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यूक्रेन से निकले 2 स्टूडेंट इस रास्ते से होकर पहुंचे स्वदेश

यूनिवर्सिटी की तरफ से यही कहा जा रहा था कि स्थिति पूरी तरह से नियंत्रण में है। इसके बावजूद भी यदि कोई स्टूडेंट घर जाना चाहता है तो उसे 14 मार्च वापस आना होगा।

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यूक्रेन से निकले 2 स्टूडेंट इस रास्ते से होकर पहुंचे स्वदेश

यूक्रेन से निकले 2 स्टूडेंट इस रास्ते से होकर पहुंचे स्वदेश

झाबुआ. रूस के हमले से कुछ घंटे पहले ही हमने यूक्रेन छोड़ा। रात उज्बेकिस्तान में बिताई और शुक्रवार की सुबह दिल्ली पहुंचे तो राहत की सांस ली। यह कहना है झाबुआ के युवा धर्मेश बैरागी और रवि खतेडयि़ा का। दोनों ही यूक्रेन की डेनिप्रो स्टेट मेडिकल यूनिवर्सिटी से मेडिकल की पढ़ाई कर रहे हैं और तृतीय वर्ष के छात्र है। सकुशल अपने देश लौटने पर जितनी राहत दोनों छात्र महसूस कर रहे हैं, उतनी ही खुशी उनके परिजन के चेहरे पर भी है।

धर्मेश के अनुसार रूस और यूक्रेन के बीच तनाव की खबरें तो लगातार आ रही थी, लेकिन युद्ध होगा ऐसी उम्मीद नहीं थी। न्यूज चैनल पर लगातार आ रही तनाव की खबरे के बीच उनके परिजन उन्हें बार-बार भारत लौटने के लिए कह रहे थे। तो दूसरी तरफ यूनिवर्सिटी की तरफ से यही कहा जा रहा था कि स्थिति पूरी तरह से नियंत्रण में है। इसके बावजूद भी यदि कोई स्टूडेंट घर जाना चाहता है तो उसे 14 मार्च वापस आना होगा।

शाम 7 बजे यूक्रेन छोड़ा और रात 10 बजे हमले की खबर

धर्मेश ने बताया कि आने-जाने में बहुत ज्यादा खर्च आता है, इसलिए वे लोग यूक्रेन में ही रुके हुए थे। इस बीच 22 फरवरी को ये साफ हो गया कि रूसी राष्ट्रपति व्लादिमीर पुतिन यूक्रेन पर हमला करवाने वाले हैं तो हमने तत्काल अगले दिन की फ्लाइट बुक करवाई और 23 फरवरी को सुबह डेमिप्रो सीटी से यूक्रेन की राजधानी कीव के लिए बस से निकल पड़े। दोपहर करीब 3 बजे कीव पहुंचे, क्योंकि सारी इंटरनेशनल फ्लाइट यहीं से चलती है। यूं तो हमेशा दुबई से कनेक्टिंग फ्लाइट मिलती है, लेकिन तनाव के चलते उज्बेकिस्तान की फ्लाइट लेना पड़ी।

धर्मेश के मुताबिक शाम को 7 बजे हमने यूक्रेन छोड़ दिया था और रात में करीब साढ़े 10 बजे खबर आ गई कि रूस ने यूक्रेन पर हमला कर दिया है। धर्मेश और रवि दोनों ने रात उज्बेकिस्तान में बिताई और 24 फरवरी की रात दो बजे उन्हें उज्बेकिस्तान से दिल्ली की फ्लाइट मिली। शुक्रवार सुबह 6 बजे जब वे दिल्ली पहुंचे तो चैन मिला और उनके परिजन ने भी राहत महसूस की।

मध्यम वर्गीय परिवार से हैं दोनों

धर्मेश और रवि दोनों ही मध्यम वर्गीय परिवार से ताल्लुक रखते हैं। धर्मेश के पिता राकेश निजी हॉस्पिटल में लैब टेक्नीशियन हैं तो मां भारती जिला अस्पताल में एएनएम है। वहीं ग्राम सजेली के रहने वाले रवि के पिता छतरसिंह खतेंडिया और मां पुष्पा दोनों शिक्षक हैं। दोनों के परिजन बोले, हमे तो बस इस बात की खुशी है कि हमारे बच्चे सही सलामत घर आ गए।

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डेढ़ से दोगुना किराया वसूल रही एयर लाइन कंपनी

युवा धर्मेश और रवि ने बताया के सरकार भले ही यूक्रेन में फंसे भारतीयों को एयर लिफ्ट करने की बात कह रही थी। लेकिन दोनों देशों के तनाव को देखते हुए एयर लाइन कंपनी ने डेढ़ से दोगुना किराया वसूल किया। अमूमन वे 30 हजार में भारत पहुंच जाते थे, लेकिन इस बार 45 हजार रुपए लगे। आखरी में तो किराया 60 हज़ार से भी ऊपर पहुंच गया था। सरकार को इस पर नियंत्रण करना चाहिए।