
जहां पहले उगती थी सिर्फ घास, वहां आज 60 प्रतिशत क्षेत्र में खड़े हैं सागवान के पेड़
झाबुआ. शहर से कुछ ही दूरी पर नलदी का घना जंगल है, इस जंगल की विशेषता यह है कि यह जिले का सबसे बड़ा जंगल है, जो लगभग 7 किलोमीटर क्षेत्र में फैला हुआ है। जंगल कई गांव की सीमा से जुड़ा हुआ है। जंगल में दो तालाब भी हैं। कुल मिलाकर वन्य पशु पक्षियों के रहने के लिए यह उपयुक्त स्थान बन चुका है। वन समितियों की माने तो यहां तेंदुआ , लकड़बग्घा, अजगर, नीलगाय, जंगली सूअर और खरगोश के साथ सेही की संख्या भी दिन-ब-दिन बढ़ती जा रही है। इतना ही नहीं यह जंगल अब मोर, तीतर ,बटेर और विदेशी पक्षियों का भी स्थाई निवास बन चुका है। यहां पर 60त्न हिस्से में सागवान के पेड़ लगे हैं।साजेड़ , धावड़ा , तेंदू , बेलपत्र , लेंडिया और विलुप्त प्रजाति के उंबिया , मौखा जैसे वृक्ष भी दिखाई देने लगे हैं। लोगों की इम्युनिटी बढ़ाने वाले तंबोलिया के पेड़ और गिलोय की बेल भी जंगल में बहुतायत में पाई जाती है।
ऐसे हुआ विकास
1994 - 95 के आसपास केंद्र सरकार की महती योजना अनुसार वन विभाग ने ग्राम वन समिति का गठन किया था। इसके माध्यम से गांव में वीरान पड़े हिस्से में जंगल को आकार दिया गया। नलदी छोटी और नलदी बड़ी की ग्राम समिति के लोगों ने ग्राम वन समिति से जुडक़र गांव के पास निर्जन पड़े स्थान को संरक्षित करने का बीड़ा उठाया। सबसे पहले यहां पर सागवान के कटे हुए ठूंठ को आरडीएफ प्रोसेस के जरिए जोड़ा गया। इसकी सुरक्षा बढ़ाई गई। इस कारण कुछ ही सालों में क्षेत्र के एक बड़े हिस्से में सागवान के जंगल में आकार ले लिया। इस काम में वन विभाग के कर्मचारियों ने भी ग्रामीणों का खूब साथ दिया। परिणाम स्वरूप आसपास के क्षेत्रों में भी पौधरोपण किया जाने लगा।अब उदयपुरिया से शुरू हुए इस एरिया में कुंडला तक के 7 किलोमीटर का हिस्सा एक बड़े जंगल का रूप ले चुका है, जिसमें विभिन्न प्रजातियों के वृक्ष और बेले दिखाई देने लगी है।
जंगल की खूबसूरती देखने हाथीपावा जाते हैं
शहर और जंगल के बीच हाथीपावा का पहाड़ है। कुछ समय पहले पुलिस विभाग ने हाथीपावा पर पारिवारिक वन क्षेत्र का विकास किया। जिसके बाद लोग यहां पिकनिक मनाने पहुंचने लगे।पहाड़ से नीचे देखने पर नलदी का विशाल जंगल दिखाई देता है। लोग पहाड़ पर चढक़र जंगलों की खूबसूरती निहारते और उसे अपने कैमरे और मोबाइल में कैद करते हैं। कई बार हाथीपावा पर तेंदुआ देखने की बात भी सामने आई है। करीब 1 वर्ष पहले जंगल में लगे फंदे में एक तेंदुआ फंस गया था, जिसकी भूख प्यास से मौत हो गई थी। वन समितियों के सदस्यों ने बताया कि जंगल में करीब 3 तेंदुए हैं , जो नीलगाय और बछड़ों का शिकार कर चुके हैं ,जिसकी शिकायत भी थाने में दर्ज की गई है।
Published on:
23 Dec 2022 12:46 am
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