
सहायक उप निरीक्षक मदनलाल गुर्जर और हैड कांस्टेबल बाबूलाल की अहम भूमिका रही
झालावाड़ पुलिस ने एक ठोस कार्रवाई करते हुए बस्तियों में बेची गईं लड़कियों का पता लगाया और उन्हें मुक्त कराया। इस अभियान में सहायक उप निरीक्षक मदनलाल गुर्जर और हैड कांस्टेबल बाबूलाल की अहम भूमिका रही, जिन्होंने पिछले एक माह के दौरान कई बस्तियों में घर-घर जाकर गहन छानबीन की और महत्त्वपूर्ण सुराग जुटाए। एसपी अमित कुमार ने जानकारी दी कि पुलिस को गांव से देह व्यापार के लिए लड़कियों को बेचे जाने की सूचना मिली थी। इस गंभीर मामले की पड़ताल के लिए दोनों पुलिसकर्मियों को विशेष रूप से जिम्मेदारी दी गई थी। मदनलाल गुर्जर और बाबूलाल पिछले आठ माह से इस समुदाय के पुनर्वास कार्यक्रम में भी सक्रिय भूमिका निभा रहे थे, जिससे उन्हें समुदाय के लोगों से जुड़ने और विश्वास बनाने में मदद मिली। अपनी जांच के दौरान, दोनों पुलिसकर्मियों ने बस्तियों में लोगों से व्यक्तिगत रूप से मिलकर पूछताछ की और पूरे गिरोह के बारे में बारीक जानकारी एकत्र की। इसी दौरान एक महत्त्वपूर्णमोड़़ आया, जब मुंबई पुलिस झालावाड़ की दो लड़कियों को लेकर आई। ये लड़कियां वही निकलीं जिनके बारे में पुलिसकर्मियों को पहले से जानकारी मिल चुकी थी। इस पुष्टि के बाद गिरोह के अन्य सदस्यों और पहले बेची गई अन्य लड़कियों के बारे में विस्तृत जानकारी जुटाना संभव हो पाया। झालावाड़ पुलिस ने इसके उपरांत सक्रियता दिखाते हुए अन्य जिलों की पुलिस टीमों से तत्काल संपर्क स्थापित किया। उनके सहयोग से एक समन्वित अभियान चलाया गया, जिसके परिणामस्वरूप कई बेची गई लड़कियों को इस अवैध धंधे से सफलतापूर्वक रेस्क्यू किया गया। यह कार्रवाई मानव तस्करी के विरुद्ध पुलिस की प्रतिबद्धता को दर्शाती है।
इस गिरोह का नेटवर्क इतना तेज है कि जैसे ही मुम्बई पुलिस पीटा एक्ट के तहत पकड़ी गई लड़कियों को लेकर झालावाड़ आई। मुम्बई में गिरोह के सदस्यों ने दोनों स्तर के सदस्यों को इस बारे में अलर्ट भेज दिया कि लड़कियां उनके माता-पिता को सौंपी जा रही है। इन्हें वापिस अतिशीघ्र मुम्बई भेजने का इंतजाम करो। सूचना मिलते ही बूंदी से दलाल आनन-फानन में झालावाड़ पहुंचे। वे लड़कियों को वापस अपने कब्जे में लेकर उन्हें मुम्बई भेजने के फिराक में थे। इसी दौरान पुलिस ने उन्हें दबोच लिया। मदनलाल गुर्जर और बाबूलाल पिछले आठ माह से इस समुदाय के पुनर्वास कार्यक्रम में भी सक्रिय भूमिका निभा रहे थे, जिससे उन्हें समुदाय के लोगों से जुड़ने और विश्वास बनाने में मदद मिली। अपनी जांच के दौरान, दोनों पुलिसकर्मियों ने बस्तियों में लोगों से व्यक्तिगत रूप से मिलकर पूछताछ की और पूरे गिरोह के बारे में बारीक जानकारी एकत्र की।
झालावाड़ पुलिस ने इसके उपरांत सक्रियता दिखाते हुए अन्य जिलों की पुलिस टीमों से तत्काल संपर्क स्थापित किया। उनके सहयोग से एक समन्वित अभियान चलाया गया, जिसके परिणामस्वरूप कई बेची गई लड़कियों को इस अवैध धंधे से सफलतापूर्वक रेस्क्यू किया गया। यह कार्रवाई मानव तस्करी के विरुद्ध पुलिस की प्रतिबद्धता को दर्शाती है।
Updated on:
5 Jun 2026, 9:37 PM IST
Published on:
5 Jun 2026, 9:37 PM IST
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