
झाबुआ. शहर के पास से गुजर रही अनास नदी पर मछलियां पकडऩे के लिए कुछ युवकों ने करंट का उपयोग करना शुरू कर दिया है। माधोपुरा मुक्तिधाम के पीछे जा रहे विद्युत खंबों से कनेक्शन लेकर नदी में तार छोड़ दिए जाते हैं। इससे नदी में करंट दौडऩे लगता है। इस करंट से पानी पीने जाने वाले मवेशियों को करंट लगता है। कुछ दिन पहले पानी पीने गई भैंस को करंट ला गया था, लेकिन भैंस की जान बच गई थी।
भैंस मालिक और मछली पकडऩे वाले युवकों में बहस भी हुई थी। नदी शहरी क्षेत्र के करीब से गुजरने के कारण पास की आबादी वाले नदी पर आना-जाना करते है, लेकिन करंट छोड़ देने के बाद कभी भी कोई बड़ा हादसा होने की आशंका है। मछली पकडऩे के लिए नदी में दो तार छोड़े जाते हैं। एक आदमी तार हाथ में लिए नदी में तार छोडऩे जाता है। तार वहां छोड़े जाते हैं। जहां मछलियां ज्यादा हो और ज्यादा मछलियों को पकडऩे के लिए आता और मछलियों का खाना भी वहां डाला जाता है। नदी में तार छोडक़र आने के बाद दूसरा साथी लकड़ी के बड़े डंडे से दूसरी तरफ से तार को बिजली के खंभे से जोड़ता है। खंभे पर लगे 11केवी तारों से संपर्क करवाकर करंट सीधे नदी में छोड़ा जाता है। करंट के इस काम में बच्चे भी शामिल होते है।
माधोपुरा और डूंगरा के कुछ लोग अपनी जान की परवाह किए बिना करंट से मछली मार रहे हैं। करंट से मरने वाली मछलियां पानी के ऊपर आ जाती है। बाद में मछलियों को इकटठा किया जाता है। खंबे से करंट वाले तार अलग करने के बाद पानी से मरी हुई मछलियां निकालने का काम होता है। कई बार स्थानीय रहवासियों ने संबंधितों से इसकी शिकायत की, लेकिन वहां जाने का रास्ता जटिल होने से कोई भी जिम्मेदार अभी तक वहां तक नही पहुंच सका। इसका फायदा उठाकर ये लोग जान से खिलवाड़ कर रहे हैं।
Published on:
06 Feb 2018 04:54 pm
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