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2018 में चारों विधानसभाओं में जमकर चला था नोटा :16 प्रत्याशियों को नोटा से भी कम वोट मिले थे

विधानसभा चुनाव 2018 में झालावाड़ जिले की चारों विधानसभाओं में वोट के साथ नोटा का भी खूब प्रयोग हुआ था। ऐसे में इस बार भी दोनों ही दलों कये प्रत्याशी नोटा से बचने की रणनीति बनाकर मैदान में कार्यकर्ताओं को जागरुक कर रहे हैं

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In 2018, NOTA was heavily used in all four assemblies: 16 candidates got less votes than NOTA.

2018 में चारों विधानसभाओं में जमकर चला था नोटा :16 प्रत्याशियों को नोटा से भी कम वोट मिले थे

डेटा डीकोडेड

हरिसिंह गुर्जर
विधानसभा चुनाव 2018 में झालावाड़ जिले की चारों विधानसभाओं में वोट के साथ नोटा का भी खूब प्रयोग हुआ था। ऐसे में इस बार भी दोनों ही दलों कये प्रत्याशी नोटा से बचने की रणनीति बनाकर मैदान में कार्यकर्ताओं को जागरुक कर रहे हैं। हैरात की बात तो ये है कि जिले की खानपुर विधानसभा में एक प्रत्याशी की हार तो नोटा को मिले वोट से भी कम वोट से हुई थी। प्रत्याशी अपने कार्यकर्ताओं से यह कहते दिख रहे हैकि जितने भी मतदाताओं को बूथ तक पहुंचाओं, उन्हे चुनाव चिन्ह सही से समझाने में भूल मत करना। जिले में चारों विधानसभाओं में 2018 में सबसे ज्यादा नोटा का प्रयोग डग विधानसभा में हुआ है जहां 4247 लोगों ने दोनों प्रत्याशियों को पसंद नहीं कर नोटा को चुना था। वहीं झालरापाटन विधानसभा से भाजपा की वसुन्धरा राजे ने 34980 वोट से कांग्रेस के मानवेन्द्रसिंह को हराया था। यहां 3125 लोगों ने नोटा दबाया था। हालांकि इस बार नोटा या किसी प्रत्याशी को कितने वोट मिलते है, यह तो अगले महीने ही सामने आएगा।

यह है नोटा-

नन ऑफ द एबव यानी उपरोक्त में से कोई नहीं। भारत निवार्चन आयोग ने विधानसभा चुनाव 2018 में इलेक्ट्रॉनिक वोटिंग मशीन में नोटा का बटन दिया गया था। वर्ष 2015 में नोटा पूरे देश में लागू किया गया। यह बटन सबसे आखिरी में होता है। नोटा सबसे ज्यादा वोट हांसिल करता है तो उस जगह पर चुनाव दोबारा करवाना होता है।

खानपुर विधानसभा में सबसे कम रहा नोटा-
जिले में 16 प्रत्याशी ऐसे भी थे, जिन्हे नोटा से भी कम वोट मिले। इसमें सबसे कम नोटा खानपुर विधानसभा में 2415 तथा सबसे ज्यादा नोटा का प्रयोग 4247 डग विधानसभा में किया गया। इस बार जिले में कई ग्रामीण क्षेत्रों में मतदान का बहिष्कार किया जा रहा है। ऐसे में इसबार भी नोटा का सोटा जमकर चलने वाला है। यहां गत चुनाव में प्रत्याशी यदि नोटा के वोट को ही कवर कर लेता तो भी हारा हुआ प्रत्याशी जीत सकता था।

कम आंकने की भूल-
इस बार विधानसभा चुनाव में नोटा के पिछले आंकड़ों को अनदेखा करना बड़ी भूल हो सकती है। वर्ष 2013 व 2018 में नोटा ने हरेक विधानसभा क्षेत्र में धाक जमाई थी, इस बार भी कई सीटों पर हार-जीत की टक्कर वाली सीटों पर हार-जीत का गणित बिगड़ सकता है। जिले में कुछ राजनीतिक पार्टी व निर्दलीय प्रत्याशी ऐसे भी है, जिनको नोटा से भी कम वोट मिले। जिले में ऐसे प्रत्याशियों की संख्या 16 है।
2018 चुनाव: इतने लोगों को मिले नोटा से कम वोट
विधानसभा: खानपुर
1. मोहनलाल 1756
2. नन्दकिशोर शर्मा 1334
3. कन्हैयालाल 463
4. प्रमोद कुमार तिवारी 1334
5. रतनलाल 715

विधानसभा: डग
1. रामस्वरुप 2078
2. जयप्रकाश 1071
3. विक्रमला दसौरिया 2875

विधानसभा: झालारापाटन
1. गोवर्धन दांगी 1602
2. करण शर्मा 497
3. मोहम्मद नासिर 567
4.वीरम लाल 1215

विधानसभा: मनोहरथाना

1.चन्द्रसिंह 1793
2.आबिद अहमद 749
3.हरिशंकर 675
4.मनीषा मीणा-1479

अरबों रुपए खर्च करता-
विधानसभा चुनाव में निर्वाचन विभाग करोड़ों अरबों रुपए खर्च करता है। ऐसे में मतदान में नोटा का अधिक प्रयोग करना समझादी नहीं है। किसी भी क्षेत्र में लोगों को समस्या हो सकती है, उसका बाद में प्रत्याशी से बात कर समाधान किया जा सकता है। जिले में चारों विधानसभाओं में 8 प्रत्याशी तो ऐसे होंगे जिनमें से चार प्रत्याशियों का चयन करें। लोकतंत्र को मजबूत बनाने के लिए अपनी पसंद का जो भी उम्मीदवार हो उसे वोट जरुर दें, तभी भारत निर्वाचन आयोग के मतदान बढ़ाने का लक्ष्य भी पूरा हो पाएगा। जीतमल नागर, सह प्रभारी स्वीप अभियान,झालावाड़।