
झबुआ. ममता के उद्यमी बनने से उसकी जिंदगी बदल गई। केवल 12वीं पास ममता आज अपने पैरों पर खड़ी और आत्म विश्वास से भरी महिला उद्यमी है। परिवार के आर्थिक मामलों में निर्णय लेती है और समाज की अन्य महिलाओं के लिए रोल मॉडल है। एक साल पहले तक ममता समुदाय की अन्य महिलाओं की तरह किसी तरह गुजारा कर रही थी। परिवार चलाने के लिए थोड़ा-बहुत टेलरिंग का काम कर के 2000 रुपए कमाती जो बहुत छोटी रकम होती है।
‘पॉवर्टी टू प्रॉस्परिटी’ प्रोजेक्ट से जुडऩे के बाद मुर्गी पालन से उसकी हर माह अतिरिक्त 5000 रुपए की कमाई होने लगी। आज ममता प्रोजेक्ट के तहत गठित प्रोड्यूसर कम्पनी के निदेशक मंडल में शामिल है। खुद हैचरी यूनिट लगाना चाहती है। जहां कडक़नाथ प्रजाति का मुर्गीपालन के साथ प्रोड्यूसर कम्पनी के माध्यम से अन्य महिलाओं को आपूर्ति करने का काम करेगी। ताकि वे भी खुद का कारोबार शुरू करें। ममता उन 1000 युवा महिला उद्यमियों में एक है जिन्हें चाइल्ड फंड इंडिया के ‘पी 2 पी-पॉवर्टी टू प्रॉस्परिटी’ प्रोजेक्ट के तहत उद्यमी बनने का प्रशिक्षण दिया गया। प्रोजेक्ट को सीटी फाउंडेशन के ‘इंडिया इनोवेशन ग्रांट प्रोग्राम’ का सहयोग प्राप्त है। झाबुआ, धार और आलीराजपुर जिले के 46 गांवों की प्रशिक्षण पाने वाली ये महिलाएं 18 से 30 वर्ष उम्र की, निम्न आय वर्ग से आती हैं। इन्हें झाबुआ में प्रशिक्षण दिया गया। जैसे लीडरशिप, सामुदायिक उद्यम, आर्थिक नियोजन, मार्केटिंग और पॉल्ट्री मैनेजमेंट। इन महिलाओं को रोजगार के लिए मुर्गी पालन का विकल्प दिया गया।
मुर्गी पालन प्रड्यूसर कंपनी प्राइवेट लिमिटेड का गठन
चाइल्ड फंड इंडिया और सीटी फाउंडेशन को प्रोजेक्ट से 1000 महिलाओं को उद्यमी बनने का प्रशिक्षण देना, 1000 नए उद्यम शुरू होना, महिलाओं के लिए प्रति माह 3 से 4 हजार रु. की कमाई, 800 से अधिक महिलाओं का बैंक खाता खुलना और 80 प्रतिशत लक्षित महिलाओं में आर्थिक नियोजन की बेहतर समझ। प्रोजेक्ट से लाभान्वित 1000 महिलाओं में लगभग 300 अब तक 10 लाख के चिकन बेच चुकी हैं। ये उद्यमी बाजार की मांग और कीमत के हिसाब से जल्द अन्य पॉल्ट्री प्रोडक्ट बेचने की योजना रखती हैं। इन 1000 महिला उद्यमियों की मदद के लिए श्रमधा आदिवासी मुर्गी पालन प्राड्यूसर कम्पनी प्राइवेट लिमिटेड का गठन किया गया है। जो राष्ट्रीय ग्रामीण रोजगार मिशन जैसी सरकारी योजनाओं के संपर्क से सुलभ ऋण दिलाने का प्रयास करती है।
इस अवसर पर डॉ. विल्सन डावर, संयुक्त निदेशक, पशु चिकित्सा सेवा, म.प्र. सरकार; डॉ. ए दिवाकर, पशु चिकित्सक एवं प्रभारी, गवर्नमेंट कडक़नाथ सेंटर, डॉ. चंद्र शेखर सिंह आदि मौजूद थे।
Published on:
23 Mar 2018 06:19 pm
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