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राजस्थान के एक जिले में बाल विवाह रोकने के लिए डीएम ने ऐसा आदेश जारी किया कि मच गया हड़कम्प

टेन्ट व्यवसायी, हलवाई, लाईट डेकोरेशन व्यवसायी, विवाह स्थल के मालिक अपने कार्यस्थल पर प्रदर्शित करेंगे कि बाल विवाह अपराध है एवं विवाह के लिए लड़की की आयु न्यूनतम 18 वर्ष तथा लड़के की आयु न्यूनतम 21 वर्ष होना अनिवार्य
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झालावाड़

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Ranjeet Singh Solanki

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Updated: 29 Apr 2022, 10:54 AM IST

राजस्थान के एक जिले में बाल विवाह रोकने के लिए डीएम ने ऐसा आदेश जारी किया कि मच गया हड़कम्प

राजस्थान के एक जिले में बाल विवाह रोकने के लिए डीएम ने ऐसा आदेश जारी किया कि मच गया हड़कम्प

झालावाड़ . जिले के विभिन्न अंचलों में अक्षय तृतीया एवं पीपल पूर्णिमा पर बड़ी संख्या मे बाल विवाहों के आयोजन की संभावना अत्यधिक रहती है जो कि बाल विवाह प्रतिषेध अधिनियम के प्रावधानों का स्पष्ट उल्लंघन है। अधिनियम के अनुसार विवाह योग्य लड़के की आयु 21 वर्ष एवं लड़की की आयु 18 वर्ष न्यूनतम होना अनिवार्य है।
जिला मजिस्ट्रेट भारती दीक्षित के आदेशानुसार 3 मई को अक्षय तृतीया एवं उसके पश्चात् 16 मई को पीपल पूर्णिमा एवं अन्य अवसरों पर होने वाले संभावित बाल विवाहों के रोकथाम तथा बाल विवाहों में उत्पन्न बालक बालिकाओं के स्वास्थ्य को होने वाले दुष्परिणामों की आशंका को रखते हुए सम्पूर्ण जिले में विवाह कार्यक्रम से संबंधित प्रिन्टिग प्रेस, लाईट डेकोरेशन एवं टेन्ट कार्य आदि पर पाबंदी लगाना आवश्यक है।
सूचना चस्पा करनी होगी
टेन्ट व्यवसायी, हलवाई, लाईट डेकोरेशन व्यवसायी, विवाह स्थल के मालिक इस आशय की सूचना अपने कार्यस्थल पर प्रदर्शित करेंगे कि बाल विवाह अपराध है एवं विवाह के लिए लड़की की आयु न्यूनतम 18 वर्ष तथा लड़के की आयु न्यूनतम 21 वर्ष होना अनिवार्य है।