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झालवाड़ के सरकारी स्कूलों में मरम्मत का बड़ा खेल, लीपापोती में खर्च हुए 9.11 करोड़ रुपए

जिले के कई स्कूलों में हो रहे कामों में इन दिनों काफी लापरवाही सामने आ रही है। इसकी जांच समसा के अ​धिकारी व सार्वजनिक निर्माण विभाग के अ​धिकारी भी कर रहे हैं। जिसमें सामने आया है कि करीब 130 स्कूलों में लीपापोती की गई है।
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झालावाड़

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Hari Singh Gujar

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Updated: 12 Jun 2026, 12:53 PM IST

जिले के कई स्कूलों में हो रहे कामों में इन दिनों काफी लापरवाही सामने आ रही है। इसकी जांच समसा के अ​धिकारी व सार्वजनिक निर्माण विभाग के अ​धिकारी भी कर रहे हैं। जिसमें सामने आया है कि करीब 130 स्कूलों में लीपापोती की गई है।

पिड़ावा ब्लॉक के एक स्कूल में काम करते मजदूर

झालावाड़ जिले में पिछले साल जुलाई में हुए पिपलोदी स्कूल हादसे के बाद भी सरकारी स्कूल भवनों की सुरक्षा और मरम्मत कार्यों में लापरवाही बरती जा रही । स्कूलों में मरम्मत के नाम पर करोड़ों रुपए खर्च किए गए, लेकिन कई जगह काम की गुणवत्ता सवालों के घेरे में है। जिले के 463 स्कूलों में मरम्मत के लिए राज्य आपदा राहत कोष (एसडीआरएफ) से 9.11 करोड़ रुपए स्वीकृत किए गए थे, लेकिन जांच में सामने आया है कि कई स्कूलों में स्वीकृत राशि के अनुरूप काम नहीं हुआ।

स्कूलों में छत, दीवार, फर्श, कॉपिंग, पाइप लाइन, प्लास्टर, वॉटरप्रूफिंग सहित 11 तरह के कार्य होने थे। इसके लिए प्रत्येक स्कूल को करीब दो लाख रुपए तक की राशि दी गई थी। आरोप है कि कई स्कूलों में केवल 25 से 40 हजार रुपए तक की मामूली मरम्मत कर दी गई, जबकि बिल पूरी राशि के आसपास पास कर दिए गए।

वॉटरप्रूफिंग के नाम पर कूल रूफ पेंट

मरम्मत कार्यों के लिए जारी जी-शेड्यूल में वॉटरप्रूफिंग सहित कई कार्य निर्धारित थे। नियमानुसार वॉटरप्रूफिंग के लिए 65 रुपए प्रति वर्ग फीट तक की दर तय थी। लेकिन कई स्कूलों में वास्तविक कार्य की जगह सिर्फ खानापूर्ति किए जाने की शिकायतें हैं। जांच में सामने आया कि कई स्थानों पर वॉटरप्रूफिंग सामग्री की जगह कूल रूफ पेंट का उपयोग किया गया। वॉटरप्रूफिंग सामग्री की एक बाल्टी जहां करीब 3150 रुपए की आती है, वहीं कूल रूफ पेंट 300 से 600 रुपए में उपलब्ध है।

कई स्कूलों में केवल तीन से सात बाल्टियों तक सामग्री उपयोग किए जाने की बात सामने आई है। इससे अनुमान लगाया जा रहा है कि वास्तविक खर्च 20 से 40 हजार रुपए के बीच ही रहा, जबकि बिल इससे कई गुना अधिक लगाए गए।

130 स्कूलों में गड़बड़ी मिली

जिले के 130 स्कूलों से शिकायतें मिली हैं कि जितनी राशि के बिल प्रस्तुत किए गए, उतना काम मौके पर नहीं हुआ। अभी तक 316 स्कूलों में कार्य पूर्ण होने का दावा किया गया है, जबकि 129 स्कूलों में काम अधूरा पड़ा है। इनमें से कई जगह घटिया निर्माण की शिकायतें भी सामने आई हैं।

मॉनिटरिंग पर भी उठे सवाल

जिले के आठ ब्लॉक के 463 स्कूलों में मरम्मत कार्य चल रहे हैं। इसके अलावा अन्य योजनाओं के काम भी जारी हैं, लेकिन समसा में केवल एक कनिष्ठ अभियंता होने और वह भी संविदा पर होने के कारण सभी कार्यों की प्रभावी निगरानी नहीं हो पा रही है। इसका असर गुणवत्ता पर पड़ रहा है।

ब्लॉकवार स्कूलों में अधूरे कार्य

अकलेरा-10
बकानी-15
भवानीमंडी-23
डग-3
झालरापाटन-13
खानपुर-25
मनोहरथाना-21
सुनेल-19

“सभी ब्लॉक से विद्यालयों की सूची मांगी गई है, जहां कार्य संतोषजनक नहीं है वहां ठेकेदार से काम पूरा करवाया जाएगा। फिलहाल भुगतान रोकने की कार्रवाई करेंगे। अनियमितता मिलने पर फर्म को ब्लैक लिस्ट करने की कार्रवाई की जाएगी।

कल्याणमल वर्मा, एडीपीसी, समसा, झालावाड़

“पीडब्ल्यूडी के माध्यम से स्कूलों में जांच करवाई जा रही है। जहां घटिया कार्य मिला है वहां दोबारा काम करवाया जा रहा है। संस्थाप्रधानों और सीबीईओ को भी जांच के निर्देश दिए गए हैं।

प्रमोद नागर, कनिष्ठ अभियंता, समसा, झालावाड़

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