गम में शांति का अहसास कराती है मोक्षधाम में छाई हरियाली

उपवन सा लगता है सुनेल का मुक्तिधाम : पूर्व सरपंच ने उठाया जीर्णोद्धार का बीड़ा

 

By: jagdish paraliya

Published: 23 Dec 2020, 09:41 PM IST

सुनेल. बड़े टीन शेड के नीचे जलती लकडिय़ां एवं दाह संस्कार, टूटे-फूटे बरामदे और शोकमग्न लोग, कुछ ऐसी ही तस्वीर होती है मुक्तिधाम की लेकिन सुनेल कस्बे के बाड़ीबल्ड़ा मोहल्ले में स्थित मोक्षधाम इससे परे है। यहां हरियाली की चादर ओढ़कर टनल एवं नयावास से सारणेश्वर जाने वाले यात्रियों को पर्यावरण संरक्षण का पैगाम भी दे रहा है। इसका सुरभ्य वातावरण आत्मिक शांति और सुकून का अहसास करवाता है।


ग्राम पंचायत सुनेल के तत्कालीन सरपंच गोविन्द धाकड़ ने मोक्षधाम की दुर्दशा को देखकर जीर्णोद्धार का बीड़ा उठाया था। इसके लिए उन्होंने सबसे पहले वर्ष 2000 में ग्राम पंचायत की गुरूगोलवकर की स्कीम के तहत लगभग पांच लाख रुपए की लागत से चार दीवारी का निर्माण करवाया। इसमें 70 प्रतिशत राशि सरकार द्वारा दी गई वह ३० प्रतिशत राशि जनसहयोग से एकत्रित की गई। इसके बाद 20 लोगों की कमेटी का गठन किया गया। कमेटी के सदस्य टीकमचंद मंडलोई ने बताया कि वर्ष 2007 में ग्राम पंचायत मद से शोक सभा भवन का निर्माण करवाया गया। जीर्णोद्धार से प्रेरित होकर भामाशाह भैरूलाल नगार कोटवाल ने टीन शेड बनवाए। वर्ष 2011-12 में ग्राम पंचायत द्वारा सीसी रोड़ का निर्माण करवाया गया। मोक्षधाम में पानी के लिए हैंडपंप, कुएं का निर्माण भी ग्राम पंचायत द्वारा करवाया गया।


हरियाली में मनरेगा का भी योगदान
महात्मा गंाधी नरेगा योजना के तहत लगभग 400 पौधे लगाएं गए जो अब बड़े हो गए है। इसमें पानी के लिए ड्रीप लगा रखी है यह मोक्षधाम लगभग 6 बीघा भूमि में है। इसमें दाह संस्कार के बाद लोगों के लिए स्नानघर बना हुआ है। बैठने के लिए पंचायत समिति और जन सहयोग से लगभग 20 बैंच लगा रखी है। लकडिय़ों एवं कंडे के लिए स्टोर रूम भी बना रखा है। मोक्षधाम के मुख्यद्वार पर फव्वारा लगा हुआ है। कमेटी द्वारा मोक्षधाम की देख-रेख के लिए चौकीदार नियुक्त कर रखा है। पेड़-पौधों का जिक्र चल तो कमेटी के सदस्य मंडलोई ने स्मृतियां ताजा की और बताया कि शुरुआत में कम पौधे लगवाए गए। अब यहां अंावला, नीम, शीशम, गुलमोहर, पीपल, बड़, बांस आदि के पेड़ है। फूलदार पौधे भी लगाएं है। यह मोक्षधाम सुंदर बगीचे में तब्दील हो गया है। इस मोक्षधाम में अब लोग दाह संस्कार करने के बाद ग्यारहवां एकादशी (घाटा) पर होने वाला कार्यक्रम भी यही करने लगे है।

कस्बे के बाड़ीबल्ड़ा मोहल्ले में स्थित मोक्षधाम में सर्वप्रथम में जब वर्ष 2000 में सरपंच बनने के बाद यहंा मुक्तधाम की बहुत बड़ी समस्या थी यंहा जब दाह संस्कार करने आते लोग तो यंहा बैठने की जगह भी नही थी इसकी कार्यकाल्प के लिए चारदीवारी, शोकसभा सहित कई जीर्णोद्वार का कार्य करवाया गया।
गोविन्द धाकड़, पूर्व सरपंच

सरकार एवं जनसहयोग से टीनशेड़, कुएं, मोटर, बाथरूम, विद्युत लाइटें, बैठने के लिए बैच आदि की व्यवस्था है। इसके अलावा गरीब लोगों के लिए लकडिय़ों एवं कंडे आदि की राशि नही ली जाती है। अब आगे हमारी यह योजना की हम यहां शंकर भगवान का मंदिर या चबूतरा बनवाया जाएगा।
टीकमचंद मंडलोई, मोक्षधाम के कमेटी सदस्य

jagdish paraliya
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