scriptHow to deal with lumpy virus in Jhalawar without resources | झालावाड़ में बिना संसाधन के कैसे निपटेंगे, लंपी वायरस से | Patrika News

झालावाड़ में बिना संसाधन के कैसे निपटेंगे, लंपी वायरस से

 

- जिले में २ लाख से अधिक गोवंश
- दवाई व स्पे्र के लिए नहीं है हाईपोक्लोराइट

झालावाड़

Published: August 09, 2022 08:29:06 pm

झालावाड़.प्रदेश में गायों में लम्पी स्किन डिजीज कहर बनकर टूट रही है। हालांकि भगवान का शुक्र है कि झालावाड़ जिले में अभी तक इस बीमारी से ग्रसित कोई गोवंश नहीं मिला है। लेकिन अगर पशुओं में संक्रमण फैलता है कि जिले में न तो संसाधन है और न ही दवाइयां। जबकि प्रदेश के 17 जिलों में अब तक इस बीमारी से 5807 पशुओं की मौत हो चुकी है। एक लाख 20 हजार 782 पशु संक्रमित हो चुके हैं लेकिन क्या इसे रोकने के लिए पशुपालन विभाग के पास पर्याप्त साधन हैं,जवाब है नहीं। लेकिन पशुपालन विभाग ने फिर भी अपने स्तर पर इस बीमार से निपटने के लिए कमर कस ली है, कर्मचारियों के बिना अनुमति के जिला मुख्यालय छोडऩे पर रोक लगा दी गई है।
How to deal with lumpy virus in Jhalawar without resources
झालावाड़ में बिना संसाधन के कैसे निपटेंगे, लंपी वायरस से
70 फीसदी पद रिक्त, कैसे होगा उपचार-
जिले में इस समय तक ३२ डॉक्टर कार्यरत है जबकि २३ डॉक्टरों के पद रिक्त है, वहीं ११९ पशुधन सहायक कार्यरत है जबकि ६७ पद रिक्त है। ऐसे में जिले में समय पर गोवंश व अन्य पशुओं का इलाज कैसे होगा। वहीं प्रदेशभर की बात करें तो प्रदेश में पशु चिकित्सा अधिकारियों के 2243 पद स्वीकृत हैं लेकिन इनमें से 1333 पद रिक्त पड़े हैं। यानी विभाग के तकरीबन 70 फीसदी पद रिक्त हैं। यह हाल केवल पशु चिकित्सकों के पद का नहीं है बल्कि अन्य पदों की भी कुछ ऐसी ही स्थिति है। पशु चिकित्साधिकारी के साथ पशुओं का इलाज करने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाने वाले पशु चिकित्सा सहायक और पशुधन परिचर के पद भी रिक्त है।

सरकार का ध्यान नहीं, कोर्ट में अटकी भर्ती-
सूत्रों ने बताया कि सरकारों का पशुधन की ओर ध्यान नहीं है। पशुपालन विभाग में आखिरी बार पशु चिकित्सकों की भर्ती 2013 में की गई थी, इसके बाद से अब तक विभाग में पशु चिकित्सकों की भर्ती नहीं हो पाई है। हालांकि 2019 में 900 पदों पर भर्ती की प्रक्रिया शुरू की गई थी लेकिन वह भी पिछले तीन साल से कोर्ट में अटकी हुई है। ऐसे में जिला व ब्लॉक स्तर पर चिकित्सकों की भारी कमी चल रही है।

पशुपालन विभाग ने किया सर्वे-
जिले में पशुपालन विभाग ने करीब ५२ गोशालाओं का सर्वे कर लिया है। जिसमें करीब १३ हजार गोवंशों का सर्वे कर वहां देखा गया है कि किसी भी गोवंश में लंपी बीमारी के लक्षण तो नहीं है। वहीं जिले में २ लाख से अधिक गोवंश है, ऐसे में रेंडमली सर्वे करने के लिए भी कर्मचारियों को कहा गया है। वहीं करीब एक दर्जन रेपिड रेस्पोंस टीमों का गठन किया गया है। साथ ही मोबाइल यूनिट को भी हर समय तैयार रहने के लिए कहा गया है। वो भी गांवों में जा रही है।
बनाया कंट्रोल रूम-
पशुपालन विभाग ने लंपी बीमारी की सूचना देने के लिए कंट्रोल रूम बनाया गया है जिसके नंबर ०७४३२२३३५५० है, इस पर नंबर पर कहीं भी बीमारी के संदिग्ध पशु नजर आने पर सूचना दी जा सकती है।
पशुपालन विभाग के सभी कर्मचारियों के अवकाश पर आगामी आदेश तक रोक लगा दी गई है।
लंपी बीमारी: फैक्ट फाइल
-जिले में गोवंश- करीब २ लाख
-पंजीकृत गोशालाए-५२
- ५ हजार लीटर हाईपोक्लोराइट की मांग की गई
- जिले में १.५० वैक्सीन की मांग कीगई
- जिले में २३ डॉक्टरों के तथा ६७ पशुधन सहायकों के पद रिक्त चल रहे हैं।
ये लंपी बीमारी के लक्षण-
- गाय को बुखार, आंखों और नाक से स्त्रवण, वजन घटना, दूध उत्पादन में गिरावट, पूरे शरीर पर कुछ या कई ्रकठोर और दर्दनाक गठान के रुप में दिखाई देना। इसके बाद धीरे-धीरे गठानें बड़ी होना।
- इस बीमारी में गाय मो तेज बुखार आने लगता है
- गाय दूध देना कम कर देती है।
- मादा पशुओं का गर्भपात का खतरा
- आंख और नाक से पानी आना
आइसोलेट कर रखा-
जिले में अभी तक इस बीमारी का कोई गोवंश नहीं मिली। दो संग्दिध बकानी में थे उनकी पुष्टि हो गई उनमें भी कोई रोग नहीं है। फिर भी उन्हे आइसोलेट कर रखा है। डॉक्टर सहित सभी कर्मचारियों के अवकाश पर रोक लगा रखी है, विशेष परिस्थतियों में ही अवकाश दिया जाएगा। गोटपोक्स वक्सीन मंगवाई है, इससे पशुओं में इम्युनिटी डवलप हो जात हैं। दवाई के साथ ही ५ हजार लीटर हाइपोक्लोराइट की भी मांग की गई है।
डॉ.मक्खन लाल धिनोदिया,संयुक्त निदेशक पशुपालन विभाग, झालावाड़।
फिटकरी के पानी से धोंए-
किसी भी गोवंश में लंपी बीमार के लक्षण नजर आएं तो दो बार फिटकरी के पानी से नहला दें। हल्दी, अजवायन,गुड आदि के माध्यम से भी इलाज संभव है।
देवीलाल गुर्जर, प्रगतिशील पशुपालक धतुरिया, झालावाड़।

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