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ग्रामीण बैंक को डिजिटल होने की जरूरत

नर्मदा-झाबुआ ग्रामीण बैंक में ग्राहकों ने बताई समस्याएं, सुझाव दिए

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Narmada-Jhabua Rural Bank

पिटोल. पिछले 33 वर्ष से चल रही एक दर्जन से अधिक गांवों के 20 हजार से अधिक ग्राहकों के साथ लगभग 30 करोड़ का लेन देन करने वाली पिटोल की एकमात्र नर्मदा झाबुआ ग्रामीण बैंक को डिजिटल होने के लिए ओर अधिक अपडेट होने की जरुरत है। पिटोल पंचायत भवन में बैंक की ओर से आयोजित ग्राहक सेवा समिति की बैठक में ग्राहक, बैंक कर्मियों के साथ उन्हें मिलने वाली सुविधाओं व ग्राहकों को आने वाली परेशानी पर चर्चा की गई।
बैंक प्रबंधक अनिल त्रिवेदी व मनीष तिवारी ने ग्राहकों को अवगत कराते हुए बताया कि उनका बैंक ऑफ इंडिया से टाईअप है। बैंकों को मिलने वाले व्यवसाय के आधार पर इस तरह की सुविधा मुहैया कराई जाती है। केश लैस के लिए स्वाईप मशीनें जल्द ही मिलेंगी । एटीएम के लिये कितना समय लगेगा कुछ कहा नहीं जा सकता। बैंक में हमेशा कनेक्टीवीटी बनी रहे उसके लिये वी सेट लगवाया गया है अब लिंक फेल होने की समस्या लगभग खतम सी हो गई है पहले पिटोल में लगातार 15 दिनों तक भी कर्मियों व ग्राहकों को लिंक फेल होने का दंश झेलना पडा था। त्रिवेदी नें बताया कि हर नागरिक को बैंक में खाता खुलवाने के बाद प्रधानमंत्री बीमा योजना का लाभ जरुर लेना चाहिये। पिटोल में ही कुछ लोगों को इस योजना से आर्थिक लाभ हुआ है जिसे बैंक ने बीमा कम्पनी के माध्यम से उन्हें यह लाभ दीया है। आपनें कहा कि ग्राहक इस बीमें हेतु आवश्यक राशि हमेंशा अपने खाते में बनाके रखे जिससे उनके इस बीमें को नवीनीकृत किया जा सके। मनिष तिवारी ने ग्राहकों को लोन लेने व लोन से मिलने वाले आयकर में लाभ से अवगत कराते हुवे विभिन्न योजनाओं पर प्रकाश डाला। झाबुआ से आऐ इफको टोकिया जनरल इन्श्योरेंस कंपनी के अंकित सोनी ने ग्राहकों को मेडीकल इन्श्योरेंस व अन्य प्रकार के बीमों से अवगत कराया।
कार्यक्रम में प्रकाशचंद्र मोदी, वीणा अमलियार , जगदीश चंद्र नागर, मन्नान अली, खोजेम भाई, भुपेन्द्र नायक, नीतश नागर, कैलाश मोदी, सुरेश वर्मा, दीपेश नागर, सरपंच काना गुंडिया, डॉ राहुल नागर, मोहन सोनी, हितेष प्रजापत, हंसराज नायक, किसन भाई सहित अन्य ग्रामीणजन उपस्थित थे।

अनपढ़ ग्राहक हो रहे परेशान
ग्राहक रामेश्वर नागर ने बताया कि बैंकों में बढी कागजी कार्यवाहीयों से अनपढ व अधिक उम्र वाले लोग अधिक परेशान हो रहे है। सरकारी योजनाओं का लाभ उन्हें आसानी से नहीं मिल पा रहा है यहां तक कि बैंक में उनका जमा पैसा बैंकिंग के ज्ञान नहीं होने के कारण आसानी से नहीं निकल पाता। बैंक की पर्चियां भरने के लिये उन्हें दुसरों का मुंह देखना पडता है यहीं नहीं कई लोग पर्चियां भरने के नाम पर उनका आर्थिक शोषण तक कर रहे है। इस अवसर पर प्रबंधक नें बताया कि इस तरह का आयोजन अब हर दो महिनों में होगा जिससे वे ग्राहकों से करीब से रुबरु हो सके व उनकी समस्याओं का समाधान कर सके।