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छोटी सी भूल हमें विपरीत दिशा में मोड़ देती है

कथा में पहुंचे विधायक एवं पूर्व केंद्रीय मंत्री कांतिलाल भूरिया ने किया पूजन-अर्चन

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katha

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झाबुआ. धरती पर कुछ भी पाने के लिए कहीं मत जाना। यदि सच्चे मन, श्रद्धा और समर्पण से प्रभु भक्ति कर ली तो भगवान स्वयं आपके पास दौड़ते चले आएंगे। क्योंकि परमात्मा तो कण-कण में विद्यमान है तो भटकने की क्या जरूरत। जल, नभ और थल के सभी जीवचर जहां हैं, वहीं सब कुछ पा जाते हैं तो मानव क्यों भटकता है। हमारी स्थिति ऐसी हो गई है जैसे जल में मछली प्यासी। हमें वो तरकीब ज्ञात नहीं है। उक्त उद्गार ज्ञानी महाराज ने कथा के सप्तम दिवस व्यक्त किए। संतश्री ने बताया कि जब मानव के मन मंदिर में अरिहंत, सिद्ध शिव, राम बसा है पर उसे पाने की उत्कंठा हमारे पास नहीं है। एक छोटी सी भूल की और हम परमात्मा को पहचान नहीं पाए। यही भूल हमारे जीवन का पथ कांटों भरा बना देती है। लव और कुश गाकर रामायण की कथा सुनाते हैं, लेकिन एक समय ऐसा आया कि राम के समक्ष ही तीर कमान उठा लेते हंै। वाल्मीकि आकर कहते हैं ये तुम्हारे पिता हैं। छोटी सी भूल क्या नहीं कर देती।

शनिवार को झाबुआ विधायक एवं पूर्व केंद्रीय मंत्री कान्तिलाल भूरिया ने आकर व्यासपीठ का पूजन कर आरती उतारी। मंच की ओर से विधायक भूरिया का सम्मान भी किया गया। विधायक ने स्वामी जी को राम का प्रतीक धनुष-बाण भेंट किया।सभा में कमरू अजनार ने भी राम को न भुलाकर उन्हें अपने हृदय के मंदिर में विराजमान करने का आह्वान किया, ताकि जिले में धर्मांतरण जैसी कोई घटना न हो। समारोह का संचालन जितेंद्र राठौड़ ने किया। मुख्य यजमान और कथा समापन के दिन आयोजित भंडारे का लाभ लेने वाले नटवर महेश हरसोला ने डेढ़ लाख रुपए और देने की घोषणा की। सहायक यजमान के रूप में बाबूलाल लच्छीराम राठौड़ ने सहभागीता की।