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अस्पताल को हुआ कैंसर, पांच साल में भी अधूरा

पांच साल भी कम पड़ गए एक अस्पताल बनाने के लिए -आरएसआरडीसी बना रही अस्पताल... एक्सक्लूसिव हरिसिंह गुर्जर

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Hospital got cancer, incomplete even in five years Jhalawar

अस्पताल को हुआ कैंसर, पांच साल में भी अधूरा

झालावाड़.जनाना चिकित्सालय परिसर के पीछे 11 करोड़ की लागत से बन रहे कैंसर अस्पताल का काम कछुआ चाल से चल रहा है। कार्य को शुरु हुए पांच साल हो गए है। लेकिन निर्माण कंपनी आरएसआरडी अभी तक तो प्रथम चरण का 50-60 फीसदी काम ही पूरा कर पाई है। इधर जिले में बढ़ रहे कैंसर के मरीजों को दूसरे शहरों में महंगा इलाज करवाना पड़ रहा है। जिले में इस वक्त करीब 1750 कैंसर के मरीज पंजीकृत हो चुके है। ऐसे में समय से कैंसर अस्पताल बने तो मरीजों को आसानी से इलाज की सुविधा मिले, वहीं जांच आदि भी समय से होने पर प्रथम स्टेज पर ही कैंसर का पता चल सके।

कार्य समय से नहीं होने से बढ़ रही लागत-
कैंसर अस्पताल का काम समय से पूरा नहीं होने से लगातार लागत बढ़ती जा रही है। कैंसर अस्पताल के लिए 11.95 करोड़ का बजट स्वीकृत हुआ है। आरएसआरडीसी की तरफ से कई बार काम की अवधि बढ़ाई गई है, अब तय समय दिसम्बर 2023 है। ऐसे में अगर काम इसी रफ्तार से चलता रहा तो किसी भी सूरत में तय समय पर काम पूरा होना मुश्किल है। ऐसे में सिविल वर्क व उपकरण आदि की लागत बढ़कर दुगनी होगी, जिसका सीधा भार सरकारों पर पड़ेगा। आरएसआरडीसी को प्रथम चरण में बेस मेंट, प्रथम व दूसरी मंजिल का निर्माण करना था, लेकिन अभी तक ये काम पूरे नहीं हो पाए है। ऐसे में देरी के चलते हाई ड््यूअल एनर्जी लिनीयर एक्सीलेटर की कीमत बढ़ती जा रही है।

लैप्स हो जाएगा बजट-
कैंसर अस्पताल के बजट में केन्द्र व राज्य सरकार का 60:40 के अनुपात में बजट मिलेगा। ऐसे में अगर निर्माण एजेंसी समय से काम पूरा नहीं करती है। तो केन्द्र सरकार की तरफ से मिलने वाला 60 फीसदी बजट मार्च 2024 में लैप्स हो जाएगा। ऐसे में मेडिकल कॉलेज व आरएसआरडी के सामने ये बड़ी चुनौती है कि कैंसर अस्पताल का काम समय पर पूर्ण करवाएं।

30 करोड़ के खरीदेंगे उपकरण-
टर्सरी कैंसर केयर सेंटर का संपूर्ण बजट करीब 45 करोड़ रुपए का है, जिसमें करीब 30 करोड़ रुपए की लागत से उपकरण खरीदे जाएंगे। जिसमें 25 करोड़ के रेडियोथेरेपी उपकरण होंगे, 16 करोड़ का हाई एनर्जी ड््यूअल एनर्जी लीनियर एक्सीलेटर, करीब 5 करोड़ की ब्रेकिथेरेपी मशीन, करीब 4 करोड़ का सिमुलेटर व आधुनिक जांच की मशीनें आदि शामिल है।वहीं प्रथम व दूसरे चरण का काम पूरा होगा तभी मशीनों की खरीद होगी। सूत्रों ने बताया कि मशीनें बहुत महंगी होने से उन्हे निर्माण कार्य पूण होने से पहले नहीं खरीद सकते हैं। मशीनों के इंस्टालेशन आदि में करोड़ों रुपए खर्च होते हैं, उनकी खरीद से ही उनकी गारंटी शुरु हो जाती है। ऐसे में समय से कार्य पूरा होने पर ही मशीनों की खरीद होगी।

समय से काम पूरा हो तो मरीजों को मिले ये सुविधा-
कैंसर अस्पताल में हाई एनर्जी लीनियर एक्सीलेटर स्थापित किया जाएगा। ये सीधे कैंसर ट्यूमर वाले हिस्से पर रेडिएशन डालता है। जिससे ये दूसरे सेल को खत्म करने के बजाए केवल कैंसर सेल को खत्म करता है। इसमें दूसरी मशीनों की बजाए ज्यादा रेडिएशन निकलता है। इसी कारण इसे चलाने के दौरान रेडिएशन ऑन्कोलॉजिस्ट का होना जरुरी है। इससे निकलने वाले रेडिएशन को रोकने के लिए करीब 5 फीट की दीवारों को होना जरुरी है। इसे लगाने के लिए बंकरों का निर्माण किया जा रहा है।

कैंसर अस्पताल- फैक्ट फाइल
-बजट- 11.95 करोड़
-उपकरण आदि के लिए बजट- 30 करोड़
-अतिरिक्त बजट मांगा- 2.83 करोड़
- अभी तक बजट दिया जा चुका- सवा 5 करोड़
- पूरा का समय-दिसम्बर 2023

वर्क ऑर्डर कैंसिल किया गया-
1.पहले बारिश ज्यादा हुई, इससे काम में देरी हुई। पहले वाले ठेकेदार का वर्क ऑर्डर कैंसिल किया गया है, अब नए ठेकेदार को काम दिया गया है। 21 अप्रेल2023 से काम शुरु कर दिया है। मार्च 2024 तक काम पूरा हो जाएगा। काम चल रहा है।
मनोज माथुर, पीडी, आरएसआरडीसी,झालावाड़।

2.कैंसर अस्पताल के लिए 5 करोड़ दिए जा चुके हैं,अभी तक उन्होंने यूसी नहीं दी,यूसी देने के बाद आगे बजट देंगे। अभी प्रथम चरण का काम चल रहा है।
डॉ.शिवभगवान शर्मा, डीन मेडिकल कॉलेज,झालावाड़।

3.सिविल वर्क पूरा होने के बाद ही मशीनें आदि खरीद का काम होगा। कैंसर अस्पताल का काम समय से नहीं होने से लागत बढ़ रही है। कैंसर अस्पताल बनने के बाद यहां रेडियोथेरपी आदि की सुविधा मिल सकेगी। अभी 40-50 लोगों की किमोथेरपी ही हो रही है। मरीजों को कोटा, जयपुर आदि जगह जाना पड़ रहा है।अस्पताल बनने से राजस्थान व एमपी के मरीजों को लाभ होगा।
डॉ.अरुण पटेल, नोडल अधिकारी कैंसर केयर टर्सरी सेंटर,झालावाड़।