7 मई 2026,

गुरुवार

Patrika Logo
Switch to English
home_icon

मेरी खबर

video_icon

शॉर्ट्स

epaper_icon

ई-पेपर

12वीं का छात्र दौड़ते समय हुआ बेहोश, अस्पताल में मौत

शारीरिक फिटनेस के लिए रोज खेल संकुल आता था

2 min read
Google source verification
12th class student fainted while running, died in hospital

झालावाड़ एसआरजी अस्पताल में भर्ती छात्र जहां उसकी इलाज के दौरान मौत हो गई।

खेल संकुल में शनिवार सुबह दौड़ लगाते समय 12वीं का छात्र बेहोश हो गया। वहां मौजूद लोगों ने उसे तत्काल एसआरजी अस्पताल पहुंचाया। यहां उसे वेंटीलेटर पर रखा गया, लेकिन थोड़ी देर बात उसकी मौत हो गई।

कोतवाली थाना प्रभारी भूरी सिंह ने बताया कि खंडिया कॉलोनी निवासी मिथलेश मेहर [18] गोपाल मेहर शारीरिक फिटनेस के लिए रोजाना खेल संकुल में दौड़ लगाने के लिए आता था, लेकिन वह पिछले 15 दिन से दौड़ लगाने नहीं आ रहा था। वह शनिवार सुबह वापस दौड़ लगाने आया था। वह दौड़ते समय ट्रेक पर गिर पड़ा और बेहोश हो गया। आसपास मौजूद लोग उसे अस्पताल लेकर आए। उसकी गंभीर हालत देखकर चिकित्सकों ने उसे वेंटिलेटर पर रखा, लेकिन कुछ देर बाद उसकी मौत हो गई। मृतक के भाई दीपक ने बताया कि उसका भाई बिल्कुल स्वस्थ था। उसे कोई बीमारी भी नहीं थी। वह फिटनेस के लिए दौड़ लगाने जाता था। वह राजकीय न्यू ब्लॉक स्कूल में बारहवीं कक्षा का छात्र था।

सोशल मीडिया से हुई पहचान

अस्पताल पुलिस चौकी प्रभारी महेंद्र मीणा ने बताया कि मिथलेश को तलाश करते हुए परिजन अस्पताल चौकी पहुंचे। उन्होंने बताया कि सोशल मीडिया पर उनके बेटे की फोटो वायरल हो रही है, वह खेल संकुल में बेहोश हो गया था। जब परिजनों को युवक का शव दिखाया तो उन्होंने उसे पहचान लिया। पुलिस ने पोस्टमार्टम के बाद शव परिजनों को सौंप दिया। युवक की मौत के कारणों का खुलासा पोस्टमार्टम रिपोर्ट आने के बाद ही हो पाएगा।

बिना प्रशिक्षक कसरत न करें

जिला खेल अधिकारी कृपा शंकर शर्मा ने बताया कि फि जिकल फि टनेस कुछ ही दिन में नहीं आती। इसके लिए लगातार मेहनत करनी पड़ती है। इसके लिए किसी प्रशिक्षक की भी जरूरत होती है जो आपको आपके शरीर के अनुकूल कसरत बताता है। आजकल के युवा तुरन्त फि टनेस चाहते हैं। इसके लिए वे शरीर की क्षमता से ज्यादा कसरत कर लेते जो उनके शरीर के लिए घातक होती है।

''मृतक का विसरा हिस्ट्रो पैथोलॉजी जांच के लिए भेजा है। इसके करीब 10 से 12 दिन लग सकते हैं। उसके बाद ही मौत के सही कारणों का पता लग पाएगा।

- डॉ.संजय पोरवाल, अधीक्षक एसआरजी अस्पताल