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सरकार को 10 दिन का समय, नहीं तो फिर करेंगे आंदोलन

सहकारी कर्मचारी संघ के महापड़ाव में बोले पदाधिकारी अब जयपुर की बारी

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सरकार को 10 दिन का समय, नहीं तो फिर करेंगे आंदोलन

झालावाड़.राजस्थान सहकारी कर्मचारी संघ का दो दिवसीय महापड़ाव बुधवार को संपन्न हुआ। महापड़ाव स्थल पर कर्मचारी अपनी मांगों के संबंध में 'आवाज दो हम एक हैÓ, 'सरकार की नीति कच्ची है- हमारी मांगे सच्ची है जैसे सरकार विरोधी नारे लगाते नजर आए। महापड़ाव स्थल पर सहकारी संघ के झालावाड़ जिलाध्यक्ष रामचन्द नागर ने कहा कि सरकार व प्रशासन से अनुमति लेंगे आगे की स्वीकृति नहीं मिलती है, तो सरकार को दस दिन का समय दे रहें हैं। कोई सुनवाई नहीं होती है तो प्रदेशभर के करीब १५ हजार कर्मचारी राजधानी जयपुर में महापड़ाव डालकर सरकार का हमारी मांगों की ओर ध्यान आकर्षित करेंगे।हम रात-दिन किसानों के साथ रहते हैं, उनको खाद-बीज देते हैं। जो परेशानी हमें है इसके लिए किसान भी हमारे साथ है। संयोजक कुलदीप जंगम ने कहा कि सरकार हमारी मांगों पर ध्यान नहीं देती है तो साढ़े छह हजार ग्राम सेवा सहकारी समितियों के माध्यम से २५ लाख किसान जुड़े हुए है। उन्हें भी साथ लेकर आगे की रणनीति बनाएंगे। कोई सकारात्मक परिणाम नहीं आता है तो सरकार को चुनाव में इसका नुकसान उठाना पड़ेगा। महापड़ाव स्थल पर प्रदेशाध्यक्ष नन्दलाल वैष्णव, ओमप्रकाश शर्मा, हमेराज गुर्जर, कोटा जिला महामंत्री महेन्द्र मेहता, कृष्णमुरारी भवगतीप्रसाद, सीताराम गौड़, कृष्णमुरारी गुर्जर, इन्द्रराज नागर, भवानी शंकर, दीनदयाल गोचर, गजराज सिंह, संभागीय अध्यक्ष हनुमान सैनी सहित कई लोग मौजूद थे।

कर्मचारी बोले: नई बंद कर, पुरानी पेंशन चालू करो

झालावाड़.राजस्थान शिक्षक महासंघ व अखिल राजस्थान संयुक्त राज्य कर्मचारी महासंघ एकीकृत के कर्मचारियों ने पेंशन स्कीम को लेकर मिनी सचिवालय के सामने धरना दिया। यहां एक सभा की गई इसके बाद मुख्यमंत्री व प्रधानमंत्री के नाम कलक्टर को ज्ञापन सौंपा। ज्ञापन में बताया कि राज्य सरकार ओल्ड पेंशन स्कीम लागू कर नई पेंशन स्कीम को बन्द करने की मांग की।

इससे पूर्व सभा का आयोजन किया गया इसमें संयुक्त महासंघ के जिलाध्यक्ष राजेन्द्र सोनी ने कहा कि नई पेंशन योजना के तहत कर्मचारियों के मूल वेतन से १० फीसदी काटकर इतना ही सरकार मिला रही है। जबकि पुरानी पेंशन में कोई कटौती नहीं होती थी, कर्मचारी की मृत्यु होने पर पत्नी को ताउम्र पेंशन मिलती थी,जबकि नई में इसे बंद कर दिया है। सरकार पेंशन की कटौती का पैसा विदशी कंपनियों के शेर मार्केट में लगा रही है। इससे शेयर बाजार में उतार-चढ़ाव होने से कर्मचारियों के मूल कटौती की राशि में भी कई बार कमी हो रही है। वहीं आए दिन कंपनियों के घाटाले सामने आ रहे हैं इससे कर्मचारियों में डर बना हुआ है। शिक्षक महासंघ के जिलाध्यक्ष ओम प्रकाश सेन ने बताया कि पुरानी पेंशन कर्मचारियों के बुढ़ापे का सहारा थी, प्रत्येक माह मिलने से घर खर्च में आसानी थी, लेकिन अब एकमुश्त से परेशानी होगी। प्रदेशउपाध्यक्ष अशोक शर्मा ने कहा कि पुरानी पेंशन कर्मचारी व परिवार के हित में थी। नई से नुकसान है, इसे बंद किया जाएं। इस मौके पर कर्मचारी एकीकृत महासंघ के कार्यकारी अध्यक्ष अजय जैन, जिलाध्यक्ष मंगल सिंह परमार, महामंत्री यशवीर सिंह चौहान,उपाध्यक्ष वैभव जोशी, सुहास शर्मा नासिर बेग, आरिफ हुसैन गौरी सहित कई कर्मचारी संगठनों के पदाधिकारियों ने पुरानी पेंशन स्कीम को लागू करने की मांग की।

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