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बदलाव के नायक बनने निकली महिलाएं,झाबुआ में महिलाओं ने लिया राजनीति को स्वच्छ

महिलाओं ने कहा- अच्छे लोगों की संख्या मुट्ठी भर और स्वार्थी तत्वों का जमघट, अब तस्वीर बदलनी चाहिए

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बदलाव के नायक बनने निकली महिलाएं,झाबुआ में महिलाओं ने लिया राजनीति को स्वच्छ

झाबुआ. बात हमारी-आपकी, इस देश की है। एक आह्वान है राजनीतिक चेतना का। सभी राजनीतिक दल महिलाओं की भागीदारी बढ़ाने की बात करते हैं, लेकिन मौका देने से बचते हैं।
हमारी विचारधारा किसी भी दल के समर्थन या विरोध मेें हो, लेकिन हम सबको समझ लेना चाहिए कि जब तक हम राजनीति को गंदा मानकर इससे भागते रहेंगे कुछ स्वार्थी तत्व नीचे से ऊपर तक राजनीति पर कब्जा करते रहेंगे। आज महिलाएं समाज के हर क्षेत्र में आगे बढ़ रही हैं, लेकिन राजनीति से हम अब भी बचते हैं। हम सब अपने प्रतिनिधि चुनकर विधानसभा लोकसभा में भेजते हैं। उनसे ही सरकारें बनती हैं और इनसे हम पर शासन चलता है। इसके बावजूद हम राजनीति को अपने लिए उचित नहीं मानते। हम दूसरों को वोट देने तक सीमित हैं। इसका नुकसान यह हुआ कि राजनीति में सक्रिय रहने वाले लोगों में ऐसे तत्वों की संख्या बढ़ गई, जिनके लिए यह सेवा नहीं बल्कि मेवा हासिल करने का माध्यम है। राजनीति में अपराधियों, पंूजीपतियों, लुटेरों का झुंड बढऩ़े के जिम्मेदार हम हैं। क्योंकि हमने अपने लिए राजनीति से दूरी की लकीर खींच दी। यह बात पत्रिका चेंजमेकर अभियान के तहत महिलाओं ने कही।


स्वच्छ राजनीति में भागीदारी का संकल्प लिया
रामकृष्ण नगर में हुए कार्यक्रम में महिलाओं ने कहा कि इसका नुकसान भी हमने देख लिया। सभी दलों में पाएंगे कि जो लोग सिर्फ विकास की बात करें, शिक्षा की बात करं. महिलाओं को आगे बढ़ाने की बात करें, सबके लिए समान कानून की बात करें तो उन्हें उनकी पार्टी में ही समर्थन नहीं मिलता। क्योंकि हर पार्टी में अच्छे लोगों की संख्या मुट्ठी भर और स्वार्थी तत्वों का जमघट है। अब यह तस्वीर बदलनी चाहिए। आप भले ही किसी भी राजनीतिक दल की विचारधारा से प्रभावित हों उसे अच्छा मानती हों या आप निर्दलियों की राह की उचित समझती हों, बस सक्रिय हो जाइए, बाकी महिलाओं की हिम्मत खुलेगी। स्वार्थ की राजनीति करने वालों के हौसले पस्त होंगे। मिथिलेश कुमारी जैन, सुनीता आचार्य, ज्योति त्रिवेदी, प्रिया सारोलकर, शीतल जादौन, श्रद्धा जैन , मेघना शाह, हंसा खतेडिय़ा, भारती सोनी ने विचार रखे। स्वच्छ राजनीति का संकल्प लिया।

ये बिंदू सामने आए
महिलाएं अपने उत्तरदायित्वों का अच्छे से निभाती है। इसलिए समाज सुधार कार्यों को अच्छे से कर सकती हैं।
राजनीतिक सोच रखने वाली महिलाओं को राजनीति को स्वच्छ करने मैदान में आना होगा। इसमें युवा नेत्रियों को जमीनी स्तर से प्रयास कर राजनीतिक शुद्धिकरण की इबारत लिखने का अवसर पत्रिका ने दिया है। इसे भुनाना होगा।
आपराधिक, संकुचित मानसिकता के स्थान पर विकास, समता और पुरुषों की तुलना में महिलाएंं ही ज्यादा सुधार कर सकती हैं। देश में बार-बार होने वाले चुनाव के स्थान पर एकसाथ चुनाव और मतगणना की जाए।
राजनीतिक शुद्धिकरण तब संभव होग, जब उम्मीदवार की न्यूनतम योग्यता का पैमाना निर्धारित हो। अपराधिक छवि वाले लोगों को राजनीति से दूर करने जरूरी है।