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लहसुन पशुओं को खिला रहे किसान

सड़ने लगा लहसुन, किसान फेंकने को विवशराज्य सरकार की खरीद के आदेश पर कुण्डली

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लहसुन पशुओं को खिला रहे किसान

लहसुन पशुओं को खिला रहे किसान

झालावाड़, रटलाई. हाड़ौती में पिछले दो-तीन दिन से बारिश का दौर शुरू हो गया है। उमस और तपन के कारण किसानों का घरों में भरा लहसुन अब खराब होने लग गया है। इस कारण किसान अब सड़ने वाले लहसुन को खेतों में फेंकने को विवश हो गए हैं। कई जगह तो लहसुन पशुओं को खिला रहे हैं। लहसुन के दाम न्यूनतम स्तर पर आने के कारण किसानों ने बाजार हस्तक्षेप योजना में खरीद की उम्मीद से भण्डारण कर रखा है, लेकिन राज्य सरकार ने अभी तक सरकारी खरीद के आदेश जारी नहीं किए है। केन्द्र सरकार की स्वीकृति के बाद भी राज्य सरकार खरीद के आदेश पर कुण्डली मारकर बैठी है।हाड़ौती में इस बार एक लाख 15 हजार हैक्टेयर में लहसुन की बुवाई हुई थी और करीब सात लाख मीटि्रक टन उत्पादन का आंकलन किया गया है। अब भी 80 फीसदी लहसुन किसानों ने अच्छे दामों में बेचने के इंतजार में रोक रखा है। सरकार की उदासीनता से किसान परेशान है। प्रतिकूल मौसम में भण्डारण करना चुनौती गया है।

उम्मीदों पर फेरा पानी

रटलाई के किसान कैलाश पाटीदार,कमलेश,रामनारायण विष्णु आदि किसानों ने बताया कि बुवाई के समय से लेकर लहसुन घर तक आने पर कई रूपए खर्च हो गए है । सरकार ने खरीद की घोषणा तो कर दी, लेकिन लहसुन खराब हो जाने के बाद खरीद करने से क्या फायदा मिलेगा । किसानों ने बताया कि खतों में बडी उम्मीद से लहसुन बोया था कि अच्छे भाव मिलेगें तो घर में शादी,बच्चों की पढाई लिखाई के साथ सत्यनारायण भगवान की कथा करेगें । लेकिन इसी उम्मीद व इंतजार में लहसुन खराब हो चुका है ।

मंडी में ले जाकर क्या करेंगे

रटलाई के राजकीय सीनियर विद्यालय के रास्ते पर लोगों ने लहसुन के कट्टे सड़क पर पशुओं के खाने के लिए डाल दिए । मण्डी में ले जाने का खर्चा भी नहीं निकल पाने से किसान आहत है । क्षेत्र के कई किसानों ने सरकार से तुरंत बाजार हस्तक्षेप योजना के तहत खरीद करने की मांग की है । समय पर अब भी खरीद नहीं हुआ तो किसान सड़कों पर आ जाएगा।

दोहरी मार किसानों पर

केन्द्र सरकार ने बाजार हस्तक्षेप योजना के तहत खरीद की घोषणा कर दी है । लेकिन किसान सरकार व उनके कर्मचारियों के कारण दाेहरी मार झेलने का मजबूर है । एक तरफ तो सरकार समय पर खरीद नहीं कर रही है । जिसके कारण लहसुन खराब हो रहा है । दूसरी तरफ कई किसानों के खेतों में टीप के समय लहसून व प्याज पटवारियों द्वारा दर्ज ही नहीं किया गया है । सरकारी खरीद में खाते की नकल के साथ टीप की नकल भी आवश्यक है । लेकिन कई किसानों के टीप में लहसुन व प्याज की फसल दर्ज नहीं होने से किसानों पर दौहरी मार पड़ रही है ।वर्जन-