पहाड़ी पर मंदिर तक रास्ता बनाने के लिए ली पेड़ों की बलि
झालावाड़. वन विभाग की असनावर रेंज में रातादेवी मंदिर के सामने पहाड़ी पर धोकड़े के सैकड़ों को काटने का ठेका पहाड़ी पर िस्थत मंदिर के पुजारी ने 35 हजार में कुछ ग्रामीणों को दिया था। वन विभाग ने तो इतनी आंखे मूंद ली है कि उन पेड़ों की लकडि़यां तक जब्त नहीं कर सका। पुजारी व ग्रामीणों ने लकडि़याें को भी अपने स्तर पर ही खुदबुर्द कर दिया। यह खुलासा लावासल ग्राम पंचायत के एक जनप्रतिनिधि ने ही किया है।
जब इस मामले को लेकर चर्चा की तो ग्रामीणों व जनप्रतिनिधि ने बताया कि यह सारा काम पहाड़ी पर िस्थत मंदिर व रातादेवी से घांसखेड़ी आने जाने के लिए ग्रेवल रोड बनाने के लिए किया है। यह रोड पहाड़ी के दोनों तरफ करीब 5 से 6 किलोमीटर तक बनाया जा रहा है। विश्वस्त सूत्रों ने बताया कि यहां करीब दो महीने तक काम चला। इस दौरान जेसीबी से मिट्टी खोदी और ट्रैक्टर-ट्रॉलियों से मिट्टी डाली। इनमें से कई ट्रैक्टर मालिक तो आज तक किराया मांग रहे हैं।
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हालांकि उस समय असनावर रेंजर व उनकी टीम यहां पहुंची थी लेकिन वे लावासल सरपंच से लिखित में लेकर चले गए। उन्होंने पहाड़ी तक जाने की जहमत तक नहीं उठाई। अगर उस समय टीम वहां जाती तो सारा मामला सामने आ जाता। लावासल सरपंच का कहना है कि पंचायत की ओर से मस्टरोल चलाई थी लेकिन वो घांसखेड़ली में तलाई पर चली थी। ग्रेवल रोड से हमारा कोई लेना देना नहीं है।
प्राचीन कुआं भी जमींदोज
रातादेवी के सामने पहाड़ी पर महुए के पेड़ के नीचे एक प्राचीन कुआं भी था। लोगों ने बताया कि इस कुएं में पर्याप्त पानी रहता था। इस पर मुंडेर नहीं होने से वन्यजीव भी पानी पीते थे लेकिन इस कुएं को भी ग्रेवल रोड के साथ ही जमींदोज कर दिया गया।
असनावर रेंज में ग्रेवल रोड बनाने का मामला ध्यान में आया है। ये नया नहीं है, अप्रेल में ही बन गया था, इसके लिए जांच करने के लिए कहा है। कितने पेड़ काटे गए है, किसने काटे, किसके कहने पर काटे इस बारे में अभी जांच होगी। असनावर रेंजर को निर्देश दिए हैं। जैसे ही जांच आएगी, इसमें एफआईआर की कार्रवाई करेंगे। इसमें ये भी देखा जाएगा कि वन विभाग को कितना नुकसान हुआ है, उसकी भरपाई कैसे होगी।
वी चेतन कुमार, उप वन संरक्षक झालावाड़