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सिकलसेल को रोकने के लिए शादी से पहले दूल्हा-दुल्हन की जांच पर फोकस

कलेक्टर खुद गांवों में जाकर ग्रामीणों को जागरूक कर रहीं

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झाबुआ

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Binod Singh

May 15, 2023

सिकलसेल को रोकने के लिए शादी से पहले दूल्हा-दुल्हन की जांच पर फोकस

सिकलसेल को रोकने के लिए शादी से पहले दूल्हा-दुल्हन की जांच पर फोकस

झाबुआ. पश्चिमी मप्र के आदिवासी अंचल झाबुआ में सिकलसेल को रोकने के लिए अब एक नई कवायद की जा रही है। इसके तहत ग्रामीण क्षेत्रों में जहां भी विवाह समारोह आयोजित होंगे, वहां शादी से पहले दूल्हा - दुल्हन की जांच कराई जाएगी। यदि दोनों में से किसी में भी सिकलसेल की पुष्टि हुई तो फिर उन्हें विवाह न करने की समझाइश देंगे, ताकि सिकलसेल को आने वाली पीढ़ी तक पहुंचने से पहले ही रोक दिया जाए। कलेक्टर तन्वी हुड्डा खुद ग्रामीणों के बीच पहुंचकर उन्हें इसके लिए जागरूक करने में लगी है।
गौरतलब है कि झाबुआ जिले में वर्तमान में 11097 सिकलसेल वाहक हैं, जबकि मरीजों की संख्या 800 है। वहीं 156 ऐसे मरीज हैं जिन्हें सिकलसेल के साथ थेलेसिमिया की भी शिकायत है। चूंकि सिकलसेल एक अनुवांशिक बीमारी है और ये माता-पिता से बच्चों में आती है। ऐसे में शादी से पहले दूल्हा-दुल्हन की जांच करा ली जाए तो इसे रोका जा सकता है। चूंकि इन दिनों आदिवासी समाज में विवाह समारोह के आयोजन चल रहे हैं, ऐसे में कलेक्टर तन्वी हुड्डा ने तय किया कि वे खुद ग्रामीणों के बीच जाकर उन्हें शादी से पहले सिकलसेल की जांच करवाने के लिए प्रेरित करेंगी। रविवार देर शाम कलेक्टर जब रानापुर क्षेत्र के ग्राम सोतियाजालम पहुंची तो यहां भी उन्होंने ग्रामीणों से बात कर पूछा कि अभी गांव में कहां-कहां विवाह हो रहे हैं। साथ ही कहा कि -जिन युवक-युवतियों की शादी होना है, उनकी सिकलसेल जांच जरूर करवाएं। ताकि आने वाली पीढ़ी का भविष्य बेहतर हो।
दिव्यांग उर्वशी को बैंक सखी बनने की सलाह
ग्राम सोतिया जालम में ग्रामीणों से सीधे जुडऩे के लिए कलेक्टर कुर्सी या खटिया पर बैठने की बजाए उनके साथ जमीन पर बैठी। इसका मकसद यही था कि ग्रामीणों में एक विश्वास पैदा हो और वे अपनी बात प्रशासन के समक्ष खुलकर रख सके। यहां कलेक्टर ने मुख्यमंत्री जनसेवा अभियान के दूसरे चरण के तहत विभिन्न विभागों की योजनाओं की जानकारी भी दी। ग्रामीणों की मांग पर कलेक्टर तन्वी हुड्डा ने बेहडावाला नाका तालाब के जीर्णोद्धार के लिए एस्टीमेट बनाने के निर्देश दिए। कलेक्टर को यहां दिव्यांग उर्वशी पिता अनङ्क्षसह मिली। उसने ब्रेल लिपी में स्नातक किया है और कंप्यूटर भी चला लेती है।ऐसे में कलेक्टर ने उसे बैंक सखी बनाने को कहा।