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हादसों के बाद शवों को लेकर झालावाड़ भागो

मौत होने पर शव खुले में ही पड़े रहते

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हादसों के बाद शवों को लेकर झालावाड़ भागो

झालावाड़. जिले के 14 सामुदायिक स्वास्थ्य केन्द्रों में डीप फ्रीजर नहीं है। ऐसे में खुले में शवों को रखना मजबूरी बना हुआ है। रात को दुर्घटना या अन्य मामलों में मौत होने पर शव खुले में ही पड़े रहते हैं।

साथ मजबूरी में परिजनों को भी रात वहीं खुले में बितानी पड़ती है। या फिर शव लेकर जिला मुख्यालय पर आना पड़ता है। सूर्यास्त के बाद नियमों के मुताबिक पोस्टमार्टम कार्रवाई नहीं होने के कारण परिजनों को इसके लिए अगले दिन सुबह तक इंतजार करना पड़ता है। ऐसे शवों को रखने के लिए जिले की 14 सीएचसी पर डीप फ्रीजर जैसा कोई प्रबंध नहीं है। वहीं दिन में लाए गए शवों का भी खुले में पोस्टमार्टम होता है।
पुलिस के आंकड़ों के मुताबिक जिला मुख्यालय पर रोजाना करीब इस तरह के एक से दो मामले आते हैं। ऐसे में इन शवों को मेडिकल कॉलेज के डीप फ्रीजर में ही रखना पड़ता है।

अगर सीएचसी स्तर पर डीप फ्रीजर की सुविधा मिल जाए तो इन शवों को यहां नहीं लाना पड़े। चिकित्सा एवं स्वास्थ्य विभाग के आला अधिकारियों का इस ओर ध्यान नहीं होने से इस तरह के हालात पैदा हो रहे हैं। चिकित्सा विभाग ने ऐसे शवों के लिए सीएचसी स्तर पर किसी तरह का कोई प्रबंध नहीं किया है।
३०-४० शव हर माह
जिला मुख्यालय स्थित अस्पताल चौकी से लिए आंकड़ों मुताबिक हर माह करीब १४ सामुदायिक स्वास्थ्य केन्द्रों से रैफर होकर आने वाले शव करीब 30 से 40 होते हैं।
शव रखने का हो प्रबंध
जानकारों के मुताबिक पोस्टमार्टम के लिए शवों को देर रात तक खुले में रखने के मामले में 14 सीएचसी पर तो कम से कम डीप फ्रीजर की सुविधा होनी चाहिए। क्योंकि बिना पोस्टमार्टम कार्रवाई के शवों को घर ले जाने में कई बार अन्य लोगों को भी संक्रमण का खतरा बना रहता है।
जिला मुख्यालय लाने में परेशानी
जिले के डग, चौमहला, मनोहरथाना व अकलेरा क्षेत्र जिला मुख्यालय से करीब 60 से 125 किलोमीटर दूर है। इसके चलते कई बार दुर्घटना व जहरीले पदार्थ के मामलों में शवों को लाने के लिए कई तरह की व्यवस्थाएं जुटानी पड़ती है। इसके चलते मरीजों का समय एवं धन व्यय होता है। सामुदायिक स्वास्थ्य केन्द्र के पोस्टमार्टम कक्षों में इस तरह की व्यवस्थाएं समुचित नहीं होने के कारण जिला मुख्यालय पर ऐसे शवों को लाना टेढ़ी खीर हो जाता है।

देर रात को शवों को रखे जाने का प्रबंध सीएचसी स्तर पर होना चाहिए। वहीं ऐसे मामलों में सीएचसी पर डीप फ्रीजर नहीं होने की स्थिति में अब ऐसे शवों को जिला मुख्यालय पर ही रैफर करने के लिए पुलिस को भी निर्देश देंगे।
आनंद शर्मा, पुलिस अधीक्षक