यातायात विभाग मोहर्रम के बाद करेगा कार्रवाई
झाबुआ. बस स्टैंड पर यातायात व्यवस्था सुधारने के लिए प्रशासन ने व्यवस्था में बदलाव किया था, लेकिन इसे पालन करवाने में प्रशासन नाकामयाब साबित हुआ है। यही कारण है कि बस स्टैंड के 60 प्रतिशत क्षेत्र में बेतहाशा अतिक्रमण फैला है। बसों के खड़े रहने के लिए यहां से 40त्न स्थान बचा हुआ है। इसमें भी कई बसें तय समय सीमा से अधिक खड़ी की जा रही है, जिसके कारण दूसरी बसें अस्त-व्यस्त खड़ी की जाती है, इससे आवागमन में बाधा पहुंच रही है। बसों के प्रवेश मार्ग पर भी फल-सब्जी बेचने वाले दुकान लगा रहे हैं, यहीं पर वाहन खड़े करके ग्राहक फल सब्जी खरीद रहे हैं। आने-जाने वाली बसों के ब्रेक फेल होने की स्थिति में बड़े हादसे की आशंका बन रही है, जिसे जल्द सुधारा जाना चाहिए। जिम्मेदारों का कहना है कि मोहर्रम के बाद व्यवस्थाओं को दुरुस्त किया जाएगा।
अतिक्रमण की चपेट में बस स्टैंड : झाबुआ बस स्टैंड पर 60त्न अतिक्रमण है, जिसमें से 20त्न अतिक्रमण महज टू-व्हीलर पार्किंग से हो रहा है। बस स्टैंड के कुछ हिस्से में लोग अपनी कार खड़ी कर रहे हैं। कुछ लोग ठेला गाडिय़ां लगाकर व्यापार कर रहे हैं। कुछ हिस्से में ऑटो रिक्शा वालों ने अपने ऑटो खड़े किए हैं। ज्यादा परेशानी समय सीमा से अधिक देर तक खड़ी रहने वाली बसें खड़ी कर रही है, जिन पर नियंत्रण आवश्यक है।
शहरवासियों की पीड़ा : ऋतुराज राठौर ,पंकज कोठारी, नीरज मकवाना , सतीश डामोर, अंकित हटिला ने बताया कि बस स्टैंड पर यातायात व्यवस्था बिगाडऩे वालों पर चालानी कार्रवाई भी नहीं की जा रही है। अधिकारियों को मौके पर आकर स्थिति को प्रत्यक्ष अनुभव करके अपने आधार पर रिपोर्ट तैयार करना चाहिए। जनसुनवाई में आवेदन देने पर आरटीओ व्यवस्था सुधारने आई थी , उन्होंने बस वालों को साफ कहा था कि बस स्टैंड पर बसों के खड़े रहने का समय 15 मिनट से ज्यादा नहीं रहेगा, लेकिन आरटीओ के निर्देशों को भी बस संचालकों ने हवा में उड़ा दिया । वर्तमान में झाबुआ बस स्टैंड पर दर्जनों बसें समय सीमा से अधिक देर तक खड़ी की जा रही हैं। जो बसे देर तक बस स्टैंड पर खड़ी रहती है और दूसरी बसों को जगह नहीं देती, इस कारण बसें बेतरतीब खड़ी की जा रही है
स्कूल की छुट्टी के समय यातायात का दबाव
सबसे ज्यादा दिक्कत 12.30 से 1:00 और 3.30 से 4.00 के बीच आती है। इस समय स्कूल की छुट्टी होने के कारण सैकड़ों बच्चे बस स्टैंड से होकर अपने घर जाते हैं। कुछ बच्चे यहीं खड़े होकर बसों की प्रतीक्षा करते हैं। इस दौरान पालक वर्ग भी अपने दोपहिया और चार पहिया वाहन से बच्चों को लेने के लिए स्कूल पहुंचते हैं। इस समय होने वाले यातायात दबाव को नियंत्रित करने के लिए चालक परिचालक संघ ने कई बार आरटीओ को लिखित सूचना दी है, लेकिन किसी ने ध्यान नहीं दिया।
नपा प्रशासन की लापरवाही
यहां की व्यवस्था नगरपालिका के हाथ में है। अगर नगर पालिका चाहे तो बस स्टैंड पर नो हॉकर्स जोन और नो पार्किंग के बोर्ड लगाकर लोगों से जुर्माना वसूल कर सकती हैं तो व्यवस्था सुधर सकती है, लेकिन नपा प्रशासन भी इस ओर ध्यान नहीं दे रहा है।