
झाबुआ. बिलीडोज स्थित मां त्रिपुरा में बने सौ सीटर आयुर्वेद अस्पताल और मां त्रिपुरा मेमोरियल हॉस्पिटल एंड रिसर्च सेंटर की गुरुवार दोपहर जांच करने गए सीएमएचओ डॉ. डीएस चौहान को अस्पताल के गार्ड ने आधा घंटा परिसर के अंदर घुसने नहीं दिया। सीएमएचओ करीब आधा घंटा गेट पर खड़े रहे। आधा घंटा बाद संचालक के आदेश पर गेट खोले गए। इसके बाद सीएमएचओ ने अंदर जाकर निरीक्षण किया।
शिकायकर्ता पुष्पेंद्रसिंह तोमर ने बाड़कुआं और बिलीडोज में एक ही भवन में बीएड, डीएड कॉलेज, नर्सिंग कॉलेज, स्कूल व अस्पताल संचालित होने की शिकायत की थी। जिस पर पिछले शुक्रवार को यहां पर शिक्षा विभाग के संयुक्त संचालक ने छापा मारा था। गुरुवार को तोमर ने यहां चल रहे अस्पताल की शिकायत सीएमएचओ से की थी। इसमें बताया कि यहां पर जून २०१६ से मां त्रिपुरा आयुर्वेद अस्पताल और मां त्रिपुरा मेमोरियल हॉस्पिटल एंड रिसर्च सेंटर संचालित किया जा रहा है। जबकि यहां दोनों नहीं चल रहे। इंदौर से स्वास्थ्य कमिश्नर ने निर्देश दिए गए कि शिकायतकर्ता के साथ जाकर मौका मुआयना करें और वास्तविकता से अवगत कराएं। करीब दो बजे सीएमएचओ बिलीडोज आयुर्वेद अस्पताल और रिसर्च सेंटर की जांच करने पहुंचे तो यहां के गार्ड ने गेट लगा दिया और सारे कर्मचारी अंदर चले गए। करीब आधा घंटा बाद जब पुलिस बुलाने की बात हुई तो संचालक ने गेट खोलने के निर्देश दिए। गुरुवार को भी यहां के संचालक, प्राचार्य बगैरह सभी नदारद रहे। सीएमएचओ डॉ. चौहान ने यहां निरीक्षण किया। इसमें नर्सिंग कॉलेज चलता मिल। आयुर्वेद अस्पताल और रिसर्च सेंटर निर्माणाधीन पाए गए।
ये की थी शिकायत
यहां पर सौ सीटर आयुर्वेद अस्पताल दर्शाया गया है, जबकि यहां न बिस्तर, न मरीज, न उपकरण, न कर्मचारी मिले। पूर्व में भी दल आया था तो यहां पर डीएड कॉलेज संचालित मिला था। सीएमएचओ ने स्वयं इसकी जांच की है। इन्होंने सौ बेड का एलोपैथिक अस्पताल रजिस्टर्ड करवाया। वह भी यहां नहीं मिला, चूंकि वो इन्होंने इसलिए रजिस्टर्ड करवाया कि इनका मां शारदा नर्सिंग जो केशव इंटरनेशनल में संचालित हो रहा है। आयुर्वेद अस्पताल और रिसर्च सेंटर जून २०१६ से संचालित होना दर्शाया है, लेकिन मौके पर एक भी संचालित नहीं है।
शिकायत की जांच करने पर यहां पर देखा कि त्रिपुरा कॉलेज और नर्सिंग चल रहे हैं। यहां अस्पताल वगैरह नहीं मिले। नियम ये है कि पूरा बनने के बाद अनुमति प्रदान की जाती है। यहां पर आयुर्वेदिक अस्पताल व रिसर्च सेंटर दोनों नहीं है। न यहां बिस्तर है, न डॉक्टर हैं। मेरे यहां से दोनों की अनुमति जारी की है। कागजात देखता हूं।
डॉ. डीएस चौहान, सीएमएचओ
Published on:
25 Aug 2017 04:43 pm
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