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दुविधा: राजकीय विद्यालयों के पास न बजट और न परिसर कहां लगाएंगे 22 लाख पौधे

- शिक्षा विभाग को नामांकन के हिसाब से 22 लाख पौधे लगाने है

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हरि सिंह गुर्जर

झालावाड़.शिक्षण सत्र की शुरूआत के डेढ़ माह से राजकीय और गैर राजकीय विद्यालयों में पढ़ाई व्यवस्था चौपट है। प्रकृति के शृंगार के लिए प्रदेश सरकार ने बिना सोचे-विचारे पौधरोपण के लक्ष्य संस्थाप्रधान के कांधों पर थोप दिए हैं। अब संस्थाप्रधान इस पशोपेश में है कि एक तरफ तो लक्ष्य अनुरुप जमीन की उपलब्ध नहीं है। वहीं, दूसरी तरफ विद्यालयों के खातों में बजट भी नहीं है। ऐसे में इतनी बड़ी संख्या में पौधे हवा में लगाए या कहां लगाए यह सवाल खड़े हो गए हैं। अकेले झालावाड़ के शिक्षा विभाग को ही विद्यार्थियों के नामांकन के हिसाब से 22 लाख पौधों का लक्ष्य दिया है।

सरकार ने बढ़ाए लक्ष्य-

प्रदेश सरकार की ओर से मुख्यमंत्री हरियालो राजस्थान एवं 'एक पेड़ मां के नाम' अभियान के तहत प्रदेश सरकार के निर्देश पर शिक्षा विभागीय अधिकारियों ने मई माह में ही झालावाड़ को 10 लाख पौधरोपण के लक्ष्य बिना सोचे-विचारे थोप थे। बिना संसाधनों एवं बजट के अभाव में ये लक्ष्य पूरे ही नहीं हो पाए हैं और शिक्षा विभाग के अधिकारियों ने शासन सचिव की अध्यक्षता में हुई वीसी के बाद लक्ष्य बढ़ाकर सीधे 22लाख कर दिए हैं। जबकि, गत सत्र में सरकार के निर्देशों पर विद्यालयों ने अपने की जेब की राशि खर्च कर जैसे-तैसे लक्ष्य प्राप्त किए थे। इस बार फिर मिले लक्ष्यों ने शिक्षकों के माथे पर चिंता की लकीरें बढ़ा दी हैं।

इतना है लक्ष्य

राजकीय विद्यालय कक्षा 1 से 8 तक : 10 पौधे प्रति विद्यार्थी

कक्षा 9 से 12 तक: 15 पौधे प्रति विद्यार्थी

प्रत्येक कार्मिक: 15 पौधे

निजी विद्यालय कक्षा एक से 8 : 1 पौधा प्रति विद्यार्थी

कक्षा 9 से 12: 5-5 पौधे प्रति विद्यार्थी

प्रत्येक कार्मिक: 15 पौधे

झालावाड़ का लक्ष्य 22 लाख -

झालावाड़ जिले की बात करें, तो यहां सरकारी स्कूलों में शाला दर्पण के आंकड़ों के अनुसार कक्षा 1 से 8 तक करीब एक लाख 12 हजार विद्यार्थी एवं कक्षा 9 से 12 तक करीब 63 हजार विद्यार्थी अध्ययनरत हैं। वहीं, दूसरी ओर 10 हजार शिक्षक कार्यरत हैं। ऐसे में प्रति विद्यार्थी आवंटित पौधों के अनुसार कक्षा 1 से 8 तक 11 लाख 24 हजार एवं कक्षा 9 से 12 तक 9 लाख 57 हजार तथा प्रति शिक्षक आवंटित लक्ष्य अनुसार 1 लाख 50 हजार कुल 22 लाख 31 हजार 790 पौधे लगाए जाएंगे। निजी विद्यालयों को भी जोड़ दें, तो ये आंकड़ा 25 लाख से भी ज्यादा हो जाएगा।

ये आ रही हैं परेशानियां -

राजकीय विद्यालयों के पास पर्याप्त भूमि का अभाव जहां भूमि है वहां पर परकोटा,बाड़बंदी एवं तारबंदी का अभाव
- निर्धारित मापदंड के खड्डे खोदने के लिए मानवीय संसाधन व बजट की कमी

- नर्सरी से प्रति पौधा 30-40 रुपए में क्रय करने के लिए विभागीय बजट का अभाव

-दुर्गम ग्रामीण क्षेत्रों में मोबाइल नेटवर्क के अभाव के चलते पौधरोपण का जियो टैग करने में शिक्षकों को परेशानी

अभी तक 3 लाख का ही जियोटेग-

जिलेभर के स्कूलों में लगाए गए पौधों में अभी तक 3 लाख पौधों का ही जियोटेग हो पाया है।ऐसे में इससे अंदाजा लगाया जा सकता है। कि जिले में कितने पौधे लगाए गए होंगे। वहीं शिक्षा अधिकारी जिले में 10-11 लाख पौधे लगाए जाने का दावा कर रहे हैं।

शिक्षक संगठन का कहना है…

. राजस्थान शिक्षक संगठनों ने भी सरकार को पत्र भेजकर लक्ष्य को अव्यहारिक बताया है। संगठनों के पदाधिकारियों का कहना है कि पौधरोपण पर्यावरण संरक्षण के लिए जितना जरूरी है। पर, लक्ष्यों को व्यावहारिक बनाने की जरूरत है। विद्यालयों के पास बजट नहीं है। वहीं, इतनी जमीन की उपलब्धता भी नहीं है। लक्ष्य अनुरुप खड्डे करवाने के लिए भी बजट नहीं है। विद्यालयों में पौधरोपण का कार्य मनरेगा के सहयोग से होना चाहिए।

निर्देश है-

शिक्षा मंत्री जी के निर्देश है, स्कूलों में पौधे लगाने हैं, हमने करीब 10-11 लाख पौधे लगाए है। कुछ स्कूलों में जहां जगह वहां लगाए,कहीं स्कूलों के बाहर लगाए।बच्चों को सीड बॉल के माध्यम से भी पौधे लगवा रहे हैं। जहंा स्कूलों में खेल मैदानों पर अतिक्रमण था, वहां पौधे लगाए गए है। खडढ़े नगर पालिकाओं के माध्यम से मनरेगा में खुदवाने हैं।

रामसिंह मीणा, सीडीईओ, झालावाड़।

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