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बजट रीता तो मंद पड़ गई काम की गति

परवन परियोजना : निर्माण पर सौ करोड़ व मुआवजे पर २२ सौ करोड़ खर्च

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Budget raita slow down speed

बजट रीता तो मंद पड़ गई काम की गति

झालावाड़. झालावाड़, बारां व कोटा जिले की महत्वाकांक्षी परवन वृह्द सिंचाई परियोजना के काम की गति बजट समाप्त होने से धीमी पड़ गई है।
७ हजार ३५५ करोड़ रुपए की इस परियोजना के लिए प्रदेश सरकार ने वर्ष २००८ के बाद से अब तक २ हजार २१३ करोड़ उपलब्ध कराए हैं। इनमें २१०० करोड़ रुपए की राशि तो डूब क्षेत्र के किसानों को जमीन व मकानों का मुआवजा दिए जाने में खर्च हो गई। ऐसे में परियोजना स्थल पर बांध व टनल के निर्माण में करीब १०० करोड़ रुपए ही खर्च किए जा सके हैं।
बजट का टोटा होने से संवेदक कम्पनी ने भी बांध व टनल के निर्माण कार्य की गति धीमी कर दी है। परियोजना से जुड़े अधिकारियों का कहना है कि बजट की अनुपलब्धता से ऐसे हालात बनना स्वाभाविक है। अब बजट मिलने के बाद ही काम को गति मिलेगी।
विभागीय सूत्रों का कहना है कि वैसे तो इसके लिए अब आगामी बजट में वित्तीय प्रावधान होंगे, लेकिन यदि सरकार चाहे तो बजट से पहले भी राशि उपलब्ध करा सकती है। इससे काम को गति मिल सकती है। बांध व टनल का निर्माण हिन्दुस्तान कंस्ट्रक्शन कम्पनी मुम्बई करा रही है।
मंजूर नहीं हुई नहरों की डिजाइन
इस परियोजना के तहत दाईं व बाईं मुख्य नहरों का निर्माण होना है। दाईं मुख्य नहर की कुल लम्बाई ९२ किलोमीटर की होगी। इससे बारां जिले की चार तहसीलों की करीब ढाई लाख हैक्टेयर भूमि सिंचित होगी। इसका निर्माण हैदराबाद की जीपीवीआर कम्पनी के जिम्मे है। इस पर २२ सौ करोड़ रुपए खर्च होंगे। वहीं झालावाड़ व कोटा जिले में जाने वाली बाईं मुख्य नहर की कुल लम्बाई ४५ किलोमीटर है। इस पर ७८० करोड़ रुपए व्यय होंगे। इसका निर्माण मेघा कंस्ट्रक्शन कंपनी कर रही है। दोनों ही निर्माण कम्पनियों को इनकी वितरिकाओं का निर्माण भी कराना है। इन कम्पनियों ने नहरों व वितरिकाओं के निर्माण की डिजाइन व ले आउट तैयार कर लिए हैं,। अभी जल संसाधन विभाग के मुख्य अभियंता कार्यालय से मंजूरी नहीं मिली है।
मिलने हैं ५१४२ करोड़
निविदा शर्तों के मुताबिक परियोजना का निर्माण मई २०२१ में पूरा किया जाना प्रस्तावित है, लेकिन बजट के अभाव व अन्य विघ्न के कारण यह तिथि आगे भी बढ़ सकती है। इसमें व्यवधान नई बात भी नहीं है। ऐसे में परियोजना से लाभान्वित किसानों की आस फिर से लम्बी हो सकती है। ज्ञातव्य है कि उक्त परियाजना से बारां, कोटा व झालावाड़ जिलों की ३ लाख ३० हजार हैक्टेयर से अधिक कृषि भूमि सिंचित होने के साथ ही १८२० गांवों को पेयजल भी उपलब्ध हो सकेगा। गांवों की पेयजल समस्या खत्म होगी। इस परियोजना के लिए पहली बार वर्ष २००६ में सर्वे हुआ था, लेकिन काम वर्ष २०१८ में शुरू हो सका।
खुदाई में निकले पत्थरों से बना रहे गिट्टी
सोजपुर. परवन बांध परियोजना में कंडीशन ब्लॉकंेज कंक्रीट के सहारे भराव क्षमता वाले छोर पर गैलरी का निर्माण इन दिनों चल रहा है। इसका निर्माण सीपेज का पानी रोकने के लिए किया जा रहा है। यह बांध स्थल से पहले पानी के दबाव को कम करेगी। इसके बनाने से भराव क्षमता वाले पानी का दबाव सीधे तौर पर गेटों पर नहीं पड़ता है। बांध स्थल पर कंक्रीट का कार्य भी बांध स्थल की नींव खुदाई के दौरान निकले चट्टानों के टुकड़ों से हो रहा है। मशीनों में पीसकर बांध स्थल पर गिट्टी बनाने का कार्य भी कंपनी कर रही है। परवन बांध स्थल पर नदी के बीच मे मशीनों की आवाजाही के लिए सर्पीले आकार में अलग अलग मार्ग तैयार कर रखे हैं। जिससे एक दूसरे वाहनो के लिए अड़चन व जाम जैसी स्थिति पैदा न हो। यहां मलबे को खोदकर कंक्रीट तैयार करने के लिए डंपरों की आवाजाही लगी रहती है।

यह सही है कि सरकार की ओर से परियोजना के लिए उपलब्ध कराया गया बजट समाप्त हो गया है। करीब दो माह से राशि नहीं मिली, लेकिन बांध व टनल का काम हो रहा है। आगामी दिनों में राज्य के बजट में राशि का प्रावधान होने के बाद अप्रेल माह से आर्थिक तंगी नहीं रहेगी। परियोजना का कार्य तय समय पर पूरा होने की उम्मीद है।
अजय त्यागी, अधीक्षण अभियंता, परवन वृह्द सिंचाई परियोजना जल संसाधन विभाग झालावाड़


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