
- लाखों रुपए खर्च करने के बाद भी दो साल से शोपीस बनी हुई है टंकी
झालावाड़. जल बिना जीवन अधूरा है। इसी सोच के साथ सरकार ने जल जीवन मिशन योजना की शुरुआत कर हर घर को पानी देने का वादा किया था। लेकिन राजस्थान के झालावाड़ जिले में हर घर जल का सपना धरातल पर दम तोड़ता नजर आ रहा है। केंद्र सरकार की महत्वाकांक्षी जल जीवन मिशन योजना, जिसका लक्ष्य 2024 तक हर ग्रामीण परिवार को नल से जल पहुंचाना था। राजस्थान के कई जिलों में भ्रष्टाचार और तकनीकी खामियों की भेंट चढ़ गई है। झालावाड़ जिले में भी योजना के तहत गांवों में पाइपलाइनें तो बिछी, लेकिन नलों से पानी की एक बूंद तक नहीं टपकी। ग्रामीण आज भी मीलों दूर से पानी लाने को मजबूर हैं। ऐसा ही मामला झालावाड़ जिला मुख्यालय से महज आठ किलो मीटर दूर दुर्गपुरा ग्राम पंचायत के कोटडा गांव का है। जहां दो साल से पानी की टंकी शो पीस बनी हुई है। भीषण गर्मी में ग्रामीण दो-तीन किलोमीटर दूर से पानी लाने को मजबूर है। ग्रामीण एक कुएं से पानी लाते हैं, लेकिन उसमें भी गंदा पानी है, तीन-तीन बार पानी छान कर लाना मजबूरी बना हुआ है। ग्रामीण इसके लिए सूतीकपड़ा साथ लेकर जाते हैं, जब पानी पीने लायक होता है।
जिला मुख्यालय के निकट कोटडा गांव में पानी की लाइन भी बिछाई गई है,पानी की टंकी भी बना दी गई है, लेकिन पाइप लाइन का अधूरा छोड़ दिया, टंकी का कनेक्शन लाइन से नहीं किया। दो साल से काम अधूरा ही पड़ा हुआ है। कई बार ग्रामीण अधिकारियों को समस्या से अवगत करवा चुके हैं, लेकिन जलदाय विभाग के जिम्मेदारों के कानों पर जूं तक नहीं रेंग रही है। ऐसे में भीषण गर्मी में ग्रामीणों को हलक तर करने के लिए कई तरह के जतन करने पड़ रहे हैं।
दुर्गपुरा ग्राम पंचायत के कोटडा गांव में एक ही कुआ है, जिससे पूरे गांव के लोग पानी भरते हैं, ग्रामीणों का कहना है कि इस कुंए में गंदा पानी है, लेकिन पानी का ओर कोई साधन नहीं होने से गंदा पानी पी रहे हैं। महिलाएं रसिस्यों के सहारे कुएं से पानी खींचने को मजबूर है। यहां चार-पांच हैंडपंप है, लेकिन वो भी सूख चुके हैं, फिर भी जलदाय विभाग ने टेंकर आदि की कोई सुविधा नहीं करवाई है।
गांव में पेयजल समस्या के साथ ही खराब सड़क लोगों के लिए परेशानी का सबब बनी हुई है। महिलाओं ने बताया कि सड़क के रास्ते सिर पर पानी की मटकियां भरकर ले जाने में परेशानी आती है। सड़क मार्ग से दूरी ज्यादा होने के कारण महिलाएं पहाड़ी रास्ते से गांव में पानी ले जाने को मजबूर है। कई बार पानी ले जाते समय महिलाएं पहाड़ी रास्ते पर पैर फिसलने से मटकी सहित गिरने से चोटिल भी हो गई।
ग्रामीणों ने बताया कि पानी की किल्लत के बारे में सरपंच व प्रतिनिधी से कई बार शिकायत की। इस पर पंचायत की ओर से कुएं में मोटर डाली गई, जो काफी समय से खराब पड़ी है। पहले मोटर चलने से गांव के लोगों को पीने का पानी मिल जाता था, लेकिन मोटर खराब होने से लोगों को कुएं से पानी ले जाने को मजबूर होना पड़ रहा है।
अप्रेल की भीषण गर्मी में महिलाओं को तेज धूप में कुएं से पानी लाने को मजबूर होना पड़ रहा है। गांव में पानी की टंकी से अब तक पेयजल सप्लाई नहीं होने से महिलाओं और बुजुर्गों को परेशानी का सामना करना पड़ता है। गांव की ज्यादातर महिलाएं मजदूरी के लिए प्रतिदिन शहर में जाती है। छोटे बच्चों वाली माताओं को ज्यादा परेशानी आ रही है।
दुलीचन्द बंजारा कोटडा
गांव में कई घरों में शादियां है, ऐसे में गांव में मेहमान आए हुए है। पानी की किल्लत के कारण मेहमानों को भी परेशानियों का सामना करना पड़ रहा है। कुएं से एक दिन पहले लाए पानी में कीड़ेपड़ जाते है और पानी में बदबू आती है। ऐसा पानी मेहमानों को पिलाने में शर्म आ रही है।
लीलाबाई निवास कोटडा
कुएं में पंचायत की ओर से पानी को शुद्ध करने के लिए किसी भी तरह की दवा नहीं डलवाई गई। ऐसे में गांव के लोगों को पानी बार-बार छानकर पीना पड़ रहा है। यहां असामाजिक तत्व भी शराब की बोतलें कुएं के अन्दर डाल देते है, इससे कुएं का पानी का पानी दूषित हो रहा है। लेकिन और कोई उपाय नहीं है। इसलिए गंदा पानी पी रहे हें।
बदामबाई और कैलाशीबाई कोटडा।
गांव में पीने के पानी की समस्या है। इंसानों के साथ ही मवेशियों को भी पीने का पानी नहीं मिल रहा है। मवेशियों के लिए ग्राम पंचायत की ओर से पानी की खेल आदि नहीं बनाई गई है, ऐसे में बेजूबान पानी इंसानों के साथ पानी को तरस रहे हैं।
मांगीलाल और अमरलाल कोटडा।
कोटडा गांव में पानी की समस्या है, इसके लिए जलदाय विभाग को लिखकर दे रखा है। एक कुएं में पानी की मोटर डलवा रखी है, लेकिन कुएं में पानी नहीं है। वन विभाग लाइन नहीं डलवाने दे रहा है
लीलाबाई पाटीदार, प्रशासक ग्राम पंचायत दुर्गपुरा।
Updated on:
25 Apr 2026 08:34 pm
Published on:
25 Apr 2026 08:33 pm
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