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रोडवेज को घाटे से उबारने के लिए बेटिकट यात्री पर अब लगेगा दस गुणा जुर्माना

  - पहले परिचालक के जीपीएस से जोडऩे की योजना भी ला चुका है रोडवेज निगम
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झालावाड़

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Hari Singh Gujar

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Updated: 14 Mar 2021, 7:04 PM IST

Bettit passenger will now be fined ten times for recovering roadways from losses

रोडवेज को घाटे से उबारने के लिए बेटिकट यात्री पर अब लगेगा दस गुणा जुर्माना

झालावाड़. रोडवेज को घाटे उबारने के लिए राजस्थान रोडवेज निगम आए दिन नए-नए प्रयोग कर रहा है। फिर भी घाटे से नहीं ऊबर पा रहा है। हाल में कुछ दिनों पहले केबिनेट की बैठक में भी जुर्माना लगाने के निर्णय को हरी झंडी दी जा चुकी है। रोडवेज बसों में अब बिना टिकट तथा ऐसे यात्री को बिठाने वाले परिचालकों, दोनों से ही अलग-अलग वास्तविक किराए से 10 गुणा अधिक जुर्माना वसूला जाएगा। हाल ही में कैबिनेट की बैठक में रोडवेज की बसों में बिना टिकट यात्रा करने पर जुर्माना राशि बढ़ाने की भी मोहर लगा दी गई है। अब तक ऐसे यात्रियों से वास्तविक किराया एवं पांच रुपए ही वसूला जाता था। हालांकि अधिकतम जुर्माना का स्लैब भी नए सिरे से तैयार किया जा रहा है। हालंाकि पूर्व में विभाग परिचालकों को कैमरे की नजर में रखने के लिए भी जीपीएस सिस्टम से जोडऩे की बात कर चुका है, ताकि महिलाओं की सुरक्षा व यात्री व परिचालकों के बीच होने वाले झगड़े की वास्तवित स्थिति का पता लग सके।

राजस्व छीजत बड़ी कमजोरी-
सूत्रों ने बताया कि यात्री भार में कमी से रोडवेज की सेहत दिनों दिन बिगड़ रही है। प्रदेश में मौजूदा काल में करीब 50 से 60 करोड़ रुपए महीने का घाटा हो रहा है। ऐसे में राजस्थान रोडवेज 4 हजार करोड़ से अधिक घाटे में चल रहा है। इसके पीछे राजस्व छीजत सबसे बड़ा कारण है, जिसने रोडवेज को लाइलाज बीमारी ने जकड़ लिया है। जो भी अफसर आते हैं वह नए-नए प्रयोग करना शुरू कर देते हैं। किंतु राजस्व छीजत यानी कि राजस्व चोरी पर प्रभावी अंकुश नहीं लगाया जा सका है। रोडवेज प्रदेश की लाइफ लाइन है, खासकर गांवों और कस्बों के लिए। लेकिन ग्रामीण क्षेत्रों में कुछ टैक्स चोर प्राइवेट वाहनों ने रोडवेज को बैकफुट पर कर रखा है। लाभ के रूटों पर सेठ जी और घाटे की सड़कों पर रोडवेज, ऐसा खेल चल रहा है। रोडवेज को समाप्त करने की बातें समय समय पर चलती रहती है। कभी भ्रष्ट कर्मियों का दबाव तो कभी राजनीतिक मजबूरी, रोडवेज की सेहत सुधारने के लिए कड़वी दवा वाला इलाज करने ही नहीं देती है। अगर सरकार को रोडवेज को बचाना है तो सख्ती से पेश आना होगा।


जिले में ये है स्थिति-
2021 2020
जनवरी-7.8 लाख किमी 8.68 लाख किमी
राजस्व प्राप्ति- 254 लाख 298.10 लाख
- नुकसान करीब 44 लाख

फरवरी- 6.93 लाख किमी 8.12 लाख किमी
राजस्व प्राप्ति-235.54 लाख 293.50 लाख
नुकसान करीब- 57 लाख

पुलिस व रोडवेज की नहीं बन रही बात-
जब से पुलिस कर्मियों के दो सौ रूपए वेतन से काटे है, तभी से एक बस में पांच से अधिक पुलिस कर्मियों को नहीं बिठाने का नियम आया है। लेकिन कई बार पंाच से अधिक पुलिस कर्मी भी अपने कार्यो से जाते है,तथा कई रंग रूट भी एक साथ जाते हैं, ऐसी स्थिति में पुलिस अब बसों में कभी चालक व परिचालक के वर्दी नहीं पहनने व सिट बैल्ट आदि नहीं लगाने के नाम पर 2 से 3 हजार रूपए तक के चालान बना रहे हैं। ऐसे में आए दिन झगड़े हो रहे हैं।

मुख्यालय से निर्देश मिले है-
दस गुणा जुर्माना लेने के मुख्यालय से निर्देश है। हां रोडवेज घाटे में तो चल रही है। रोडवेज के घाटे को कम करने के लिए राजस्व की चोरी नहीं हो इसके लिए नियमित रूप से चैकिंग कर रहे हैं। पुलिस द्वारा चालान बनाने के दो मामले सामने आए है। मुख्यालय से बात हो रही है एक दो दिन में कुछ समाधान निकल जाएगा। रोडवेज में एक साथ पांच ही पुलिस कर्मियों को बिठाने का नियम है।
अतुल यादव, चीफ मैनेजर, रोडवेज डिपो, झालावाड़।