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Sudha Sagar Maharaj…भगवान का दर्शन करो तो अनुभूति आत्मा की करो : सुधासागर महाराज

चंद्रोदय तीर्थ क्षेत्र चांदखेडी जैन मंदिर खानपुर

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Sudha Sagar Maharaj...भगवान का दर्शन करो तो अनुभूति आत्मा की करो : सुधासागर महाराज

Sudha Sagar Maharaj...भगवान का दर्शन करो तो अनुभूति आत्मा की करो : सुधासागर महाराज

खानपुर. चंद्रोदय तीर्थ क्षेत्र चांदखेडी जैन मंदिर खानपुर में चातुर्मास के दौरान चल रहे अमृतमयी प्रवचन में मुनि पुंगव सुधासागर महाराज ने मंगलवार को ज्ञान, दर्शन चरित्र,अनुभूति, समयसार, सत्य, असत्य, हिंसा और अहिंसा सहित कई विषयों को प्रवचन में समाहित करते हुए श्रावक को जीवन से ऊपर उठकर अनुभूति कराए जाने का प्रयास किया। उन्होंने कहा कि हम आधार पर नहीं आधे तक पहुंच पाए हैं। ज्ञान, ज्ञानवान, चरित्र,चरित्रवान, ज्ञानी और ज्ञानवान तक पहुंच पाए हैं। हमे साधना की अनुभूति हुई है। जितने दृव्य हैं हम सभी को अनुमान से जानते हैं। जब तक हम संसार में हैं अधूरे रहेंगे। सुधा सागर ने कहा कि ज्ञान प्राप्त करना, दर्शन करना लक्ष्य नहीं है, ये तो धुंआ है। परोक्ष में प्रत्यक्ष की अनुभूति करना है। साधन को साध्य मत मान लेना, उन्होंने कहा मनुष्य से हिंसा तो होगीए जानबूझ कर होगी। श्वास लेने में हिंसा होती हैए हर जगह हिंसा है, हम हिंसा से रहित नहीं हो पाएंगे। उन्होंने कहा अनुभूति प्रत्यक्ष की होती है परोक्ष की नहीं। रूप के ज्ञान में अरूप की अनुभूति करो। ज्ञानी को रस की अनुभूति नहीं होती। उन्होंने कहा जैन दर्शन बिलकुल सरल है। समय सार एक सरल रेखा हैए लेकिन कठिन दिख रहा है। सुधा सागर महाराज ने कहा कि भगवान की मूर्ति पाषण की हैए उसमें भगवान की अनुभूति करो। मूर्ति को देखकर मूर्ति की अनुभूति की तो दिन व्यर्थ हो जाएगा। मूर्ति तो प्रतिबिंब है, आंखंो से तो पाषाण ही दिखाई देगा, मंदिर में मूर्ति को ज्ञान से जानो। चांदखेडी के अध्यक्ष हुकम जैन काका ने बताया कि चन्द्रोदय तीर्थ क्षेत्र में चल रहे नियमित प्रवचन हर वर्ग को खुशी का अहसास करा रहे हैं। श्रावक का जीवन सरलए सहज व कष्टमुक्त हो इसका सार बताया जा रहा है। कमेटी के महामंत्री नरेश जैन वैद, कोषाध्यक्ष गोपाल जैन,अजय बाकलीवाल, महावीर जैन, प्रशांत जैन, कैलाश जैन सहित कमेटी के सदस्यों द्वारा चातुर्मास के दौरान व्यवस्थाओं को संभाला जा रहा है। प्रवचन में अपना सहयोग दिया जा रहा है। मुनि श्री के संघ में मुनि महासागर महाराज, मुनि निष्कंप सागर महाराज, क्षुल्लक गंभीर सागर और धैर्य सागर महाराज की उपस्थिति में धर्म, ज्ञान लाभ प्राप्त हो रहा है।