
झाबुआ. राणापुर ब्लॉक के उन्नतशील किसान खिमसिंह पिता मोहनसिंह निवासी छायन सेमनखेड़ी के पुत्र अशोक ने खेती में दोस्त द्वारा ड्रिप लगाकर सिंचाई से खेती कर मुनाफा देखा, तो दोस्त से कुछ समय के लिए ड्रिप उधार लेकर मिर्ची की फसल खेत में लगाई। मिर्ची की एक फसल से खेती से 50 हजार आय हुई। परंपरागत खेती से जितनी जमीन में मात्र 5-10 हजार रुपए वार्षिक कमाई होती थी, उसी से ड्रिप लगाकर खिमसिंह ने 50 हजार आय अर्जित की। मिर्ची से प्राप्त आमदनी का उपयोग उन्होंने खेत में ड्रीप व मल्चिंग लगाने में किया, जिससे उन्हें एक हेक्टेयर भूमि से इस वर्ष 1-2 लाख रुपए आय होने की उम्मीद है। अब खिमसिंह वैज्ञानिक तकनीकों और शासकीय अनुदान का उपयोग कर क्षेत्र के अच्छे किसानों की श्रेणी में आ गए हैं। तकीनीकी ज्ञान की कमी एवं संसाधन सीमित होने से खिमसिंह कड़ी मेहनत के बाद भी अपनी आय में वृद्धि नहीं कर पा रहे थे। किन्तु जब किसान ड्रिप पर शासकीय अनुदान का लाभ लिया तो वह विकास की अग्रिम पंक्ति में आ गए। खरीफ फसल से 5-10 हजार वार्षिक कमाने वाले खिमसिंह खेती में वैज्ञानिक तकनीक एवं ड्रिप सिंचाई का उपयोग कर कम पानी होने के बाद भी 50 हजार वार्षिक आय अर्जित की। खिमसिंह ने वर्तमान में अपने खेत में गिलकी, बैंगन व भिंडी की फसल उद्यानिकी विभाग से ड्रिप मल्ंिचग सिस्टम अनुदान योजना में लेकर लगाई है। झाबुआ जिले के ग्राम छायन सेमलखेड़ी में रहने वाले खिमसिंह के पुत्र अशोक ने चर्चा के दौरान बताया कि उनके पास सिंचाई के लिए कुआं है, जिससे ड्रिप एवं मल्ंिचग लगाकर खेत में उद्यानिकी फसल लगाई है। इससे उनकी आर्थिक स्थिति सुदृढ हुई। ड्रिप इरिगेशन सिस्टम लगाने से पहले वह सिर्फ खरीफ की ही फसल कर पाते थे। जिससे परिवार का भरण-पोषण भी मुश्किल से होता था। वह अपने खेत में मक्का,कपास, सोयाबीन बोते थे लेकिन सिंचाई के लिए पानी की कमी की वजह से उत्पादन कम हो पाता था। ड्रिप सिस्टम लगाने से मिर्ची की खेती से अच्छी आमदनी हुई, जिससे रूझान अब और अधिक उद्यानिकी फसलें लगाने का हुआ है।
Published on:
13 Feb 2018 06:59 pm
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