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24 घंटे देखभाल का दावा फिर भी दम तोड़ रही प्रसूताएं

लगातार बढ़ रहा मौतों का आंकड़ा, 3 बजे बाद गायब हो जाते हैं भगवान -साल की शुरूआत में 3 मौत

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 24-hour care claims still dying obstetricians

24 घंटे देखभाल का दावा फिर भी दम तोड़ रही प्रसूताएं

झालावाड़.जिले में प्रधानमंत्री सुरक्षित मातृत्व दिवस कार्यक्रम जोर-शोर से चल रहा है। इसके बाद भी तीन साल साल में 69 प्रसूताओं की मौत हो गई है। नतीजतन जिला मुख्यालय स्थित महिला अस्पताल में हर माह करीब 20 प्रसूताओं को मौत का सामना करना पड़ा है। हीरा कंवर बा महिला चिकित्सालय में हर माह 100 से अधिक हाई रिस्क महिलाओं के प्रसव होते हैं। हाल ही में फरवरी माह में 28 फरवरी को लैबर रूम में एक प्रसूता की मौत हो गई थी। दो माह में 3 प्रसूताओं की मौत हो चुकी है। इस दर को कम करने के लिए केंद्र सरकार की तरफ से प्रधानमंत्री सुरक्षित मातृत्व दिवस शुरू किया गया है। प्रत्येक माह की 9 तारीख को यह दिवस मनाया जाता है। जून माह से यह दिवस शुरू हुआ है। इसके बाद भी प्रसूताओं की मौतें का आंकड़ा कम नहीं हो रहा है। जो चिकित्सा विभाग के लिए सवालिया निशान खड़े कर रहा है।
अकेले जनाना अस्पताल में प्रतिदिन 25 से 30 प्रसव होते हैं। इस हिसाब से एक माह में औसत 800 से अधिक प्रसव होते हैं। हर माह 100 से अधिक हाई रिस्क प्रसव जनाना चिकित्सालय में ग्रामीण क्षेत्रों से आते है।

कार्यक्रम में क्या होना चाहिए -
प्रत्येक माह की 9 तारीख को मातृत्व दिवस मनाया जाता है। इसमें प्रसूताओं की मधुमेह, एचबी, एचआईवी, बीपी, सिफ्लिस जैसी जांच नि:शुल्क की जाती है। उनको जरूरी दवाएं दी जाती हैं। गम्भीर प्रसूताओं को जिला मुख्यालय पर जनाना चिकित्सालय में रैफर किया जाता है। ताकि उनका सुरक्षित प्रसव हो सके। लेकिन यहां लैबर रूम में सार-संभाल के अभाव में व चिकित्सक सहित नर्सिंग स्टाफ की लापरवाही के आरोप भी लगते रहे हैं।

जनाना अस्पताल के हालात-
2018- 22 प्रसूताओं की मौत
2019- 24 प्रसूताओं की मौत
2020- 3 प्रसूताओं की मौत

नहीं होती महिलाओं की केयर-
जनाना चिकित्सालय में जिले प्रसूव के लिए आई पीडि़त महिला नाजिया ने बताया कि हीरा कंवर बा जनाना चिकित्सालय में मरीज की कोई देखभाल नहीं होती है। प्रसूताओं के साथ व्यवहार भी अच्छा नहीं होता है।मेरी डिलेवरी के तीन दिन बाद डिस्चार्ज कर दिया। लेकिन कॉपर डी की गोलिया स्टाफ द्वारा बिना अनुमति के ही रख दी। इससे मुझे 17 दिन तक दर्द होता रहा। और लगातार ब्लडिंग होती रही। जब ये बात मुझे तब पता चली जब दर्द होने पर दिखाने गई। इसके बारे में पूछने पर स्टाफ द्वारा दुव्र्यहार किया गया। मेरे प्रथम बेबी है,लेकिन बिना अनुमति के ऐसा क्यों किया। इसकी जांच के लिए जिला कलक्टर को शिकायत की गई है। उन्होंने भी डीन से इसकी जांच करने के लिए कहा।

लैबर रूम में हो चुकी है मौत-
केस-एक
जनाना चिकित्सालय के लैबर रूम में जनवरी माह में पूजा पत्नी अशोक की मौत हो चुकी है। पति अशोक ने बताया कि पूजा का अचानक बीपी बढ़ गया था। एक ही सांस ली और उसके बाद मृत्यु हो गई।

केस दो-
गायत्री बाई पत्नी लक्ष्मीनारायण की भी जनाना चिकित्सालय मौत हो चुकी है। गायत्री बाई के भाई कमल ने बताया कि फरवरी में डिलेवरी हुई थी, ऑपरेशन हुआ था दूसरे दिन घबराहट हुई। आईसीयू में ले गए और अचानक मौत हो गई।

केस तीन-
जनाना चिकित्सालय में 28 फरवरी को लैबर रूम में कनवास निवासी लीलाबाई की मौत हो गई थी। परिजनो ंने इलाज मे लापरवाही का आरोप लगाते हुए कहा कि यहां की महिला डॉक्टर सारसंभाल नहीं करती हैं। समय पर इलाज किया होता तो लैबर रूम में प्रसूता की मौत नहीं होती।


ये है मौतों के कारण-
- कई बार महिलाएं जो ग्रामीण क्षेत्रों की सीएचसी, पीएचसी से गंभीर स्थिति में आती है।
- एनिमिक महिलाओं को तुरंत सहायता की जरुरत होती है, लेकिन यहां सारा काम ही जेआर संभालती हैं, ऐसे में तुरंत सहायता नहीं मिल पाती है।
- यहां 3 बजे बाद तो सारा काम नर्सिंग स्टाफ ही देखती है। मरीज के भर्ती होने के बाद अगले दिन सुबह 9 बजे चिकित्सक की सुविधा मरीज को मिलती है। जबकि नियमानुसार 24 घंटे एक वरिष्ठ चिकित्सक के चिकित्सालय की इमरजेंसी में रहने के निर्देश विभाग द्वारा दिए गए है।

जांच सौंप दी है-
महिला को डीलेवरी के बाद डॉक्टर ने कॉपर टी टेबलेट लगाई थी, उसमें मौखिक रुप से अनुमति ली गई थी। जब वो दिखाने आए तब निकाल दी। नियमानुसार सभी का इलाज किया जाता है, अब परिजन तो कुछ भी बोल सकते हैं। 28 फरवरी को महिला की मौत के मामले की जांच जिला कलक्टर को सौंप दी है।

डॉ.एमएस राठौड़, डीन मेडिकल कॉलेज, झालावाड़।