19 जनवरी 2026,

सोमवार

Patrika LogoSwitch to English
icon

मेरी खबर

video_icon

शॉर्ट्स

epaper_icon

ई-पेपर

बैंक कर्मचारियों ने निजीकरण का किया विरोध, सोमवार से शुरू की दो दिवसीय हड़ताल

निजीकरण के विरोध में राष्ट्रीयकृत बैंकों की करीब 90 शाखाओं में कामकाज प्रभावित, शनिवार-रविवार बंद रहे बैंक, सोमवार-मंगलवार हड़ताल से उपभोक्ता हो रहे परेशान

2 min read
Google source verification

झाबुआ

image

Vishal Yadav

Mar 16, 2021

Bank employees protest against privatization

Bank employees protest against privatization

बड़वानी. सरकार बैंकों का निजीकरण करने जा रही है। इसके विरोध में बैंक कर्मचारी सोमवार से दो दिवसीय हड़ताल पर उतर आए है। सोमवार दोपहर शहर की मठ गली स्थित बैंक ऑफ इंडिया शाखा के बाहर बैंककर्मियों ने निजीकरण के विरोध में मोदी सरकार के फैसले को लेकर जमकर आक्रोश जताया।
साथ ही नारेबाजी कर कहा कि बैंकों का निजीकरण नहीं होने देंगे, बैंकों को अडानी-अंबानी को नहीं बेचने देंगे, बैंक बचाओ-देश बचाओ जैसे नारेबाजी की। साथ ही हाथों में तख्तियां थाम प्रदर्शन किया। इस हड़ताल के चलते जिलेभर में करीब 90 बैंक शाखाओं के ताले नहीं खुले। इस दौरान 550 से अधिक अधिकारी-कर्मचारी दो दिन अवकाश पर उतरे है। बता दें कि शनिवार-रविवार अवकाश के बाद सोमवार-मंगलवार हड़ताल से व्यापारी, आम व खास सभी तरह के उपभोक्ताओं को खासी दिक्कतों का सामना करना पड़ रहा है। सोमवार को बैंक खुलने के समय विभिन्न कार्यांे के लिए लोग पहुंचे, लेकिन हड़ताल की सूचना पाकर निराश होकर लौटते नजर आए।
550 से अधिक कर्मी उतरे हड़ताल पर
बैंककर्मी कपिल गौरव ने बताया कि आज व कल दो दिन राष्ट्रव्यापी बैंक हड़ताल है। सरकार की जनविरोधी और आर्थिक विरोधी नीतियों के विरोध में राष्ट्रीयकृत बैंकों के अधिकारी-कर्मचारी सोमवार-मंगलवार को हड़ताल पर है। देशभर में करीब 10 लाख कर्मी इसमें शामिल हो रहे है। जिले में 90 बैंक शाखाओं के ताले नहीं खुले। हड़ताल में जिले के 550 से अधिक बैंककर्मी सड़कों पर उतरकर विरोध कर रहे है।
पेंशन ही 600 रु. तो बैलेंस 5 हजार कैसे रखेंगे
बैंक कर्मियों ने बताया कि हमारी मुख्य मांग है कि सरकार शीघ्र ही निजीकरण का फैसला वापस ले। क्योंकि जिसको मात्र 600 रुपए पेंशन मिलती हैं, वो अपने खाते का बैलेंस पांच हजार रुपए कैसे रख सकेगा। इस निजीकरण से आगामी समय में गरीब व मध्यय वर्गीय परिवारों पर जो दुष्परिणाम पड़ेंगे, उन्हें उससे बचाने के लिए बैंककर्मी आज हड़ताल पर है।
...तो करेंगे अनिश्चितकालिन हड़ताल
बैंककर्मी कन्हैया पाटीदार ने बताया कि राष्ट्रीयकृत बैंकें देश की आर्थिक रुप से रीढ़ की हड्डी है। बैंककर्मी कभी शौक से हड़ताल नहीं करते। सरकार ने 1969 में जब 10 बैंकों को राष्ट्रीयकृत किया था, तो उसका उद्देश्य था कि गांव-गांव तक बैंकिंग सेवाएं पहुंचे, लेकिन निजीकरण से गरीब व मध्यम वर्गीय परिवार के लिए बड़ी दिक्कत पैदा हो जाएगी। इसलिए बैंककर्मी मजबूरी में बैंक बचाने-देश बचाने के लिए दो दिन सांकेतिक हड़ताल कर रहे है और दो दिन का वेतन भी कटवाएंगे। सरकार जल्द निजीकरण का फैसला वापस नहीं लेती हैं को अनिश्चितकालिन हड़ताल की ओर रुख किया जाएगा।
एटीएम पर लगी भीड़भाड़, कई हुए बंद
लगातार दिन तीन बैंक बंद रहने से नकदी के लिए लोग एटीएम पर निर्भर हो गए है। कई एटीएम पर उपभोक्ताओं की कतारे भी लगी, तो कई जगह एटीएम कैस खत्म होने व तकनीकी खामी से बंद दिखे। इससे उपभोक्ता विभिन्न बैंकों के एटीएम के चक्कर लगाते नजर आए।
व्यापारियों को आई दिक्कत
सप्ताह का पहले दिन की शुरुआत में व्यापारियों को अपने लेन-देन में दिक्कत आई। वहीं मंगलवार को भी हड़ताल रहने से बड़ा कामकाज प्रभावित हो रहा है। बता दें कि शहर के विभिन्न प्रकार के व्यापार करने वाले अधिकांश व्यापारी इंदौर से माल बुलवाते है। ऐसे में सप्ताह के अंत में शुक्रवार-शनिवार को माल आर्डर करते हैं। व्यापारियों के अनुसार आर्डर के साथ बैंक से तत्काल पेमेंट भेजना होता है। शनिवार-रविवार बैंक बंद रही। अब सोमवार-मंगलवार बैंक बंद रहने से खासा लेन-देन प्रभावित हुआ है।
शासकीय विभाग भी प्रभावित हुए
बैंकों की दो दिनी हड़ताल का सबसे अधिक प्रभाव शासकीय कामकाज पर पडऩे वाला है। बता दें कि वित्तिय वर्ष का यह अंतिम माह है। वहीं अधिकांश सरकारी लेनदेन एसबीआई से होता है। ऐसे में विभागों के कामकाज भी मंगलवार तक प्रभावित होना तय है।