य विभाग के मुखिया सीएमओ का दफ्तर भी इस अस्पताल से सटा हुआ है। उसके बाद भी इतना घिनौना मंजर यहां देखने को मिलता है। मरीज के साथ आए महेश का कहना है कि ऐसा पहली बार देखने को मिला है कि अस्पताल परिसर में शराब की बोतलें फेंकी हुई दिख रही हैं। सीमा का कहना है कि वैसे ही महिलाओं इधर उधर बैठकर अपने क्रम की प्रतीक्षा करती हैं। और अगर पैरों के पास शराब की बोतल पड़ी हो तो स्थिति और शर्मनाक हो जाती है। संजय का कहना है कि इतनी महंगी शराब पीना सबके बस का नहीं। जरूर ये अस्पताल के कर्मचारियों का काम होगा।