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भांडाखेड़ा, रूपाखेड़ा, नाहरपुरा , सुरडिया व लंबेला में झिरी खोदकर पानी पी रहे

स्टॉप डैम सूखे , 15 स्थानों पर नवीन हैंडपंप के लिए पीएचई से लगाई गुहार , विभाग उदासीन

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झाबुआ

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Binod Singh

May 25, 2023

भांडाखेड़ा, रूपाखेड़ा, नाहरपुरा , सुरडिया व लंबेला में झिरी खोदकर पानी पी रहे

भांडाखेड़ा, रूपाखेड़ा, नाहरपुरा , सुरडिया व लंबेला में झिरी खोदकर पानी पी रहे

झाबुआ. सूखे जल स्रोतों में गड्ढा खोदकर पानी का जुगाड़ लगाती महिलाओं की यह तस्वीर राणापुर तहसील के भांडाखेड़ा और रूपाखेड़ा के जल संकट को दर्शाने के लिए पर्याप्त है। यह तस्वीर शासन की महती नल-जल योजना के क्रियान्वयन की पोल भी खोल रही है।
करोड़ों रुपया खर्च करने के बावजूद आजादी के 75 साल बाद भी ग्रामीण क्षेत्रों में हैंडपंप ना होना भी कई सवाल खड़े कर रहा है। कुंदनपुर के आसपास के इलाके नाहरपुरा , सुरडिया एवं लंबेला में भी लोग झिरी बनाकर पानी का जुगाड़ कर रहे हैं। पानी लेने के दौरान लोगों में आपसी विवाद की स्थिति भी बन रही है। महिलाओं का पूरा दिन झिरी से निकलने वाले पानी को एकत्रित करने में लग रहा है। इतना ही नहीं नागिन खेड़ी, रेेतालूंजा, काकरादरा , बुधाशाला, कालापान , मदसर, दोतड़ , टांडी , वागलावाट , वगाईबड़ी, टीकड़ी, पाडलवा जैसे क्षेत्रों में भी रहने वाले हजारों लोग पानी की समस्या से जूझ रहे हैं।
पिछले 7 सालों में दर्जनों आवेदन दिए
ऐसा नहीं है कि इन स्थानों की जानकारी विभाग के पास नहीं है,क्षेत्र के जनप्रतिनिधियों ने पिछले 7 सालों में दर्जनों बार यहां पानी की स्थिति से निपटने के लिए प्रशासन से गुहार लगाई है, लिखित आवेदन दिए, लेकिन न तो प्रशासनिक अधिकारी और न हीं पीएचई विभाग इस ओर ध्यान दे रहा है। जिले में सबसे अधिक पानी की किल्लत राणापुर ब्लॉक के कुंदनपुर क्षेत्र में हैं। एक से डेढ महिने पहले जल संकट को देखते हुए 15 स्थानों पर नवीन हैंडपम्प खनन एवं खराब हैंडपम्प की सूचना दे दी गई थी,7 सालों से लगातार मांग करने के बावजूद आज तक कुंदनपुर क्षेत्र व राणापुर क्षेत्र में एक भी नवीन हैंडपम्प खनन नहीं हुआ है।
मवेशियों को भी नहीं मिल रहा पानी

डेढ़ माह पहले इन लोगों ने अपने लिए पीएचई से नए हैंडपंप लगाने और पुराने हैंडपंप दुरुस्त करने की मांग की थी, लेकिन स्थिति में कोई परिवर्तन नहीं आया। लोग पानी के लिए आज भी पहले की तरह संघर्ष कर रहे हैं। क्षेत्र में भामची नदी पर बने अधिकतर स्टॉप डेम भी दम तोड़ चुके हैं ,जिससे पानी की समस्या और भी अधिक गहरा गई है। अब मवेशियों के लिए भी पीने का पानी नहीं मिल रहा है, जिससे ग्रामीण क्षेत्रों में कृषि कार्यों से जुड़े किसानों को मवेशियों के साथ खेती की ङ्क्षचता भी सताने लगी है। वहीं अधिकारियों का कहना है कि जुलाई तक यहां पर जल जीवन मिशन के अंतर्गत हर घर नल योजना पूर्ण हो जाएगी।