
27.72 लाख की चारोलीपाड़ा गोशाला एक साल से बंद
झाबुआ. शहर में घूम रही बेसहारा गायों के लिए बनाई झाबुआ जनपद पंचायत की एकमात्र चारोलीपाड़ा गोशाला सुनी पड़ी है।एक साल से यहां एक भी गाय नहीं है। यहां कोई समिति गायों की देखरेख का बीड़ा उठाने को तैयार नहीं थी ,इसके चलते प्रशासन ने अब इसका जिम्मा श्री कृष्णा गोसेवा सदन देवझिरी को देने का मन बना लिया है। इस संबंध में सभी जरूरी प्रक्रिया पूरी कर ली है। गोशाला में जरूरी बदलाव किए जा रहे है। आने वाले समय में यहां गायों की सेवा भी शुरू हो जाएगी।
दरअसल सड़कों पर घूमने वाली बेसहारा गायों की सुध लेने के लिए सरकार ने गोसंरक्षण के वादे किए थे। जनपद पंचायत एवं ग्राम पंचायत स्तरों पर गोशाला बनाकर सरकारी गोशालाओं में गायों को खाने-पीने और रहने की व्यवस्था की थी। गोशालाओं की देखरेख की जिम्मेदारी स्वयं सहायता समूह को दी गई थी, लेकिन जनपद पंचायत झाबुआ की ग्राम पंचायत चारोलीपाड़ा गोशाला 1 साल से उपेक्षित पड़ी है। गौशाला का लोकार्पण होने के 3 साल बीतने के बावजूद इसमें एक भी गाय ना होना प्रशासन की कार्यप्रणाली पर कई सवाल खड़े कर रहा है।
- बनने के बाद से ही गोशाला उपेक्षित
गुरुवार को पत्रिका ने चारोलीपाड़ा गोशाला का रुख किया तो पाया कि गोशाला सुनी पड़ी थी, चौकीदार नदारद था। अंदर झांक कर देखा तो गोशाला परिसर में एक भी गाय नहीं थी। गंदगी पसरी थी। गाय के खाने-पीने के लिए बनाई संरचना में गंदगी थी। भूसा रखने के लिए बनाए गोदाम में जाने का रास्ता भी उबड-खाबड़ था। गोशाला के बाहर गाय के गोबर से खाद बनाने वाली संरचना भी उपेक्षा का शिकार दिखी। सरकारी गोशालाओं की बात करें तो जिले में मात्र 3 गोशाला हैं ,झाबुआ जनपद में ग्राम पंचायत चारोली पाड़ा, रामा जनपद की ग्राम पंचायत धामंदा और मेघनगर जनपद की ग्राम पंचायत गोपालपुरा में गोशाला निर्माण हुआ है। अन्य पंचायतों में भी गोशालाओं के लिए जमीन तलाशी जा रही है।
जनता की पीड़ा -
शहर में सैकड़ों की संख्या में गोवंश लावारिस हालत में घूम रहे हैं। इनसे हुए हादसों में अब तक दो लोगो की मौत भी हो चुकी है। मवेशियों को रखने के लिए नपा के पास कोई कांजी हाउस भी नहीं है। मवेशी पकड़ने के लिए खरीदा वाहन भी परिसर में ही खड़ा धूल खा रहा है।
भारत बारिया , रहवासी ।
शहर में जगह-जगह आवारा मवेशियों का जमघट लग रहा है। गोपाल कॉलोनी , राजगढ़ नाका, बस स्टैंड, सज्जन रोड ,उत्कृष्ट विद्यालय के सामने , राती तलाई के सामने, राजवाड़ा एवं मेघनगर नाका पर झुंड बनाकर बैठी गाय रोड पर चलने वालों के लिए सिरदर्द बन गई है।
अनिल शर्मा , रहवासी ।
यदि आवारा मवेशियों को हटाने के लिए नगर पालिका लगातार अभियान चलाए तो सड़कों की हालत सुधर सकती है। जिम्मेदारों का कहना है कि नगर पालिका गाय पकड़ती है, लेकिन गोशाला में पहुंचने से पहले ही गोपालक इन्हें जुर्माना भरकर छुड़ा ले जाते हैं। अगले दिन से ही है गाय फिर से सड़क पर घूमती दिखाई देती है।
कपिल जैन , रहवासी ।
इनका कहना -
अब देवझिरी गोशाला से सारी गाय कुछ ही दिनों में चारोली पड़ा गोशाला में शिफ्ट कर दी जाएगी। अभी गोशाला में आवश्यक सुधार कार्य चल रहा है। देवझिरी गोशाला में अब 10 गायों को रखा जाएगा । इनकी जिम्मेदारी के लिए एक व्यक्ति की भी नियुक्ति की जाएगी।
प्रीतेश शाह , सदस्य , श्री कृष्णा गोसेवा सदन ।
-एक्सपर्ट व्यू
गायों की देखरेख करने के लिए एक्सपर्ट लोगों की जरूरत होती है, इस बार चारोलीपाड़ा गोशाला का जिम्मा पहले से गायों का संवर्धन कर रही एक समिति को दिया है। समिति के सदस्य गोशाला में आवश्यक परिवर्तन कर रहे हैं, जल्द इसका संचालन शुरू करेंगे।
विल्सन डावर , उपसंचालक, पशु एवं डेयरी विभाग झाबुआ।
चारोली पड़ा गोशाला दो-तीन दिन के अंदर शुरू हो जाएगी, गायों की देखरेख की जिम्मेदारी भी एक समिति के माध्यम से की जाएगी।
रेखा राठौर , सीईओ , जिला पंचायत ,झाबुआ।
Published on:
22 Sept 2023 09:06 pm
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