
नई पहल: प्लास्टिक की प्लेट का विकल्प बनेंगे पलाश के पत्तों से बनाए गए दोने
झाबुआ. प्लास्टिक की प्लेट का विकल्प अब झाबुआ में बनने वाले पलाश के पत्तों से बने दोने बनेंगे। इसे ङ्क्षसगल यूज प्लास्टिक मुक्त भारत बनाने की दिशा में पश्चिमी मप्र के आदिवासी अंचल झाबुआ का बड़ा कदम बताया जा रहा है। इस पहल का सूत्रधार बनी है ग्राम माकनकुई की आदिवासी महिलाएं। ये महिलाएं बसंती आजीविका समूह से जुड़ी हैं और इन दिनों न केवल पत्तों से दोने तैयार कर रही है, बल्कि बकायदा उसके लिए बाजार भी तलाश कर रही है। फिलहाल उन्हें रोजाना 100 दोने का ऑर्डर मिला है। प्रत्येक दोने की कीमत 5 रुपए निर्धारित की गई है। इससे महिलाओं की आय भी होगी और उनके प्रयासों से पर्यावरण भी सुरक्षित रहेगा।
पर्यावरण व स्वास्थ्य की ²ष्टि से बेहतर
पलाश के पत्तों से बने दोने पर्यावरण के साथ स्वास्थ्य की ²ष्टि से भी बेहतर माने जाते हैं। ये आसानी से नष्ट हो जाते हैं। इनके नष्ट होने के बाद जो खाद बनती है वो खेती के लिए बहुत लाभदायक होती है। वैसे भी पत्ते प्राकतिक रूप से स्वच्छ होती है, इसलिए इनमें कुछ भी भोजन करने से हमारे शरीर को किसी प्रकार का नुकसान नहीं होता है। आयुर्वेद में पत्तों से बने पत्तल-दोने पर भोजन करना सेहत के लिए काफी लाभदायक बताया गया है। पीपल, केला, पलास आदि के पत्तों से बने पत्तल-दोने में भोजन करने से उन पेड़ों के औषधीय गुण हमारे शरीर में पहुंच जाते हैं।
लागत शून्य, मुनाफा पूरा
बसंती आजीविका समूह की अध्यक्ष सुरती धन्ना कहती हैं कि दोने बनाने के लिए उनके गांव में लगे पलाश के पेड़ से पर्याप्त मात्रा में पत्ते उपलब्ध हो जाते हैं। ऐसे में लागत शून्य है और मुनाफा पूरा मिल रहा है। अभी हम अलग- अलग होटल से संपर्क कर रहे हैं। जैसे-जैसे ऑर्डर बढ़ेगा और पैसा जमा होगा तो हमारी योजना दोने बनाने की मशीन लाने की है, जिससे मांग के अनुरूप दोने की आपूर्ति की जा सके।
Published on:
11 Sept 2023 01:27 am
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