
झालावाड़। चार साल पहले मछली के ठेके के विवाद में हुए बहुचर्चित भीमसागर डेम दोहरे हत्याकांड में मंगलवार को अपर जिला और सत्र न्यायाधीश नरेद्र मीणा ने फैसला सुनाते हुए 11 जनों को आजीवन कारावास और जुर्माने की सजा से दण्डित किया। एक जने को आम्र्स एक्ट के तहत दोषी मानते हुए सात साल के साधारण कारावास की सजा सुनाई। इस वारदात में मछली के ठेकेदार भोपाल के गैंगस्टर मुख्तियार मलिक और उसके साथी कमल किशोर की हत्या कर दी गई थी।
अपर लोक अभियोजक विनोद कुमार गोचर ने बताया कि भोपाल निवासी फ रियादी जुगलकिशोर मीणा ने असनावर थाने में रिपोर्ट दर्ज करवाई थी। रिपोर्ट में उसने बताया कि उसका बड़ा भाई कमल किशोर तथा मछली ठेकेदार मुख्तियार मलिक कालीसिंध और भीमसागर डेम पर मछली पकडऩे और चौकीदारी का काम करते थे। दो जून 2022 की रात मुख्तियार मलिक, कमल किशोर और अन्य नाव में बैठकर भीमसागर डेम क्षेत्र में चौकीदारी के लिए गए थे। देर रात करीब 1 से 2 बजे के बीच कांसखेड़ली गांव के पास नदी में घात लगाए बैठे अब्दुल बंटी, वसीम अहमद ,राजा गुर्जर और अन्य दस-बारह जनों ने उन पर अंधाधुंध फ ायरिंग कर दी। हमले में कमल किशोर की मौके पर ही मौत हो गई, जबकि मुख्तियार मलिक गंभीर घायल हो गया। बाद में उसका शव जंगल में बरामद हुआ। पूर्व में मछली के ठेके को लेकर मुख्तियार मलिक और अब्दुल बंटी में झगड़ा हुआ था। दोनों ने एक दूसरे को देख लेने की धमकी दी थी।
पुलिस ने मामला दर्जकर आरोपियों के खिलाफ न्यायालय में आरोप पत्र पेश किया।। अभियोजन पक्ष की ओर से अदालत में 44 गवाह और 94 दस्तावेज पेश किए गए। साक्ष्यों के आधार पर न्यायालय ने सभी आरोपियों को दोषी मानते हुए सजा सुनाई।
न्यायालय ने कांसखेड़ली निवासी अब्दुल बंटी, सेफू खां, वसीम अहमद ऊर्फ राजा, राजा गुर्जर, अब्दुल शफ ीक उर्फ नन्दू, अब्दुल कालू खां, अब्दुल रउफ, तनवीर, सलाम उर्फ घीसू, धांसू खान, शौकत और लियाकत को हत्या का दोषी माना और आजीवन कारावास की सजा सुनाई। एक अन्य आरोपी मोहम्मद शफ ीक उर्फ वजीर को शस्त्र अधिनियम के तहत सात साल के साधारण कारावास की सजा सुनाई गई।
जून 2022 में भीमसागर बांध का कैचमेंट क्षेत्र मछली ठेकेदारों की गैंगवार का अखाड़ा बन गया था। वर्चस्व की इस लड़ाई में दो गुट आमने-सामने हो गए और विवाद ने खूनी संघर्ष का रूप ले लिया। इस संघर्ष में गैंगस्टर मुिख्तयार मलिक गंभीर रूप से घायल हो गया था। घटना के बाद वह लापता हो गया और तीन दिन तक जंगल में घायल तड़पता रहा। बाद में उसे खोजकर गंभीर हालत में असनावर अस्पताल लाया गया, जहां हालत नाजुक होने पर डॉक्टरों ने उसे झालावाड़ रैफर कर दिया, लेकिन रास्ते में ही उसकी मौत हो गई।
घटना कांसखेड़ली गांव के पास उजाड़ नदी के कैचमेंट क्षेत्र में रात करीब दो बजे हुई थी। उस समय मुिख्तार मलिक अपने साथियों के साथ नाव से पेट्रोलिंग कर रहा था। इसी दौरान उसकी भिड़ंत अब्दुल बंटी गैंग से हो गई और दोनों गुटों के बीच विवाद बढ़ते-बढ़ते हिंसक झड़प में बदल गई।
बताया जाता है कि पहले फायरिंग हुई, जिसके जवाब में दूसरे गुट ने नाव पर पथराव कर दिया। इस अफरा-तफरी में नाव असंतुलित होकर पलट गई। इस घटना में कमलेश की मौके पर ही मौत हो गई, जबकि मुिख्तार मलिक और उसका साथी विक्की लापता हो गए।
घटना के बाद पुलिस ने बांध, नदी और आसपास के जंगलों में लगातार सर्च ऑपरेशन चलाया। काफी तलाश के बाद मुिख्तार मलिक जंगल में गंभीर अवस्था में मिला, लेकिन तब तक उसकी हालत बेहद बिगड़ चुकी थी, बाद में रास्ते में ही उसकी मौत हो गई।
Updated on:
28 Apr 2026, 8:25 PM IST
Published on:
28 Apr 2026, 8:24 PM IST
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