झालावाड़.जिले में पिछले साल की तरह इस साल भी बच्चों को जर्जर स्कूल भवनों में बैठकर पढ़ाई करनी पड़ेगाी। पिछले साल की गलतियों से न अधिकारियों ने कोई सबक लिया न जनप्रतिनिधियों ने। शिक्षा पर सरकारें करोड़ों रुपए खर्च करती है पर आज भी स्कूलों में सुविधाए नहीं पहुंच पाई है। शिक्षण सत्र के साथ ही झालावाड़ जिले में जोरदार बारिश का दौर जारी है। ऐसे में कहीं कोई हादसा नहीं हो जाए, ऐसे में शिक्षा विभाग के अधिकारियों व उच्चाधिकारियों को सजग होकर काम करने की जरुरत है। जिले में 41 स्कूल ऐसे है जो लंबे समय से मरम्मत मांग रहे हैं। लेकिन उनमें बजट के अभाव में कोई काम नहीं हो पाया है। वहीं सात स्कूल ऐसे है जो जर्जर अवस्था में है, उन्हे गिराकर नए भवन बनाने की सख्त जरुरत है।
विभाग के पास मरम्मत के लिए फंड नहीं-
नया शिक्षण सत्र शुरू हो गया है। लेकिन गत साल की तरह इस साल भी जिले के लगभग 50 स्कूलों की जर्जर छतों के नीचे पढऩे वाले बच्चों की कॉपी किताबों पर बारिश का पानी गिरेगा। बीते साल से इन छतों की मरम्मत के लिए भेजे प्रस्तावों पर ध्यान नहीं दिया गया है। जिसके कारण इस साल भी पढऩे वाले बच्चों को भारी दिक्कतों का सामना करना पड़ेगा।
शिक्षा विभाग ने भेजी स्कूलों की सूची-
जिले के 50 से अधिक प्राथमिक व उच्च प्राथमिक स्कूल भवन मरम्मत मांग रहे है। जिसमें से आधे ऐसे है जो छत व अन्य काम मांग रहे हैं। तो कई स्कूल ऐसे हैं जिसका भवन कंडम हो गया है। ऐसे स्कूलों की मरम्मत नितांत जरुरी है। जिले के 40 स्कूल तो ऐसे हैं जहां बारिश के दिनों में सबसे ज्यादा परेशानी होती है। इन स्कूलों की छत ही कमजोर है। बारिश के दिनों में छत से पानी रिसता है। सीपेज के कारण पानी कक्षा में गिरता है। शिक्षा विभाग ने इन स्कूलों की सूची मरम्मत के लिए सरकार को भेजी है। लेकिन अभी तक बजट नहीं आने से छात्रों को बारिश में परेशानी उठानी होगी।
खतरे में पढ़ाई की मजबूरी-
कई स्कूलों में जर्जर छत व दीवारें होने से छात्रों को खतरे के नीचे बैठ कर पढ़ाई करने की मजबूरी है, कई जगह दीवारें भी दरकने लगी। स्कूलों की मरम्मत की मांग संबंधित ग्राम के ग्रामीण व शाला प्रबंधन समिति भी कर चुकी है। इनकी मांगो पर कोई ध्यान नहीं दिया गया। हालांकि कुछ स्थानों पर जनप्रतिनिधि रूचि दिखा रहे हैं, वहां बजट आने की उम्मीद है।
सबसे ज्यादा खराब स्कूल अकलेरा ब्लॉक में-
जिले में सबसे ज्यादा जर्जर स्कूल भवन जिले के अकलेरा ब्लॉक में है। इस ब्लॉक के 10 से ज्यादा स्कूल ऐसे है जिसका भवन जर्जर है या फिर स्कूल भवन मरम्मत मांग रहा है। इनकी जानकारी पिछले साल दी गई थी, लेकिन सरकार ने अभी तक इस ओर ध्यान नहीं दिया। जबकि कई स्कूल तो 1961 में बने हुए है, तो कुछ 1980 से लेकर 90 के बीच में बने हुए है। ऐसे में समय रहते इनकी मरम्मत
संस्कृत शिक्षा में भवन की दरकार-
जिले में अकलेरा ब्लॉक में संस्कृत विभाग के प्राथमिक स्कूल थरोल व असनावर ब्लॉक के प्राथमिक स्कूल असनावर मेें भी भवन की दरकार हैं। ऐसे में इनके लिए भी बजट मिलें तो भवन बने।
फैक्ट फाइल-
ब्लॉक मरम्मत योग्य स्कूलों संख्या
अकलेरा 10
बकानी 3
भवानीमंडी 7
डग 4
झालरापाटन 4
खानपुर 03
मनोहरथाना 05
सुनेल 05
जिले के जर्जर स्कूल
ब्लॉक स्कूल
खानपुर- यूपीएस लड़ानिया, पीएस खटावदा
झालरापाटन- यूपीएस जगन्नाथपुरी
मनोहरथाना- पीएस बिशनखेडी, पीएस पिपलखेडी
अकलेरा- यूपीएस लक्ष्मीपुरा
बकानी- प्राथमिक स्कूल चारडूंगरी
बजट आते ही काम करेंगे-
जिले में मरम्मत योग्य व जर्जर स्कूलों की सूची बनाकर विभाग को बजट के लिए भेज रखी है। जैसे ही शिक्षा परिषद से बजट आएगा उनकी मरम्मत करवाई जाएगी। जो भवन बिलकुल ही जर्जर है उनमें बच्चों को नहीं बिठाया जाएगा।उनके लिए वैकल्पिक व्यवस्था करेंगे।
सीताराम मीणा, एडीपीसी, समसा, झालावाड़।