हरिसिंह गुर्जर
झालावाड़ कालीसिंध थर्मल से निकलने वाली राख इन दिनों पर्यावरण के साथ आमजन को भी नुकसान पहुंचा रही है। लापरवाही के कारण कई दिनों से सड़क पर ही राख फैल रही है। इसकी शिकायत राजस्थान राज्य प्रदूषण नियंत्रण मंडल को भी की जा चुकी है। मंडल ने इस सम्बन्ध में थर्मल प्रशासन को नोटिस दिया, लेकिन इसके बाद भी इस पर रोक नहीं लग पाई। थर्मल से प्रतिदिन करीब 4 हजार मीट्रिक टन फ्लाइ ऐश निकलती है। जिम्मेदार अधिकारियों का इस ओर कोई ध्यान नहीं है।
कालीसिंध थर्मल से लेकर कपास्या कुआं तक पूरे रोड पर राख फैल रही है। गीली राख में कई बाइक सवार फिसल कर चोटिल हो रहे हैं, वहीं सूखने के बाद यह राख वाहन चालकों की आंखों में जा रही है। दिनभर राख के गुब्बार उडऩे से वाहन चालकों को सड़क पर कुछ नजर नहीं आता। पत्रिका टीम ने सोमवार रात को इस रोड का निरीक्षण किया तो ओवरलोड डंपर रोड पर मुफ्त की राख बिखेरते नजर आए। इनपर ऊपर तिरपाल भी ढके हुए नहीं थे।
फैक्ट फाइल-
कालीसिंध थर्मल की 600-600 मेगावाट क्षमता की दो इकाइयां से अभी फु ल लोड पर उत्पादन हो रहा है
. थर्मल से प्रतिदिन करीब 3000 मैट्रिक टन फ्लाई एश निकल रही है।
. थर्मल से प्रतिदिन करीब 1000 मैट्रिक टन बोटम एश निकलती है जो पानी के साथ बाहर तालाब में जाकर एकत्रित होती है।
. फ्लाई एश के दो तरह के टेंडर है। ये 250 रुपए व 426 रुपए प्रति टन के हिसाब से सीमेंट कंपनी और ब्रिक्स बनाने वाले ले जाते हैं।
. प्रतिदिन करीब 70-80 डंपर निकल रहे है$ग रोड पर जो बिना तिरपाल से ढके हुए ही निकल रहे है। क्षमता से अधिक भरे होने के कारण रोड पर
बिखेरते हुए निकल रहे।
. बड़ी संख्या में ट्रैक्टर ट्रॉली भी रोड पर बिना तिरपाल के ही फ्लाइ ऐश ले जा रहे हैं, जो क्षमता से अधिक होने के कारण रोड पर व ब्रेकर पर बिखेरते हुए निकल रहे।
ये है नियम.
– थर्मल से निकलने वाली राख को ले जाने के लिए डंपर, ट्रक, ट्रैक्टर आदि को तिरपाल से ही ढककर ले जाने का नियम है, ताकि राख के उडऩे से पर्यावरण को नुकसान नहीं पहुंचे और वाहन चालकों और आम लोगों को किसी प्रकार की परेशानी नहीं हो।
मुफ्त की राख ,इसलिए नहीं ध्यान
कालीसिंध थर्मल पावर प्लांट से नेशनल हाइवे ऑथोरिटी ऑफ इंडिया को मंडाना में बन रहे हाइवे रोड के लिए फ्लाई एश मुफ्त में दी जा रही है। ऐसे में एनएचआई में लगे डंपर चालक राख को रोड पर बिखेरते हुए तेज रफ्तार से निकल रहे हैं। इनकी संख्या रात को ज्यादा हो जाती है। ऐसे में ब्रेकर व गड्ढ़ों पर राख ज्यादा बिखर रही है। वहीं बॉटम राख से भरे सैंकड़ों ट्रैक्टर दिनरात शहर की सड़कों पर दौड़ते नजर आते हैं।
क्षमता से अधिक ले जा रहे-
” एक डंपर की क्षमता 40 टन की होती है, लेकिन थर्मल से निकल रहे डंपर 50 टन से अधिक राख भरकर सड़कों पर दौड़ रहे हैं। ब्रेक लगाते ही पूरे रोड पर राख बिखर जाती है, इससे पर्यावरण व आम लोगों को काफ ी नुकसान हो रहा है। थर्मल को इस पर रोकथाम के लिए नोटिस दिया गया है, लेकिन अभी तक कोई समाधान नहीं किया गया है।
-अशोक कुमार जैलिया, क्षेत्रीय अधिकारी प्रदूषण नियंत्रण मंडल झालावाड़
एनएचआई को दें रहे-
फ्लाई ऐश को अभी एनएचआई को दे रहे हैं।एक- दो माह की परेशानी है।फिर भी इसका क्या समाधान हो सकता है। कल बैठक बुलवाकर निराकरण करते हैं। डंपर वालों को समझाएंगे, तिरपाल लगाकर राख ले जाएं। क्षमता से अधिक नहीं भरें।
केएल मीणा,चीफ इंजीनियर, कालीसिंध थर्मल पावर प्लाट,झालावाड़।