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विदेशी परिंदों को भाई बड़बेला वेटलैंड की जन्नत, कर रहे अठखेलियां

जिले के बड़बेला वेटलैंड में हर साल हजारों की संख्या में विदेशी मेहमान परिंदे आते हैं। यहां का सुरक्षित वातावरण और वेटलैंड में भोजन की प्रचुरता प्रवासी पक्षियों को खूब भाता है। लिहाजा सर्दी शुरू होते ही नवंबर माह में यहां बार हेडेड गूज, ग्रे लेग गूज, पेंटेड स्टार्क, कॉमन पिनटेल, कॉमन किंगफिशर जैसी कई प्रजातियों के प्रवासी पक्षियों का जमावड़ा शुरू हो जाता है

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Foreign birds are having a tough time in the paradise of Badbela Wetla

विदेशी परिंदों को भाई बड़बेला वेटलैंड की जन्नत, कर रहे अठखेलियां

जिले के बड़बेला वेटलैंड में हर साल हजारों की संख्या में विदेशी मेहमान परिंदे आते हैं। यहां का सुरक्षित वातावरण और वेटलैंड में भोजन की प्रचुरता प्रवासी पक्षियों को खूब भाता है। लिहाजा सर्दी शुरू होते ही नवंबर माह में यहां बार हेडेड गूज, ग्रे लेग गूज, पेंटेड स्टार्क, कॉमन पिनटेल, कॉमन किंगफिशर जैसी कई प्रजातियों के प्रवासी पक्षियों का जमावड़ा शुरू हो जाता है। जो मार्च तक यहीं प्रवास करते हैं। इसे देखते हुए राज्य सरकार ने बड़बेला को वैटलेंड घोषित किया था। यह प्राकृतिक रूप से सुरम्य, हरियाली से भरपूर और जलीय क्षेत्र के रूप में बड़ा वेटलैंड है। वेटलैंड में प्रवासी पक्षियों के लिए प्रचुर भोजन है। इसके अलावा यह इलाका सुरक्षा के लिहाज से भी अनुकूल है। इसलिए क्षेत्र में हर साल प्रवासी पक्षियों की संख्या बढ़ती जा रही है।

इस खास वजह से आते हैं-

सहायक उप वनसंरक्षक संजय शर्मा बताते हैं कि यहां पर अलग-अलग मौसम में कैस्पियन सागर, तिब्बत और साइबेरिया से प्रवासी पक्षी आते हैं। कुछ पक्षी सीजन तक यहीं बसेरा बना लेते हैं और कुछ अच्छी खुराक लेकर आगे बढ़ जाते हैं। शर्मा का कहना है कि यहां की आबोहवा प्रवासी पक्षियों की लंबी हवाई यात्रा के बाद विश्राम के लिए अनुकूल है। यहां कई पक्षी प्रजनन के बाद बच्चों को साथ लेकर चले जाते हैं, लेकिन कुछ पक्षी को यहां का वातावरण रास आने के बाद गर्मियों तक यहीं रुक जाते हैं।

इन दुलभ प्रजाति के पक्षियों की होती है आमद-

जिले के बड़बेला वेटलैंड पर बार हेडेड गूस, ग्रे लेग गूज, पेंटेड स्टार्क, कॉमन पिनटेल, कॉमन किंगफिशर, लिटिल रिंग प्लोनर, लिटिल ईग्रेट, केंटल ईग्रेड, रुडी शेडडक, ग्रे हेरोन, पर्पल हेरोन, स्पून विल, सींखफर आदि प्रजातियों के विदेशी पक्षी आते है, जिनकी संख्या हजारों में रहती है। वहीं देशी पक्षियों में सारस, छोटी डुबडुबी, टिकडी,गिर्री बतख, जांघिल,चमचा, सफेद छाती जलमुर्गी, सामान्य जलमुर्गी, सिलेटी अंजन, गजपांव, टिटहरी, करछिया बगुला, छोटा पनकौवा, जीरा बटन, गौरिया, सामान्य कबूतर, सफेद गिद्द आदि देखे जा सकते हैं। यह वेटलैंड प्रवासी पक्षियों के लिए बेहद अनुकूल है। यहां हर साल प्रवासी पक्षियों की संख्या बढ़ती जा रही है। इसके चलते पक्षियों में रूचि रखने वालों के लिए यह पसंदीदा इलाका है। इस क्षेत्र के बेहतर विकास से न सिर्फ पक्षियों का संरक्षण होगा, बल्कि पर्यटन की भरपूर संभावना विकसित होगी। यहां 5 लाख रुपए का बजट आया है जिससे कई काम करवाए जाएंगे।

इसलिए घोषित किया वेटलैंड-

असनावर तहसील के बडबेला तालाब का चयन वेटलैंड के लिए इस कारण किया गया है कि यहां वर्षपर्यंत पानी रहता है तथा पक्षियों को बेसेरा भी सुरक्षित रहता है। स्थानीय पक्षियों का वर्षपर्यंत निवास रहता है। वहीं प्रवासी पक्षी अनेकों किमी की दूरी तयकर विभिन्न देशों से यहां आवास बनाने आते हैं। जिनकी चहचहाहट एवं कलरव से आसपास का क्षेत्र गुंजायमान रहता है, जो पक्षी प्रेमियों तथा शोधार्थियों के लिए बेहद अनुकूल जगह है।

एनिकट से गिरता है जल-

बड़बेला तालाब पर बारिश के दिनों में पर्याप्त जल संग्रह होता है। यहां बड़े तालाब के आसपास की हरियाली पर्यटकों को बरबस ही अपनी ओर आकर्षित करती है।बड़े तालाब पर बने एनिकट से ओवर फ्लो होकर गिरता जल और उससे उत्पन ध्वनि कानों को झरनों का आभास करवाती है। ऐसे पहुंचा जा सकता है- बड़बेला वेटलैंड जिला मुख्यालय से 16 किमी दूर है। तक पहुंचने के लिए सड़क मार्ग से नेशनल हाइवे 52 तीनधार तक तथा वहां से 2 किमी दूरी पर बड़बेला तालाब तक पहुंच सकते हैं। बस स्टैंड से रोडवेज व निजी साधनों से भी पहुंचा जा सकता है।

पक्षियों को रहता है कलरव-

बड़बेला वेटलैंड झालावाड़ एवं झालरापाटन शहर के निकट शीत ऋतु में स्थानीय व प्रवासी पक्षियों के कलरव से गुजाइमान रहता है।यहां आने वाले पक्षी करीब 5 माह ठहरते हैं। ये पक्षी प्रेमियों व पक्षीविदों तथा शोधार्थियों के लिए अनुकूल जगह है। वी चेतन कुमार, उप वन संरक्षक, झालावाड़