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रासलीला या कृष्णलीला में युवा और बालक कृष्ण की लीलाओं का मंचन

सांस्कृतिक कार्यक्रम आयोजित हुआ

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jhabua

रासलीला या कृष्णलीला में युवा और बालक कृष्ण की लीलाओं का मंचन

झाबुआ. रासलीला या कृष्ण लीला में युवा और बालक कृष्ण की लीलाओं का मंचन होता है ।कृष्ण की मनमोहक अदाओं गोपिया याने बृजबालाएं लट्टू थी । कान्हा की मुरली ऐसी बजाई कि गोपिया अपनी सुध-बुध भी गवां बैठती थी ।अर्थात भगवान श्रीकृष्ण में ऐसा आध्यात्मिक शक्ति थी कि हर भटकते मन को सुकून मिलता था। यही भगवद प्रेम का उदाहरण है । हर कोई कृष्ण में समाहित हो जाता था और अपने आप को स्वयं श्री कृष्ण का आभास करने लगता था । सच्चे मन से निष्काम प्रेम से वशीभूत होकर ही भगवान अपने भक्त के लिए अपनी लीलाओं के माध्यम से जीवन का संदेश देते हैं । उक्त सारगर्भित उदबोधन पंडित सतीशचन्द्र शर्मा शास्त्री ने श्री गोवर्धननाथजी की हवेली के 151 वें पाटोत्सव के पैलेस गार्डन में छठे दिन भागवत कथा के दौरान गोस्वामी दिव्येशकुमारजी की उपस्थिति में व्यक्त किए। उन्होने कहा कि श्रीकृष्ण की बाल लीला, रास लीला, कंसवध, रूक्मणि विवाह का प्रसंग सुनाते हुए कहा कि गोपियों ने रास मंडल की रचना की जिसमे दो गोपी एवं एक कृष्ण की रासलीला मे 32 राग स्वर लहरिया उत्पन्न हो रही थी । जमुना के किनारे रासलीला में प्रेम रस बह कर समाहित हो गया और जमुना जल इसी कारण भगवत रस माना जाता है।
हर व्यक्ति को गुरु के साथ ब्रह्म संबंध बनाना चाहिए
पंडित जी ने ब्रह्म संबध बनाए जाने पर जोर देते हुए कहा कि हर व्यक्ति को गुरू के साथ ब्रह्म संबध बनाना चाहिए। जब तक सेवक को आत्मीय भाव नहीं होगा तब तक उसका आत्म निवेदन फलीभूत नहीं होगा । जिस घर मे हरि पूजन होता है वह घर मंदिर बन जाता है । इस अवसर पर बाल गोस्वामी प्रिय वज्रराजरायजी ने भी मंत्रोच्चार करते हुए सभी धर्मप्रेमियों का आभार व्यक्त किया । दिव्येशकुमारजी ने अपने सन्देश में कहा कि हमें भागवत कथा का केवल श्रवण नहीं करना है वरन उसे आत्मसात करना चाहिए तथा भगवद रस में डूब कर नित्य हरि सेवा में अपना मन लगाना चाहिए।
भागवत कथा स्थल पर ही आरती के पूर्व आलीराजपुर, पाठशाला ग्रुप के बाल कलाकराों हरीती धवल शाह, यमुना मंडल ग्रुप आलीराजपुर, पलक मुकेश मोदी आलीराजपुर एवं हृदया एवं दर्शी द्वारा मनमोहन भजनों एवं शास्त्रीय नृत्यों की प्रस्तुति दे कर हर किसी को तालिया बजाने के लिए मजबूर कर दिया।