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लुप्त होते गिद्धों को हाड़ौती के पहाड़ों में संरक्षण

गिद्ध कराई और पृथ्वीपुरा के पास कॉलोनियों में बड़ी संख्या में नजर आए

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लुप्त होते गिद्धों को हाड़ौती के पहाड़ों में संरक्षण

लुप्त होते गिद्धों को हाड़ौती के पहाड़ों में संरक्षण

झालावाड़। जहां एक तरफ देश में गिद्धों की प्रजाति लुप्त होती जा रही है, वहीं दूसरी ओर हाड़ौती की पहाडिय़ों में इनकी आबादी तेजी से बढ़ रही है। मौसम की अनुकूलता और मानवीय दखल की कमी के चलते इन्हें यहां बेहतर पर्यावास मिल रहा है। वर्तमान में झालावाड़ में गिद्ध कराई और पृथ्वीपुरा के पास दयाभाव स्थान पर गिद्धों की बड़ी संख्या में कॉलोनियां बनी हुई है। इसके अलावा बूंदी जिले में भीमलत, कोटा में मुकुंदरा, गेपरनाथ, गरडिय़ा और चम्बल के आसपास के क्षेत्रों में बड़ी संख्या में गिद्धों की उपस्थिति बनी हुई है। अकेले झालावाड़ में ही इन दो स्थानों पर करीब 350 से 400 गिद्ध रह रहे हैं। हाड़ौती में इनकी संख्या एक हजार से अधिक बताई जाती है। अब सरकार और वन विभाग की ओर से इन्हें संरक्षण देने की जरूरत हैं।
चार तरह की प्रजाति
झालावाड़ सहित पूरे हाड़ौती में गिद्धों की चार तरह की प्रजाति देखी गई है। इसमें सर्वाधिक लॉग बिल्ड वल्चर, इजिप्शियन वल्चर, ग्रीफ ोन वल्चर व सिनेरियस वल्चर भी देखा जाता है।
प्राकृतिक आवास नष्ट
गिद्धों का प्राकृतिक आवास पहाड़ों की कराई होती है। गिद्ध वहां अपने घोंसले बनाते हैं। जैसे-जैसे पहाड़ों का खनन होता जा रहा है, वैसे-वैसे इनके प्राकृतिक आवास भी खत्म होते जा रहे हैं। गिद्धों की आबादी कम होने का बड़ा कारण यही माना जा रहा है। इसके अलावा पशुओं को पेन किलर के रूप में दी जाने वाली दवा भी गिद्धों के लिए हानिकारक होने से इनकी संख्या में कमी आई है।
एक्सपर्ट व्यू
चम्बल के आसपास हाड़ौती में गिद्धों की अच्छी संख्या में उपस्थिति है। यह शिड्यूल एक का पक्षी है। हालांकि राजस्थान में इनके संरक्षण को लेकर सरकार व वन विभाग की कोई योजना नहीं है, जबकि इन्हें संरक्षण देने की सख्त जरूरत है। अन्य राज्यों में इनके संरक्षण के प्रयास किए जा रहे हैं। राजस्थान में भी इसकी पहल होनी चाहिए। दूसरी बात यह है कि किसी भी प्रजाति का संरक्षण परम्परागत तरीकों और स्थानीय लोगों को साथ लेकर करना जरूरी है। मौजूदा संसाधनों को दुरूस्त करने की जरूरत है। हाड़ौती में इनकी स्थिति अच्छी है।- अनिल कुमार छंगानी, विभागाध्यक्ष पर्यावरण विज्ञान विभाग और शोध निदेशक, एमजीएस विश्वविद्यालय बीकानेर