
नपा के पास बजट की कमी से रुका शहर का विकास, आमदनी 8 लाख, खर्च 90 लाख
झाबुआ. नगर पालिका की आमदनी ₹8 लाख प्रति माह के आसपास है और वेतन एवं अन्य मद में खर्च प्रतिमाह लगभग 90 लाख रुपए का है। नपा के आय और उसके एवज में किए जाने वाले व्यय में बड़े अंतर की वजह से पूरा बजट गड़बड़ा गया है। सड़क, बिजली, पानी जैसी मूलभूत सुविधाओं के साथ बगीचे, चौराहों का सौंदरीकरण से लेकर तमाम विकास कार्य ठप पड़ गए हैं। जनता को मिलने वाली सुविधाओं में भी कमी आई है। बजट की कमी से जूझ रही नपा को एक बड़ा झटका कर्मचारियों के वेतन भुगतान में शासन की ओर से मिलने वाला आर्थिक अनुदान भी बंद होने के बाद लगा है। आर्थिक तंगहाली की शिकार नगर पालिका के कर्मचारियों को अब समय पर वेतन तक नहीं मिल रहा है। नवीन पेयजल योजना के लिए नगर पालिका ने हुडको से लोन लिया था जिसकी त्रैमासिक किस्त 27 लाख ₹50 हजार आती है, 3 महीना में एक बार इसे चुकाने का भी भार नपा की कमर तोड़ रहा है।
-इन वार्डों में रुके विकास कार्य
नई परिषद का गठन हुए एक साल से ज्यादा बीत चुका है, लेकिन शहर के रुके विकास को गति नहीं मिल सकी है।चुनाव से पहले जो जनता से विकास के नाम पर जो वादे किए गए थे, उन वादों को पूरा करने के लिए अब तक कोई कदम नहीं उठाए गए हैं, इस बात से जनता भी परेशान है। वार्ड क्रमांक 1, 2, 3 और 4 में मेहताजी का तालाब और बड़े तालाब में फैली गंदगी और बदबू से लोग परेशान हैं। इन चारों वार्डों में तालाब की सफाई ही सबसे प्रमुख मुद्दा है। वार्ड 5, 6, 7, 8, 9 और वार्ड 10 में सड़क की मरम्मत और स्ट्रीट लाइट के काम प्रभावित है। वार्ड 11 में पाइप लाइन का काम बचा है। वार्ड 12 में नलिया सुधारना है। वार्ड 13 में नालियों , और 14 के कुछ हिस्से में सड़क और नाली दोनों का काम बचा है । वार्ड 15 , 16, 17 और 18 में कुछ स्थानों पर नालियां बनाना, सड़क की मरम्मत और स्ट्रीट लाइट लगाना जैसे काम लंबित है। इसके अतिरिक्त पूरे नगर में प्रमुख चौराहों का सौंदर्यीकरण , कांजी हाउस , बगीचे का रख रखाव , ऑडिटोरियम जैसे वादे निभाने में नगर पालिका पीछे रह गई है। अपनी आर्थिक परेशानियों से जूझ रही झाबुआ नगरपालिका अब पूरी तरह से शासकीय अनुदान पर निर्भर है।
-सीएम ने कि थी घोषणा
डेढ वर्ष पहले नगर पालिका चुनाव से ठीक पहले मुख्यमंत्री शिवराज सिंह चौहान झाबुआ के राजवाड़े पर आम सभा करने पहुंचे थे। उसे समय नगर पालिका चुनाव में भाजपा प्रत्याशी को जीतने के बदले उन्होंने शहर के विकास के लिए बजट में कमी ना आने देने का वादा किया था , चुनाव जीतने के बाद नगर पालिका ने कई बार मुख्यमंत्री से सीधे तौर पर आर्थिक स्थिति का हवाला देते हुए अनुदान की मांग की थी, लेकिन इन मांगों का अब तक कोई निराकरण नहीं हुआ है। नपा अपनी विकास योजनाओं को जमीन पर उतारने के लिए पूरी तरह शासकीय अनुदान पर निर्भर है।
-कर्मचारियों के वेतन पर संकट
नपा में 170 से अधिक कर्मचारी हैं, नपा अपने कर्मचारियों की सैलरी के रूप में 58 लख रुपए खर्च कर रही है, लेकिन बजट की कमी की वजह से कर्मचारियों कि सैलरी भी अब समय पर जमा नहीं हो रही है। इसके पीछे प्रमुख वजह बताई जा रही है कि पहले नगर पालिका कर्मचारियों को वेतन देने के लिए 45 लाख रुपए चुंगी के रूप में शासन से मिलते थे, लेकिन धीरे-धीरे इनमें कमी होती गई और अब महज 16 लाख 50 हजार रुपए ही चुंगी के रूप में प्राप्त हो रहे हैं। इससे समस्या गहरा गई है। इस स्थिति से निपटने के लिए नगर पालिका ने शासन को नपा की वर्तमान आर्थिक स्थिति को देखकर अनुदान में हो रही कटौती पर रोक लगाने की मांग भी की है।
-नपा के आय और खर्च में 82 लाख का अंतर
नगर पालिका के इनकम के दो मुख्य स्रोत राजस्व वसूली और वॉटर टैक्स है।नगर पालिका राजस्व के रूप में प्रतिमाह 6 से 6.30 लख रुपए एवं वॉटर टैक्स के रूप में एक से डेढ़ लाख रुपए प्रति माह वसूल रहा है, लेकिन खर्च के रूप में नगर पालिका ऑपरेटिंग एक्सपेंस जैसे वेतन, बिजली, डीजल, मेंटेनेंस व अन्य के रूप में लगभग 90 लाख रुपए प्रतिमाह खर्च कर रहा है। इस कारण प्रतिमा नगर पालिका 80 से 42 लख रुपए का घाटा उठा रही है।
-रहवासियों की यह है पीड़ा
ऋतुराज सिंह राठौर का कहना है कि बच्चों के साथ शाम को घूमने जाने के लिए शहर में एक भी स्थान नहीं है। नगर पालिका को तुरंत बाग बगीचों को व्यवस्थित बनाना चाहिए।
विजय भूरिया ने कहा कि बड़े तालाब में गंदगी और जलकुंभी पनप रही है, छोटे तालाब में घरों का ड्रेनेज मिलने के कारण बदबू आती है। तालाब की सफाई जरूरी है। नपा ध्यान नहीं दे रही।
यह बोले जिम्मेदार -
नगर पालिका की आर्थिक स्थिति के बारे में सीएम को भी अवगत कराया है, आर्थिक अनुदान में जो कमी की गई है उसे कुछ दिनों के लिए रोकने की भी बात कही गई है। हम आय व्यय में सामंजस्य स्थापित करने की योजना बना रहे हैं। शहर के विकास में कमी नहीं आएगी।
कविता सिंगार , अध्यक्ष , नपा झाबुआ।
एक्सपर्ट की राय -
नपा की आर्थिक स्थिति दयनीय है , आय- व्यय में अंतर लगातार बढ़ता जा रहा है। नपा के लिए बेहतर होगा कि राजस्व वसूली तेज करने के साथ अपनी संपत्तियों का उचित विदोहन करे , आय के नए स्रोत बनाए और पैसा जरूरी कार्यों पर ही खर्च करे।
जितेंद्र सिंह राठौर , समाजसेवी ।
लाखो का राजस्व बकाया
नगर पालिका का प्रति माह का स्थाई खर्च 90 लाख रुपए तक हो रहा है, जिसमें 58 लाख रुपए वेतन, 4 लाख का डीजल ,15 लाख रुपए के बिजली बिल एवं सामान्य खर्च के रूप में 10 लाख रुपए तक प्रति माह खर्च हो रहे हैं। 3 महीने में एक बार 27 लाख रुपए लोन की किस्त चुका रहे हैं। नगर पालिका की इनकम राजस्व और वॉटर टैक्स के रूप में होती है, लेकिन दोनों मद में लोग एकसाथ भुगतान करते हैं, अभी भी लाखों का राजस्व बकाया है। आर्थिक स्थिति का हवाला देकर नगरीय प्रशासन को पत्र लिखा है।
शैलेन्द्र चौहान, सहायक लेखा अधिकारी , नपा , झाबुआ।
Published on:
19 Oct 2023 08:49 pm
बड़ी खबरें
View Allझाबुआ
मध्य प्रदेश न्यूज़
ट्रेंडिंग
