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मुकुंदरा की पहाड़ियों के बीच दर्शन देती मां रातादेवी

उपखंड मुख्यालय के पास मुकुन्दरा पर्वतमाला की मनोहारी पहाड़ियों के बीच मां राता देवी दर्शन देती हैं। यही नहीं यहां नवरात्र के दौरान पुलिस पहरा देती है और झालरापाटन तहसील के कौष कार्यालय से माता को सजाने के लिए सोने चांदी के आभूषण आते हैं। यह आभूषण 9 दिनों तक माता के श्रृंगार में शोभा बढ़ाते हैं।

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असनावर. उपखंड मुख्यालय के पास मुकुन्दरा पर्वतमाला की मनोहारी पहाड़ियों के बीच मां राता देवी दर्शन देती हैं। यही नहीं यहां नवरात्र के दौरान पुलिस पहरा देती है और झालरापाटन तहसील के कौष कार्यालय से माता को सजाने के लिए सोने चांदी के आभूषण आते हैं। यह आभूषण 9 दिनों तक माता के श्रृंगार में शोभा बढ़ाते हैं। शारदीय व चैत्र नवरात्रि के दिनों में मातारानी के इस धाम की आभा बहुत धार्मिक होती हैं।

झालावाड़ जिला मुख्यालय से करीब 30 किमी दूर असनावर के निकट ग्राम पंचायत लावासल के गांव बाड़िया गोरधनपुरा में मुकुन्दरा पर्वतमाला के बीच रातादेवी का मंदिर श्रद्धालुओं के लिए आस्था का एक बड़ा केंद्र है। जहां श्रद्धालुओं का अपार जन समूह वर्ष पर्यंत उमड़ता रहता है। नवरात्र के दौरान रातादेवी के मंदिर पर रात के समय आकर्षक विधुत सजावट की जाती है।

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हर प्रार्थना होती पूरी
मां खींची राजवंश की कुलदेवी हैं। पूरा मंदिर सफेद संगमरमर से निर्मित हैं। राता देवी गागरोन के राजा अचलदास खींची की बहन थी, जो सती होने के दौरान पत्थर के रूप में परिवर्तित हो गई। इनके यहां 2 स्वरूपों मे पूजा की जाती हैं। इसमें एक बिजासन और दूसरे अन्नपूर्णा के रूप में पूजा होती है। माता की मूर्ति के पीछे अचलदास की छाप है। चैत्र एवं शारदीय नवरात्रि में 9 दिन तक यहां मेला लगता है। पूरे हाड़ौती संभाग एवं मध्य प्रदेश के श्रद्धालु यहां काफी संख्या में आकर श्रद्धा के साथ पूजा अर्चना करते हैं। कहते है कि यहां आकर मन्नतें मांगने से सभी भक्तों की मन्नत पूरी हो जाती है। कोई खाली हाथ नहीं जाता, लेकिन पिछले दो साल से कोरोना लॉकडाउन एवं कोविड महामारी के चलते यहां गाइडलाइन की पालना के चलते श्रद्धालुओं की संख्या में कमी आई थी, लेकिन अब कोरोना का असर खत्म होने से रोजाना भक्तों का सैलाब उमड़ रहा है।

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आस्था का बड़ा केंद्र
यह मंदिर खींची राजाओं ने बनवाया था। यह उनकी कुल देवी के नाम से भी जानी जाती है। समय समय पर खींची राजाओं के वंशज यहां आकर पूजा अर्चना करते है। नवरात्र में यहां उनके परिवार के लोग आते हैं और पूजा अर्चना करते हैं। इसके अलावा रातादेवी मंदिर हजारों लोगों की आस्था एवं विश्वास का केंद्र है। इस मंदिर में हमेशा देशी घी के दीपक जलते रहते है। बाहर से आने वाले भक्तों की यहां हर इच्छा पूरी होती है। यहां नवरात्र में मन्दिर में पुलिस का पहरा रहता है, जो हर 3 घन्टे में बदलता रहता है। यहीं नहीं सुबह शाम आरती के समय पुलिस सलामी देती है। राजस्थान का यह पहला मन्दिर होगा, जहां सरकारी आभूषणों से माता का श्रृंगार होता है और पुलिस सलामी देती है।

श्रद्धालुओं में यहां नवरात्र में दर्शन करने में बहुत आस्था है, और हजारों की संख्या में श्रद्धालु यहां नंगे पांव चले आते हैं। नवरात्र के दौरान यहां मेला लगता है। जिसमें श्रद्धालु लोग खरीदारी करते है। नवरात्र में अष्टमी व नवमी पर यहां श्रद्धालुओं की जमकर भीड़ उमड़ती है। रातादेवी मंदिर समिति अध्यक्ष महेंद्र कुमार जैन ने बताया कि समिति की ओर से श्रद्धालुओं के लिए अष्टमी पर विशाल भंडारा एवं नवमी पर कन्याभोज करवाया जाता है। जिनमें हजारों श्रद्धालु भोजन प्रसादी ग्रहण करते है